क्रिप्टो बाजार में लौटी रौनक के बीच पाई नेटवर्क में सुधार, लेकिन अहम स्तरों पर फंसा टोकनअमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 से 18 के सीमित दायरे में रहेगा मैक्सिकन पेसो, ब्याज दरों के नए आकलन से बढ़ेगी हलचलअमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो पर दबाव जारी, 1.1450 के समर्थन स्तर पर टिकी बाजार की निगाहेंहड्डियों और जोड़ों के पुराने दर्द में संजीवनी साबित हो रहा लोबान, सूजन से लड़ने में मिला वैज्ञानिक आधारबैंक ऑफ जापान के रेट चेक से संभला येन, मुद्रा हस्तक्षेप की आशंकाओं के बीच डॉलर 157 के नीचे फिसलाडीजल की जोरदार मांग से कच्चे तेल में भारी उछाल के संकेत, सोसिएते जेनेराल ने 150 डॉलर तक दाम जाने का जताया अनुमानअमेरिकी डॉलर में मजबूती और कच्चे तेल की नरमी के बीच सोने की कीमतों में गिरावट, मध्य पूर्व कूटनीति पर नजरसोने में सीमित दायरे में कारोबार के आसार, मजबूत मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से निचले स्तरों पर सहारागुब्बारे जैसी फूली और खस्ता पूरी बनाने के आसान नुस्खे, आटा गूंथने से लेकर तलने तक की पूरी विधिदही-चावल से अलग है बुंदेलखंडी महेरी का जायका, आसान विधि से घर पर ऐसे बनाएं पौष्टिक व्यंजन
मेघालय के मुकरोह में असम पुलिस की कथित आवाजाही से तनाव, ग्राम परिषद ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवालअसम
21 सित॰ 2026, 5:37 pm (22 मिनट पहले)· 0

मेघालय के मुकरोह में असम पुलिस की कथित आवाजाही से तनाव, ग्राम परिषद ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

मेघालय के संवेदनशील सीमावर्ती गांव मुकरोह में असम पुलिस के 20 से अधिक जवानों के हथियारों सहित प्रवेश करने पर स्थानीय ग्राम परिषद ने कड़ी आपत्ति जताई है और प्रशासन से जवाब मांगा है।

मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले में स्थित संवेदनशील सीमावर्ती गांव मुकरोह में असम पुलिस के 20 से अधिक हथियारबंद जवानों के कथित तौर पर दाखिल होने के बाद स्थानीय आबादी में भारी चिंता और असमंजस की स्थिति बन गई है। इस अचानक हुई गतिविधि के बाद मुकरोह के स्थानीय ग्राम परिषद, डोरबार श्नोंग मुकरोह पिलुन, ने राज्य पुलिस प्रशासन को औपचारिक पत्र लिखकर इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांगा है और सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा चौकसी बढ़ाने की मांग की है।

हथियारबंद जवानों की आवाजाही और स्थानीय लोगों की चिंता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर लगभग 12 बजकर 45 मिनट पर असम पुलिस के 20 से अधिक वर्दीधारी जवान मुकरोह के फलांग इलाके में पहुंचे। ये सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर वर्दी में थे और उनके पास हथियार भी थे। वे लुमथिडो की दिशा से एनईसी सड़क और गांव के एक आंतरिक मार्ग से होते हुए पैदल आगे बढ़े। गांव के रिहायशी क्षेत्र में इस प्रकार हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों के सीधे मार्च करने से ग्रामीण हैरान रह गए, क्योंकि इलाके में पूर्व में भी अंतर-राज्यीय सीमा को लेकर गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं।

ये भी पढ़ें

प्रशासनिक पूर्व सूचना के अभाव पर उठे गंभीर सवाल

डोरबार श्नोंग मुकरोह पिलुन ने बरातो पुलिस चौकी के प्रभारी को भेजे गए एक पत्र में कहा कि असम पुलिस के इन जवानों की यह आवाजाही बिना किसी पूर्व सूचना के हुई। ग्राम परिषद का कहना है कि न तो गांव की पारंपरिक परिषद को, न ही स्थानीय नागरिकों को और न ही इलाके में तैनात मेघालय पुलिस के कर्मियों को इस गतिविधि की पहले से कोई जानकारी दी गई थी। इसके साथ ही इस दल के साथ कुछ समाचार पत्रकार और कैमरामैन भी मौजूद थे, जो गांव के भीतर हो रहे इस मार्च की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। ग्राम परिषद ने इस बात पर भी कड़ा एतराज जताया है कि बाहरी पत्रकारों और कैमरामैन ने मेघालय के क्षेत्र में वीडियो बनाने के लिए राज्य के सक्षम अधिकारियों से अनुमति ली थी या नहीं।

मेघालय के सुरक्षा चौकियों की निगरानी पर सवाल

ग्राम परिषद ने स्पष्ट किया है कि मुकरोह पूरी तरह से मेघालय के अधिकार क्षेत्र में आता है और यह वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले के लस्कीन ब्लॉक स्थित बरातो पुलिस चौकी के अंतर्गत है। डोरबार श्नोंग ने सवाल किया कि किस अधिकार और नियम के तहत असम पुलिस के जवान गांव में दाखिल हुए और फलांग की ओर बढ़े। परिषद ने विशेष रूप से यह जानने की मांग की है कि क्या बरातो पुलिस चौकी या वेस्ट जयंतिया हिल्स जिला पुलिस को इस आवाजाही की कोई अग्रिम सूचना मिली थी, और यदि ऐसी कोई सूचना आई थी, तो गांव के प्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों को भरोसे में क्यों नहीं लिया गया।

