असम के कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले की एक विशेष एनडीपीएस अदालत ने छह साल पुराने मादक पदार्थ तस्करी के मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए तीन लोगों को 15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की गुवाहाटी जोनल यूनिट ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने तीनों दोषियों पर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को एक साल की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
छह साल पुराने मामले में आया फैसला
यह पूरा कानूनी मामला अक्टूबर 2020 का है, जब कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने गुवाहाटी के सिक्स माइल इलाके से इन तीनों आरोपियों को पकड़ा था। उस दौरान उनके पास से दो किलो एक सौ छियालीस ग्राम मेथाम्फेटामाइन बरामद हुई थी। इस जब्ती के तुरंत बाद नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत इनके खिलाफ आधिकारिक मामला दर्ज किया गया था। लंबे समय चली अदृश्य कानूनी प्रक्रिया के बाद अब जाकर विशेष अदालत ने इस मामले में अपना अंतिम और कड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत द्वारा सजा पाने वाले इन तीनों तस्करों की पहचान शकील खान, मोहम्मद यहिया खान और मिथिलेश कुमार के रूप में हुई है, जिनमें से शुरुआती दो लोग मणिपुर से ताल्लुक रखते हैं और तीसरे आरोपी मिथिलेश कुमार का संबंध बिहार राज्य से है।
श्रीभूमि जिले में बड़ी मात्रा में याबा गोलियां बरामद
दूसरी तरफ असम के श्रीभूमि जिले में पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ एक अन्य बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस अभियान के दौरान अधिकारियों ने चौदह हजार याबा टैबलेट्स को अपने कब्जे में लिया जिनकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग एक करोड़ चालीस लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने यह जब्ती बदरपुर इलाके में दो संदिग्ध वाहनों को रोककर की। इस संपूर्ण अभियान और जब्ती के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री हिंतमा बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से बताया कि श्रीभूमि पुलिस ने बदरपुर में दो वाहनों को रोककर भारी मात्रा में नशीली गोलियां पकड़ी हैं और मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्यमंत्री ने इस सफल कार्रवाई के लिए असम पुलिस की पीठ थपथपाई और उनकी कार्यशैली की सराहना की।
याबा और मेथाम्फेटामाइन की प्रकृति
विशेषज्ञों के मुताबिक याबा एक बेहद खतरनाक और प्रतिबंधित मादक पदार्थ है जिसमें मेथाम्फेटामाइन और कैफीन जैसे उत्तेजक तत्व मिले होते हैं। भारत में इस तरह के मादक पदार्थों के व्यापार, सेवन और भंडारण पर पूरी तरह से कानूनी प्रतिबंध लगा हुआ है। नियंत्रित पदार्थ अधिनियम के तहत मेथाम्फेटामाइन को एक खतरनाक श्रेणी का पदार्थ माना जाता है जिसके अवैध कारोबार पर बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। राज्यभर में मादक पदार्थों के अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे विशेष अभियान चला रही हैं ताकि युवा पीढ़ी को इस नशे के जाल से बचाया जा सके।


















