तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ एक अहम कानूनी निर्देश सामने आया है, जिसमें कोलकाता हाईकोर्ट ने उन्हें वोट चोरी के आरोपों से संबंधित अपना सोशल मीडिया पोस्ट हटाने को कहा है। अदालत ने इस आदेश पर अमल करने के लिए 24 घंटे की समयसीमा निर्धारित की है। इस पूरे अदालती घटनाक्रम की जानकारी भारतीय जनता पार्टी के सांसद श्रीकांत दुबे ने सार्वजनिक मंच पर साझा की।
हाईकोर्ट का निर्देश और तय समयसीमा
अदालत में हुई सुनवाई के बाद जारी निर्देश में सोशल मीडिया मंच पर साझा की गई उस सामग्री पर आपत्ति जताई गई थी जिसमें चुनावी प्रक्रिया और वोट चोरी से जुड़े दावे किए गए थे। न्यायिक पीठ ने साफ किया कि संबंधित सामग्री को तय समय के भीतर इंटरनेट से हटाना अनिवार्य होगा। इस आदेश के बाद सांसद को अपनी डिजिटल पोस्ट वापस लेनी होगी, जिससे राजनीतिक और कानूनी हलकों में सरगर्मी बढ़ गई है।
सांसद श्रीकांत दुबे ने दी जानकारी
इस अदालती फैसले की पुष्टि करते हुए भाजपा सांसद श्रीकांत दुबे ने जानकारी दी कि उच्च न्यायालय ने तृणमूल सांसद को विवादित पोस्ट पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए पाबंद किया है। इस निर्देश के बाद दोनों दलों के नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। अदालत के इस कड़े रुख को सोशल मीडिया पर बिना ठोस आधार के की जाने वाली राजनीतिक टिप्पणियों पर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
महुआ मोइत्रा से जुड़े अन्य अदालती मामले
यह पहला मौका नहीं है जब तृणमूल सांसद कानूनी मुश्किलों का सामना कर रही हैं। इससे पहले हेट स्पीच से जुड़े एक मामले में भी उन्हें राहत नहीं मिल सकी थी, जब शीर्ष अदालत ने पुलिस जांच के समक्ष पेश होने के हाईकोर्ट के निर्देश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। उस दौरान सुनवाई के दौरान सार्वजनिक जीवन और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े तीखे सवालों के बीच उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
इसके अलावा पूर्व में एक अन्य मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने भी उनकी याचिका पर विचार करने से मना करते हुए स्पष्ट किया था कि इस विषय की सुनवाई हाईकोर्ट के स्तर पर ही की जानी चाहिए। हालांकि कुछ मामलों में उन्हें दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा भी मिली थी, लेकिन ताजा आदेश ने उनकी डिजिटल अभिव्यक्ति और राजनीतिक आरोपों को लेकर नई कानूनी बंदिशें खड़ी कर दी हैं।
























