सीतामढ़ी में सांस्कृतिक विरासत का डिजिटल संरक्षण और 10 सितंबर से किसानों के लिए वर्मीकंपोस्ट ट्रेनिंग की नई शुरुआतभीलवाड़ा के खेतों में तेजी से फैल रही गाजर घास, फसल उत्पादन 40 प्रतिशत तक घटने का मंडराया खतराबेन शेल्टन ने 5 सेट के मैराथन मुकाबले में डिफेंडिंग चैंपियन कार्लोस अल्कारेज को हराकर सेमीफाइनल में बनाई जगहपुराने हैदराबाद के फुटपाथ पर सजी सिक्कों की अनूठी दुनिया, 1818 की ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर निज़ाम काल का दुर्लभ इतिहासनोमुरा ने जताया यूरोपियन सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने का अंदेशा, ऊर्जा संकट से वैश्विक बाजारों में दबावबैंक ऑफ जापान की दर बढ़ोतरी की सुगबुगाहट से अमेरिकी डॉलर पस्त, येन मजबूत और सोना 4400 डॉलर के पारमिडिल ईस्ट में संघर्ष गहराने से कच्चे तेल में उबाल, $94 के पार निकला WTI क्रूडगणेश उत्सव पर घर में तैयार करें 5 तरह के स्वादिष्ट मोदक, भगवान गणेश के भोग के लिए आसान तरीकेरसोई में नमी से बचाकर काजू और बादाम को महीनों तक रखें कुरकुरा, जानिए मेवे स्टोर करने के सही तरीकेघर पर ठेले जैसी खस्ता और गुब्बारे जैसी फूली पानीपूरी बनाने के 5 कारगर तरीके
बुध और शुक्र के मेल से बन रहा लक्ष्मी नारायण राजयोग, कुंभ राशि वालों के पूरे होंगे अटके कामराशिफल
9 सित॰ 2026, 12:17 pm (2 घंटे पहले)· 2

बुध और शुक्र के मेल से बन रहा लक्ष्मी नारायण राजयोग, कुंभ राशि वालों के पूरे होंगे अटके काम

वैदिक ज्योतिष में केंद्र और त्रिकोण भावों के स्वामियों के एक साथ आने से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होता है। बुध और शुक्र की इस युति से कुंभ राशि के जातकों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और उनके कानूनी तथा व्यावसायिक काम पूरे होंगे।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में विभिन्न ग्रहों की स्थिति और उनके आपसी संयोग से कई प्रकार के शुभ और अशुभ योग बनते हैं। इनमें से लक्ष्मी नारायण राजयोग को अत्यंत फलदायी और मंगलकारी माना गया है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार जब कुंडली में धन, वैभव और बुद्धि के कारक ग्रह एक साथ आते हैं, तब इस विशेष राजयोग की उत्पत्ति होती है। इस राजयोग के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक समृद्धि, मान-सम्मान और सफलता के द्वार खुलते हैं। वर्तमान में इस राजयोग का निर्माण कुछ विशेष राशियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होने वाला है, जिनमें कुंभ राशि सबसे प्रमुख स्थान पर है।

लक्ष्मी नारायण राजयोग का ज्योतिषीय आधार

ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के 12 भावों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें से पहला, चौथा, सातवां और दसवां भाव केंद्र स्थान कहलाते हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार केंद्र स्थानों को भगवान विष्णु का स्थान माना जाता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली का पहला, पांचवां और नौवां भाव त्रिकोण स्थान कहलाता है, जिसे देवी लक्ष्मी का स्थान माना गया है। यहां प्रथम भाव यानी लग्न को केंद्र और त्रिकोण दोनों ही श्रेणियों में गिना जाता है।