इसके अलावा, सीमावर्ती क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। मुकरोह में एक बॉर्डर आउटपोस्ट यानी बीओपी स्थित है, जबकि लुमथ्रीडो में मेघालय पुलिस बटालियन का कैंप स्थापित है। ग्राम परिषद के अनुसार, असम पुलिस के जवान अपनी आवाजाही के दौरान इन दोनों सुरक्षा प्रतिष्ठानों के बिल्कुल सामने से होकर गुजरे। इसके बावजूद उन्हें बिना किसी जांच या रोक-टोक के आगे बढ़ने दिया गया। ग्राम परिषद ने यह स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या बीओपी और मेघालय पुलिस बटालियन के प्रभारी अधिकारी इस आवाजाही से अवगत थे और सुरक्षाकर्मियों को इस प्रकार खुले तौर पर गुजरने की अनुमति क्यों दी गई।

2022 की हिंसा की पृष्ठभूमि और सीमा समन्वय की मांग

मुकरोह एक बेहद संवेदनशील अंतर-राज्यीय सीमावर्ती क्षेत्र है। यह वही स्थान है जहां 22 नवंबर 2022 को गोलीबारी की एक बेहद दुखद और हिंसक घटना घटित हुई थी। डोरबार श्नोंग ने रेखांकित किया कि बिना समन्वय के हुई इस ताजा गतिविधि ने स्थानीय लोगों के मन में डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्राम परिषद ने बरातो पुलिस चौकी से लिखित स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया है। इसके साथ ही वेस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है ताकि इस पूरे मामले को असम के वेस्ट कार्बी आंगलोंग के पुलिस अधिकारियों के समक्ष मजबूती से उठाया जा सके। डोरबार श्नोंग ने दोनों राज्यों के बीच मौजूदा सीमा समझौतों और व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए मांग की है कि भविष्य में मुकरोह में असम पुलिस की किसी भी तरह की आवाजाही से पहले दोनों राज्यों के बीच पूर्व सूचना और उचित समन्वय सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ग्रामीणों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुकरोह बीओपी पर गश्त बढ़ाने और सुरक्षा प्रबंधों को तत्काल मजबूत करने की अपील की गई है।

सवाल-जवाब

मुकरोह गांव में क्या घटना घटी?
सोमवार को असम पुलिस के 20 से अधिक वर्दीधारी और हथियारबंद जवान कथित तौर पर मेघालय के मुकरोह गांव के फलांग इलाके में दाखिल हुए।
स्थानीय ग्राम परिषद ने क्या कदम उठाया है?
डोरबार श्नोंग मुकरोह पिलुन ने बरातो पुलिस चौकी को पत्र लिखकर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
क्या इस आवाजाही की पहले से कोई सूचना दी गई थी?
ग्राम परिषद के अनुसार इस आवाजाही के बारे में गांव की परिषद, स्थानीय निवासियों या वहां तैनात मेघालय पुलिस को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।
सुरक्षा चौकियों पर क्या सवाल उठाए गए हैं?
परिषद ने सवाल किया कि जवान मुकरोह बीओपी और मेघालय पुलिस बटालियन के सामने से गुजरे, फिर भी उन्हें बिना रोक-टोक क्यों जाने दिया गया।
मुकरोह गांव क्यों संवेदनशील माना जाता है?
मुकरोह एक संवेदनशील अंतर-राज्यीय सीमा क्षेत्र है जहां 22 नवंबर 2022 को घातक गोलीबारी की घटना हुई थी।
ग्राम परिषद ने किन प्रशासनिक अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है?
परिषद ने वेस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप करने और असम के वेस्ट कार्बी आंगलोंग पुलिस के साथ मामला उठाने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

मुकरोह का यह संवेदनशील मामला कानून-व्यवस्था और अंतर-राज्यीय समन्वय में गंभीर प्रशासनिक चूक को उजागर करता है। बिना पूर्व सूचना के हथियारबंद सुरक्षा बलों का किसी दूसरे राज्य के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश करना तनाव और झड़प को जन्म दे सकता है। पूर्व की हिंसक घटनाओं से सबक लेते हुए, दोनों राज्यों के पुलिस बलों को सीमावर्ती इलाकों में गश्त और संवाद के लिए सख्त एसओपी का पालन करना चाहिए, अन्यथा स्थानीय नागरिकों का आक्रोश और बढ़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 मिनट पहले

मुकरोह में घटी यह घटना केवल स्थानीय तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और निवेश के माहौल को भी बुरी तरह प्रभावित करती है। जब अंतर-राज्यीय सीमाओं पर इस तरह की प्रशासनिक अनिश्चितता और सुरक्षा संबंधी असहजता बार-बार सामने आती है, तो लॉजिस्टिक्स, आपूर्ति श्रृंखला और सीमावर्ती व्यापार से जुड़े छोटे-मोटे व्यवसायों का विश्वास डगमगा जाता है। इस संवेदनशील इलाके में स्थिरता बहाल करने के लिए दोनों राज्यों को तुरंत एक मजबूत और पारदर्शी संवाद तंत्र स्थापित करना चाहिए ताकि व्यापारिक और सामाजिक शांति बनी रहे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp