रोजमर्रा की सूखी या तरीदार सब्जियों से ऊब चुके लोगों के लिए खट्टे-तीखे मट्ठे के आलू एक शानदार बदलाव साबित होते हैं। अगर रसोई में प्याज और लहसुन का प्रयोग किए बिना कोई झटपट सब्जी तैयार करनी हो, तो यह पारंपरिक देसी व्यंजन सबसे बेहतर विकल्प बन जाता है। इसे तैयार करने में महज 10 मिनट का समय लगता है, जिससे व्यस्त दिनों में भी पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन आसानी से तैयार किया जा सकता है। घर पर उपलब्ध बुनियादी सामग्रियों की मदद से तीन लोगों के लिए भरपूर मात्रा में यह लाजवाब व्यंजन पकाया जा सकता है।
तैयारी और आवश्यक सामग्रियों का सही अनुपात
तीन लोगों की खुराक के लिए लगभग 6 से 7 मध्यम आकार के आलू पर्याप्त रहते हैं। पकाने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आलुओं को अच्छी तरह उबाल लें। जब वे पूरी तरह नरम हो जाएं, तो उनका छिलका उतार लें और हाथों की मदद से उन्हें अच्छी तरह मीस या मैश कर लें। दूसरी तरफ, रसोई में मौजूद बुनियादी मसालों का एक गीला मिश्रण तैयार करना होता है। इसके लिए एक छोटी कटोरी में एक चम्मच धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और सामान्य सब्जी मसाला लें। इस सूखे मसाले में थोड़ा सा पानी मिलाकर एक गाढ़ा और एकसार पेस्ट तैयार कर लें, ताकि तेल में डालते ही सूखे मसाले जलें नहीं।
छौंक लगाने और मसाला पकाने की विधि
एक भारी तले वाली कड़ाही में थोड़ा सा तेल गर्म करें। तेल के पर्याप्त गर्म होते ही उसमें जीरा, काली सरसों के दाने और चुटकी भर हींग का छौंक लगाएं। जब ये खड़े मसाले चटकने लगें, तो कटोरी में पहले से तैयार किया गया मसालों का गीला पेस्ट कड़ाही में डाल दें। इसके साथ ही स्वाद के अनुसार हरी मिर्च को बारीक काटने के बजाय बीच से लंबा फाड़कर डालें और अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े भी शामिल करें। इस पूरे मसाले को मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि मसालों से कच्चापन दूर न हो जाए और चारों तरफ तेल न दिखने लगे।
आलू को भूनना और मट्ठा मिलाने की सावधानी
मसाला अच्छी तरह पकने के बाद, उसमें पहले से मैश करके रखे गए 6 से 7 उबले आलू डाल दें। आलुओं को मसाले के साथ अच्छी तरह उलट-पुलट कर कुछ मिनटों तक भूनें ताकि सारा मसाला आलुओं पर समान रूप से लिपट जाए। इसके बाद आंच को नियंत्रित करते हुए कड़ाही में मट्ठा डालें। मट्ठा डालने के तुरंत बाद स्वादानुसार सफेद नमक और काला नमक दोनों का मिश्रण मिलाएं। मट्ठा डालते ही चमचे से लगातार चलाते रहना बेहद जरूरी होता है, ताकि तापमान के अचानक बदलाव से मट्ठा फटने न पाए। जैसे ही ग्रेवी में पहला उबाल आना शुरू हो जाए, आंच को तुरंत धीमा कर दें। धीमी आंच पर पकाने से आलू मट्ठे के खट्टेपन और मसालों के स्वाद को भीतर तक अच्छी तरह सोख लेते हैं।
सरसों तेल का अंतिम तड़का और परोसने का तरीका
ग्रेवी को थोड़ी देर धीमी आंच पर पकने देने के बाद जब तरी मनचाही गाढ़ी हो जाए, तब गैस बंद कर दें। इसके स्वाद को कई गुना बढ़ाने के लिए एक छोटे पैन में सरसों का तेल गर्म करें और उसमें साबुत सूखी लाल मिर्च डालकर एक अतिरिक्त तड़का लगाएं। इस छौंक को सीधे पके हुए मट्ठे के आलू के ऊपर डालें और ताजी बारीक कटी हरी धनिया की पत्तियां छिड़क दें। यह व्यंजन सामान्य भोजन में पूरी तरह सब्जी का विकल्प बनता है। गर्म-गर्म उबले चावल के साथ इस खट्टी-चटपटी ग्रेवी का मेल खाने के स्वाद को दोगुना कर देता है।



















