स्ट्रीट स्टाइल गोलगप्पे देखते ही हर किसी की जीभ ललचा उठती है। बाहर मिलने वाली पतली, गोल और गुब्बारे की तरह फूली हुई पूरियों को देखकर अक्सर लगता है कि काश इन्हें रसोई में भी उतनी ही परफेक्शन के साथ बनाया जा सके। हालांकि, जब लोग घर पर पानीपूरी तैयार करने की कोशिश करते हैं, तो कई बार पूरियां कढ़ाई में जाते ही चपटी रह जाती हैं या कुछ ही देर में पापड़ी की तरह सख्त या सीली हुई हो जाती हैं। असल में, बाजार जैसी पूरियां बनाने का रहस्य सामग्री से ज्यादा आटा गूंथने, बेलने और तलने की छोटी-छोटी तकनीकों में छिपा होता है। अगर इन पांच बुनियादी नियमों का ईमानदारी से पालन किया जाए, तो आपकी बनाई हर एक पूरी न केवल शानदार तरीके से फूलेगी, बल्कि उसमें पानी भरने पर वह बीच से गलेगी भी नहीं।
गुब्बारे जैसी फूली पूरियां बनाने के लिए आटे की सही बनावट और आराम
पानीपूरी के लिए आटा तैयार करते समय सबसे प्राथमिक शर्त यह है कि पानी की मात्रा पर सख्त नियंत्रण रखा जाए। सूजी और गेहूं के आटे के मिश्रण में कभी भी एक साथ ज्यादा पानी न उड़ेलें। आटा गूंथते समय पानी को हमेशा थोड़ा-थोड़ा करके ही मिलाएं और एक बहुत सख्त आटा तैयार करें। यदि गूंथा हुआ आटा गलती से भी नरम या ढीला रह जाएगा, तो बेलते वक्त पूरियां मोटी बनेंगी और कढ़ाई में डालने पर वे कभी भी सही ढंग से नहीं फूल पाएंगी। जब सख्त आटा गूंथकर तैयार हो जाए, तो उसे किसी गीले कपड़े या ढक्कन से ढका रखकर लगभग 15 से 20 मिनट का विश्राम देना अनिवार्य है। यह समय सूजी को पानी सोखने और आटे को सेट होने में मदद करता है।
हथेली की मालिश से आटा बनाएं चिकना और दरार-मुक्त
आटे को केवल पानी में समेट लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसे सही टेक्सचर देना असली कला है। 15 से 20 मिनट के आराम के बाद आटे को अपनी हथेलियों के पिछले हिस्से से दबा-दबाकर लगातार कुछ मिनटों तक अच्छी तरह मसलना चाहिए। इस मालिश प्रक्रिया से आटे के अंदर मौजूद सूजी और आटा आपस में पूरी तरह एकसार हो जाते हैं। जब आटे को मसलकर एकदम चिकना और लोचदार बना दिया जाता है, तो लोइयां बनाते और बेलते समय किनारों पर दरारें नहीं आतीं। बिना दरार वाली चिकनी पूरी जब गर्म तेल में जाती है, तो उसके भीतर की भाप बाहर नहीं निकल पाती और पूरी तुरंत गुब्बारे की तरह फूल उठती है।
समान मोटाई और कटर के सही इस्तेमाल का नियम
पूरियों को बेलते समय उनकी मोटाई का संतुलन बनाए रखना बेहद नाजुक काम है। अगर पूरी जरूरत से ज्यादा मोटी बेली जाएगी, तो वह तलते समय अंदर से कच्ची रह जाएगी और कढ़ाई से बाहर निकालते ही नरम पड़ जाएगी। इसके विपरीत, यदि पूरी को बहुत अधिक पतला बेल दिया जाएगा, तो वह कढ़ाई के तेज तापमान में जाते ही फूलने के बजाय तुरंत जलकर कड़क हो जाएगी। इसलिए प्रयास करें कि पूरी की मोटाई हर तरफ से एक समान हो। सभी पूरियों को एक जैसा गोल आकार और समान मोटाई देने के लिए किसी छोटे ढक्कन या कटर का प्रयोग करना सबसे आसान और कारगर उपाय माना जाता है।
सही आंच पर तलने का तरीका और पलटते समय ध्यान देने योग्य बातें
पानीपूरी की सफलता में कढ़ाई के तेल का तापमान सबसे निर्णायक भूमिका निभाता है। यदि तेल पर्याप्त गर्म नहीं होगा या ठंडा रहेगा, तो पूरियां तेल सोख लेंगी और कढ़ाई के पेंदे में ही चपटी बैठ जाएंगी। दूसरी ओर, यदि तेल बहुत ज्यादा उबलता हुआ होगा, तो पूरी की ऊपरी परत कढ़ाई में गिरते ही सख्त हो जाएगी और उसे फूलने का मौका नहीं मिलेगा। सबसे सही तरीका यह है कि तेल को पहले अच्छी तरह गर्म करें। फिर पूरी को तेल में डालकर कछी या पौनी से हल्के हाथ से नीचे की ओर दबाएं। जैसे ही पूरी फूलकर ऊपर आए, उसे तुरंत दूसरी तरफ पलट दें और दोनों तरफ से हल्का सुनहरा और खस्ता होने तक तल लें।
सूखने से बचाएं और डिब्बे में रखने से पहले रखें ये सावधानियां
कई बार लोग एक साथ ढेर सारी पूरियां बेलकर खुली हवा में छोड़ देते हैं, जो एक बड़ी भूल साबित होती है। हवा के संपर्क में आने से बेली हुई पूरियों की ऊपरी सतह सूख जाती है, जिससे तलते समय उनके किनारे आपस में चिपक नहीं पाते और वे कढ़ाई में जाते ही फट जाती हैं। इस समस्या से बचने के लिए हमेशा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ही पूरियां बेलें और उन्हें तुरंत गर्म तेल में तलते जाएं। जब पूरियां अच्छी तरह तलकर बाहर निकाल ली जाएं, तो उन्हें तुरंत किसी बंद बर्तन में न रखें। पूरियों को पहले कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें, ताकि उनकी नमी निकल जाए। पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही उन्हें एयरटाइट डिब्बे में बंद करके रखें।
शुरुआती कमियों से न हों हताश, ऐसे करें अगली खेप में सुधार
घर पर गोलगप्पे बनाते समय यदि पहली खेप की कुछ पूरियां न फूलें या चपटी रह जाएं, तो निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। पहली बार में तेल का सही अनुमान लगाना या बेलने की मोटाई को सटीक बनाए रखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि पहली बार में परिणाम मनमाफिक न मिले, तो अगली खेप में आंच को थोड़ा समायोजित करें और बेलते वक्त मोटाई पर थोड़ा अधिक ध्यान दें। आटा गूंथने से लेकर तलने तक के इन पांचों चरणों में थोड़ा सा धैर्य और निरंतरता बनाए रखने से आप हर बार बाजार जैसी कुरकुरी, गोल और टेस्टी पूरियां तैयार कर पाएंगे।



