ये भी पढ़ें

जब किसी जातक की जन्म कुंडली में केंद्र स्थान का स्वामी ग्रह और त्रिकोण स्थान का स्वामी ग्रह एक साथ आकर बैठ जाते हैं, तब लक्ष्मी नारायण राजयोग बनता है। यह योग मुख्य रूप से बुध और शुक्र ग्रह की युति से निर्मित होता है। ज्योतिषीय प्रतीकों में शुक्र ग्रह को धन, ऐश्वर्य, सौंदर्य और भौतिक सुखों की देवी मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। वहीं बुध ग्रह को बुद्धि, व्यापार, तर्कक्षमता और भगवान श्रीहरि विष्णु का प्रतीक माना जाता है। जब ये दोनों ग्रह कुंडली के शुभ भावों में एक साथ आते हैं, तो जातक को दोनों देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कुंभ राशि के जातकों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

लक्ष्मी नारायण राजयोग के प्रभाव से कुंभ राशि के जातकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने के प्रबल योग बन रहे हैं। इस अवधि के दौरान भाग्य का भरपूर सहयोग मिलेगा, जिससे लंबे समय से रुकी हुई योजनाएं पुनः गति पकड़ेंगी। यदि आपके कोई महत्वपूर्ण कार्य काफी समय से अटके हुए थे, तो वे अब बिना किसी बड़ी रुकावट के पूरे होने लगेंगे। मन में नया उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।

आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह समय कुंभ राशि वालों के लिए अत्यंत शुभ रहने वाला है। धन प्राप्ति के नए मार्ग खुलेंगे और पहले किए गए निवेशों से भी अनुकूल परिणाम प्राप्त होने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यशैली की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा।

व्यापारिक यात्राएं और नए अवसर

व्यापार और कारोबार से जुड़े कुंभ राशि के लोगों के लिए यह राजयोग विशेष रूप से फलदायी साबित होगा। व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार करने के उद्देश्य से की जाने वाली यात्राएं सफल रहेंगी। यदि आप अपने कारोबार के सिलसिले में शहर से बाहर या दूरदराज के क्षेत्रों में जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन यात्राओं से बड़े व्यावसायिक समझौते होने के योग हैं। नए लोगों से संपर्क स्थापित होंगे जो भविष्य में व्यापार में लाभ पहुंचाएंगे।

सरकारी और कानूनी मामलों में सफलता

यदि आप किसी कानूनी विवाद, न्यायालयीन प्रक्रिया या सरकारी विभाग से संबंधित किसी काम में उलझे हुए थे, तो लक्ष्मी नारायण राजयोग आपके लिए राहत की खबर लेकर आया है। इस योग के शुभ प्रभाव से वर्षों से लंबित पड़े सरकारी कागजी काम निपटाने में सफलता मिलेगी। न्यायालय में चल रहे मामलों का निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है या उसमें कोई सकारात्मक मोड़ देखने को मिल सकता है। प्रशासनिक कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी और सरकारी तंत्र से सहयोग प्राप्त होगा।

सवाल-जवाब

लक्ष्मी नारायण राजयोग क्या होता है?
जब जन्म कुंडली में केंद्र स्थान (विष्णु स्थान) और त्रिकोण स्थान (लक्ष्मी स्थान) के स्वामी ग्रह एक साथ बैठते हैं या बुध और शुक्र की युति होती है, तो लक्ष्मी नारायण राजयोग बनता है।
इस राजयोग में कौन से ग्रहों का मिलन होता है?
लक्ष्मी नारायण राजयोग मुख्य रूप से बुध (श्रीहरि विष्णु के प्रतीक) और शुक्र (देवी लक्ष्मी के प्रतीक) ग्रह की युति से बनता है।
लक्ष्मी नारायण राजयोग से किस राशि को सबसे अधिक लाभ होगा?
इस राजयोग के प्रभाव से कुंभ राशि के जातकों को सबसे अधिक लाभ, भाग्य का साथ और सफलता मिलेगी।
कुंभ राशि के जातकों को किस क्षेत्र में सफलता मिलेगी?
कुंभ राशि वालों के अटके काम बनेंगे, व्यापारिक यात्राएं सफल होंगी और सरकारी व कानूनी मामलों का समाधान होगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR