जीवन में सफलता पाने के लिए केवल उच्च शिक्षा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि कठिन परिश्रम और अटूट लगन की आवश्यकता होती है। समाज में ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं जहाँ सामान्य शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले लोग अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन ऊंचाइयों को छू लेते हैं, जहाँ तक पहुँचना उच्च शिक्षित लोगों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। कई व्यक्ति जीवन में एक बार असफल होने पर अपना मार्ग बदल लेते हैं और प्रयास करना छोड़ देते हैं। इसके विपरीत, एक वर्ग ऐसा भी है जो बार-बार विफलता मिलने के बाद भी कभी हार स्वीकार नहीं करता। अंक शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति की जन्म तिथि में उसकी यह दृढ़ता, साहस और कार्य के प्रति निष्ठा छिपी होती है।
सूर्य देव से प्रभावित मूलांक 1 के जातकों की नेतृत्व क्षमता
किसी भी महीने की 1, 10, 19 अथवा 28 तारीख को जन्मे व्यक्तियों का मूलांक 1 होता है। इस अंक का स्वामी ग्रह सूर्य को माना गया है, जिन्हें ग्रहों का राजा भी कहा जाता है। सूर्य के प्रभाव के कारण इन तिथियों में जन्मे लोगों में स्वाभाविक रूप से नेतृत्व के गुण पाए जाते हैं। यदि वे औपचारिक रूप से किसी उच्च पद पर न भी हों, तब भी उनका व्यक्तित्व एक कुशल नेता की भांति झलकता है। ये जातक मार्ग में आने वाली रुकावटों से घबराने या अत्यधिक सोच-विचार में समय गंवाने के बजाय समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। एक बार यदि ये किसी ध्येय का निर्धारण कर लेते हैं, तो उसे पूरा करके ही विश्राम लेते हैं।
राहु के प्रभाव से मूलांक 4 वाले दर्शाते हैं अनुशासन और निरंतरता
महीने की 4, 13, 22 या 31 तारीख को जन्म लेने वाले लोगों का मूलांक 4 बनता है। इस मूलांक के स्वामी छाया ग्रह राहु हैं। 4 मूलांक से जुड़े जातक अत्यंत अनुशासित और अपने फैसलों पर अडिग रहने वाले होते हैं। ये लोग रातोरात मिलने वाली सफलता की अपेक्षा सतत प्रयास, कठोर परिश्रम और धैर्य पर विश्वास रखते हैं। किसी कार्य की जिम्मेदारी हाथ में लेने के पश्चात उसे अधूरा छोड़ना इनकी प्रवृत्ति में शामिल नहीं होता। जब तक एक लक्ष्य पूरी तरह सिद्ध न हो जाए, वे दूसरे कार्य की ओर कदम नहीं बढ़ाते।
केतु के मूलांक 7 वाले जातकों की आंतरिक शक्ति और विचारशीलता
जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 7, 16 या 25 तारीख को होता है, उनका मूलांक 7 कहलाता है। इस अंक के अधिष्ठाता छाया ग्रह केतु हैं। इस अंक के जातक मानसिक रूप से काफी सुदृढ़, शांत और विचारशील स्वभाव के होते हैं। किसी भी विपरीत परिस्थिति में जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के स्थान पर ये जातक संयम और आत्मविश्वास के साथ योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाते हैं। यही आंतरिक स्थिरता उन्हें बार-बार गिरने के बाद भी दोबारा खड़े होने का बल प्रदान करती है।
कर्मफलदाता शनि के मूलांक 8 का अटूट संकल्प और दूरगामी दृष्टिकोण
किसी महीने की 8, 17 या 26 तारीख को जन्मे व्यक्तियों का संबंध मूलांक 8 से होता है। अंक शास्त्र में इस अंक के स्वामी न्याय और कर्म के कारक ग्रह शनिदेव माने गए हैं। मूलांक 8 के जातक अत्यंत दृढ़ संकल्पी और मजबूत इरादों वाले होते हैं। कठिन से कठिन दौर में भी ये अपने जीवन के उद्देश्य को पुनः खोज निकालने में सक्षम होते हैं। सामयिक विफलताएं इनके मनोबल को तोड़ नहीं पातीं क्योंकि इनका पूरा ध्यान दीर्घकालिक सफलता और अपने अंतिम पड़ाव पर टिका होता है।
मंगल के मूलांक 9 वाले जातकों का साहस और परिवर्तनकारी जुनून
महीने की 9, 18 अथवा 27 तारीख को जन्म लेने वाले जातकों का मूलांक 9 होता है, जिसके स्वामी ग्रहों के सेनापति मंगल देव हैं। मूलांक 9 के व्यक्ति निर्भीक, साहसी और मजबूत इच्छाशक्ति वाले माने जाते हैं। अपने इन्हीं गुणों के सहारे वे अपने सपनों, सिद्धांतों और परिवार की सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार रहते हैं। इनमें बदलाव लाने का एक विशेष जुनून होता है और ये अपनी ऊर्जा का उपयोग विषम परिस्थितियों पर विजय पाने के लिए करते हैं।



















