मिजोरम में खेल प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से एक नई तीरंदाजी अकादमी स्थापित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी ने इस महत्वाकांक्षी खेल परियोजना के लिए 13.28 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस अकादमी की स्थापना मिजोरम के मामित जिले में स्थित लेंगपुई में की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में खेल बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाना और स्थानीय युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
एमओए पर हस्ताक्षर और संचालन की जिम्मेदारी
इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए असम के कोकराझार जिले में स्थित एनटीपीसी की बोंगाईगांव यूनिट ने मिजोरम स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल के साथ एक औपचारिक समझौता ज्ञापन यानी एमओए पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट एनटीपीसी की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में चलाए जा रहे विकास कार्यों का एक अहम हिस्सा है।
समझौते की शर्तों के मुताबिक, मिजोरम स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल इस परियोजना की नोडल क्रियान्वयन एजेंसी के तौर पर काम करेगी। अकादमी के निर्माण, दैनिक संचालन और देखरेख का पूरा जिम्मा काउंसिल पर ही रहेगा। वहीं एनटीपीसी बोंगाईगांव परियोजना के लिए पूरी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ समय-समय पर समीक्षा और आकलन करके निर्माण व प्रशिक्षण की प्रगति पर नजर रखेगी।
खिलाड़ियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
लेंगपुई में तैयार होने वाली इस अकादमी का प्राथमिक लक्ष्य दूरदराज के क्षेत्रों से उभरती हुई युवा प्रतिभाओं की पहचान करना है। अकादमी में भर्ती होने वाले तीरंदाजों की तकनीक को निखारने और उन्हें जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तरह तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय कोचिंग, आधुनिक उपकरण, नियमित अभ्यास सत्र और संरचित विकास कार्यक्रम मुहैया कराए जाएंगे। इसका मकसद मिजोरम के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों तथा उभरते एथलीटों को तीरंदाजी की तरफ आकर्षित करना है।
पूर्वोत्तर में जमीनी खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा
कंपनी के अनुसार, यह पहल केवल एक खेल परिसर के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद जमीनी स्तर पर युवाओं के समग्र विकास के लिए एक दीर्घकालिक मंच तैयार करना है। जब युवा प्रतिभाओं को पेशेवर मार्गदर्शन और संगठित मंच मिलेगा, तो राज्य में तीरंदाजी को एक नई पहचान मिलेगी। सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा सीएसआर फंड का यह उपयोग स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी संपत्ति तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।





















