गुवाहाटी: पूर्वोत्तर राज्य असम में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार को नेस्तनाबूद करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य की पुलिस व्यवस्था को और अधिक धारदार बनाते हुए एक नई और विशेष इकाई का गठन किया जाने वाला है, जिसका मुख्य उद्देश्य ड्रग्स के अवैध नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करना है। पुलिस अधीक्षकों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक के समापन सत्र के तुरंत बाद इस नई रणनीति का ऐलान किया गया, जिससे राज्य की सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक ताकत मिलने की उम्मीद है।
राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए जानकारी दी कि आगामी एक महीने के भीतर असम पुलिस के भीतर एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स वजूद में आ जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इस तरह की एक विशेष इकाई के गठन का सुझाव केंद्र सरकार की तरफ से भी पहले दिया गया था, जिस पर अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
कानूनी और वित्तीय मोर्चे पर होगी कड़ी निगरानी
प्रस्तावित इस नई टास्क फोर्स के ढांचे में कई विशेष विंग शामिल किए जाने की योजना है, जिनमें मुख्य रूप से कानूनी मामलों और वित्तीय लेनदेन की जांच करने वाली शाखाएं होंगी। इन विशेष इकाइयों की प्राथमिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना होगी कि ड्रग्स के मामलों में गिरफ्तार होने वाले आरोपियों को आसानी से जमानत न मिल सके। इसके अलावा, यह विंग उन वित्तीय ताने-बाने और हवाला चैनलों का भी पर्दाफाश करेगी जो परदे के पीछे से ड्रग्स सिंडिकेट को आर्थिक मदद मुहैया कराते हैं।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस विशेष बल का एक अन्य प्रमुख कार्य नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट का अत्यंत कड़ाई से पालन करवाना होगा। कानून के प्रावधानों को पूरी सख्ती से लागू करके तस्करों और अवैध कारोबारियों के लिए न्यायिक शिकंजा कसने की तैयारी है, ताकि इस गैरकानूनी धंधे में लिप्त लोगों को किसी भी प्रकार की राहत न मिल सके।
दोषसिद्धि की दर बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
असम सरकार ने अदालतों में मुकदमों के निपटारे और अपराधियों को सजा दिलाने के मामले में एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। पुलिस जिन मामलों में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है, उनमें साल के अंत तक दोषसिद्धि की दर को बढ़ाकर 35 प्रतिशत तक पहुंचाने का टारगेट रखा गया है। वर्तमान समय में यह कनविक्शन रेट 29.3 प्रतिशत के स्तर पर है, जो साल 2020 में महज सात प्रतिशत के आसपास हुआ करता था।
इस दिशा में प्रगति को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस महकमा अब इस साल के भीतर ही 35 प्रतिशत की दोषसिद्धि दर का आंकड़ा छूने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। वर्तमान प्रशासनिक दक्षता का हाल यह है कि पुलिस थानों में दर्ज होने वाले कुल मामलों में से करीब 80 प्रतिशत मामलों में तय समय-सीमा के भीतर ही चार्जशीट दाखिल कर दी जाती है, जिससे मुकदमों की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ती है।
पड़ोसी राज्यों के साथ तालमेल और ट्रांजिट रूट की घेराबंदी
गुवाहाटी में आयोजित दो दिवसीय पुलिस अधीक्षकों के सम्मेलन के दौरान इस बात पर भी बेहद गंभीर चर्चा हुई कि नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए कौन-कौन से रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है। बैठकों के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस बात की खास जरूरत महसूस की कि तस्करों के इन ट्रांजिट रूट्स को पूरी तरह से सील करने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर साझा कार्रवाई की जानी बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि असम पुलिस को अपनी सीमाओं के पार प्रभावी कार्रवाई करने के लिए मिजोरम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की पुलिस एजेंसियों के साथ मिलकर ठोस समन्वय बिठाना होगा। यदि इन पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर इन रास्तों को नहीं रोका गया, तो सीमावर्ती क्षेत्रों से होकर होने वाली नशीले पदार्थों की ढुलाई पर पूरी तरह से लगाम कसना बेहद कठिन साबित हो सकता है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पुलिस बल के भीतर लंबे समय से लंबित पड़ी पदोन्नतियों की प्रक्रिया को शीघ्र ही पूरा किया जाएगा, जिससे विभाग के भीतर नई भर्तियों के लिए पर्याप्त रिक्तियां सृजित हो सकेंगी। सरकार की आगामी योजना के तहत अगले साल असम पुलिस में लगभग 5,000 नए कर्मियों की सीधी भर्ती की जाएगी, जिससे मैदानी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। पिछले पांच वर्षों के दौरान पुलिस महकमे में लगभग 21,000 युवाओं को रोजगार मिल चुका है, और मौजूदा कार्यकाल के दौरान सरकार की मंशा अतिरिक्त 15,000 से 20,000 लोगों को पुलिस बल में शामिल करने की है।





















