यूरोप में रूस की ओर से तोड़फोड़ और जासूसी के अभियानों में भारी तेजी, रक्षा ठिकानों को बनाया जा रहा है निशानादेशभर में थम क्यों नहीं रहीं दुष्कर्म की घटनाएं, क्या निर्भया कानून के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं हमारी बेटियांभीलवाड़ा का ऐतिहासिक दूधाधारी गोपाल मंदिर, जहां जन्माष्टमी पर दिखता है वृंदावन जैसा भव्य नजाराभारतीय रुपया मजबूत होकर 94.27 प्रति डॉलर पर पहुंचा, रिजर्व बैंक के दखल से मिली मजबूतीगोंडा के आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार शुगर के मरीजों को किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यानघर में शंख बजाने के क्या हैं वैज्ञानिक और आध्यात्मिक फायदेत्योहारों पर बिना पार्लर गए चमकेगी त्वचा, नहाने से पहले लगाएं बेसन और दूध का यह आसान घरेलू नुस्खाहिमालयी क्षेत्रों में लगातार क्यों बढ़ रहे हैं आपदाओं के खतरे, पूर्व-चेतावनी प्रणालियां क्यों साबित हो रही हैं बेअसरअमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मंदी के रुख के बीच दोतरफा जोखिम, ओओसीबीसी की रिपोर्टनेपाल सुरंग हादसे में नौ दिन बाद जिंदा लौटे संजय साह, कृष्ण जन्माष्टमी पर बचाई गई जान
असम के सात जिलों में फिर बढ़ा बाढ़ का संकट, 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित और कुल मृतक संख्या 108 पहुंचीअसम
3 सित॰ 2026, 2:51 pm (1 दिन पहले)· 0

असम के सात जिलों में फिर बढ़ा बाढ़ का संकट, 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित और कुल मृतक संख्या 108 पहुंची

असम में मानसूनी बाढ़ के नए दौर से सात जिलों के 25,083 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि राज्य में इस साल बाढ़ से जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 108 हो गया है।

असम राज्य में मानसूनी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति एक बार फिर गंभीर हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सात जिलों में बाढ़ के इस नए दौर से 25,000 से अधिक नागरिक सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। जलभराव और नदियों के उफान के कारण कई बस्तियां, बुनियादी ढांचा और कृषि क्षेत्र जलमग्न हो चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

प्रभावित जिले और राहत कार्य

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ का यह नया प्रकोप गोआलपारा, शिवसागर, विश्वनाथ, नगांव, मोरीगांव, वेस्ट कर्बी आंगलोंग और कछार जिलों में फैला हुआ है। इन सात जिलों के कुल 155 गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे 25,083 ग्रामीण प्रभावित हुए हैं। बेघर और प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए प्रशासन ने अब तक 13 राहत शिविर स्थापित किए हैं। स्थानीय जिला प्रशासन और आपदा प्रतिक्रिया टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य चला रही हैं।

ये भी पढ़ें

हताहतों की संख्या और कृषि क्षेत्र को नुकसान

बाढ़ के इस ताजा दौर में वेस्ट कर्बी आंगलोंग जिले में एक व्यक्ति की जान चली गई है। इसके साथ ही असम में इस वर्ष बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 108 हो गई है। इसके अलावा, बाढ़ के पानी ने कृषि गतिविधियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। राज्य में लगभग 6,477.31 हेक्टेयर फसल भूमि पूरी तरह जलमग्न हो गई है। कृषि पर निर्भर किसान परिवारों के सामने आजीविका का बड़ा संकट पैदा हो गया है। अधिकारी अब नुकसान का सटीक आकलन कर रहे हैं।

नदियों का जलस्तर और आगे का खतरा

राज्य की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी और मतीजूरी में कटाखाल नदी अपने-अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन निचले और संवेदनशील इलाकों की स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहा है ताकि जलस्तर में और बढ़ोतरी होने पर त्वरित कदम उठाए जा सकें। नदियों के बदलते जलस्तर को देखते हुए आपदा प्रबंधन बल और संबंधित विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।

सवाल-जवाब

असम के बाढ़ के इस नए दौर में कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
इस नए दौर में सात जिलों के 155 गांवों के कुल 25,083 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन ने कितने राहत शिविर बनाए हैं?
बेघर और प्रभावित नागरिकों को आश्रय देने के लिए अधिकारियों ने 13 राहत शिविर खोले हैं।
असम में इस साल बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या कितनी हो गई है?
वेस्ट कर्बी आंगलोंग में एक नई मौत दर्ज होने के बाद इस साल बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 108 हो गया है।
बाढ़ के पानी से कितने हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है?
बाढ़ के पानी की चपेट में आने से लगभग 6,477.31 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
कौन सी नदियाँ वर्तमान में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं?
नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी और मतीजूरी में कटाखाल नदी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 घंटे पहले

असम में हर साल आने वाली यह बाढ़ सिर्फ एक मानसूनी आपदा नहीं, बल्कि हमारी जल प्रबंधन नीतियों और दीर्घकालिक प्रशासनिक तैयारियों की गंभीर समीक्षा की मांग करती है। जिस तरह से सात जिलों में हजारों हेक्टेयर फसल जलमग्न हुई है और मृतक आंकड़ा 108 तक पहुंचा है, उससे साफ है कि तात्कालिक राहत शिविरों के अलावा एक स्थायी अंतर-राज्यीय और केंद्रीय समन्वय नीति की सख्त आवश्यकता है, ताकि हर साल होने वाले इस आर्थिक और मानवीय नुकसान को रोका जा सके।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·23 घंटे पहले

असम के सात जिलों में बार-बार बाढ़ आना और कृषि भूमि का जलमग्न होना मात्र प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि खगोलीय और मौसमी चक्रों के बदलते स्वरूप का संकेत है। जिस प्रकार धनसिरी और कटाखाल नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और 108 जानें जा चुकी हैं, उससे स्पष्ट है कि पारंपरिक जल प्रबंधन के साथ-साथ दीर्घकालिक भौगोलिक और शास्त्रीय आंकलन की आवश्यकता है। केवल राहत शिविरों से काम नहीं चलेगा, बल्कि नदियों के जलस्तर और मानसूनी प्रवृत्तियों का सटीक डिजिटल डेटा संरक्षण कर भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए वैज्ञानिक व नीतिगत समन्वय अति आवश्यक है, ताकि इन क्षेत्रों के आर्थिक और मानवीय संकट को थामा जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

असम में बार-बार आने वाली बाढ़ और 108 तक पहुँची मौतों का आंकड़ा प्रशासनिक नीति और पर्यावरण सुरक्षा की गंभीर समीक्षा की मांग करता है। राहत शिविरों और तात्कालिक बचाव कार्यों से आगे बढ़कर, नदियों के जलस्तर की निगरानी और कृषि क्षेत्र को बचाने के लिए एक दीर्घकालिक और पुख्ता कानूनी व ढांचागत रणनीति की आवश्यकता है, ताकि हर साल होने वाले इस मानवीय और आर्थिक संकट को टाला जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

असम में बाढ़ के कारण 6,477 हेक्टेयर से अधिक फसल भूमि का जलमग्न होना और 108 तक पहुँची मौतों का आँकड़ा केवल एक मौसमी आपदा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा वित्तीय झटका है। जब तक कृषि क्षेत्र और ग्रामीण आजीविका के पुनर्वास के लिए बीमा कवरेज, आधुनिक जल निकासी और मजबूत ढांचागत निवेश को नीतिगत प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक हर साल होने वाला यह आर्थिक नुकसान राज्य के वित्तीय विकास को पीछे धकेलता रहेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR