विदेशी मुद्रा बाजार में यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो में जोरदार बढ़त देखने को मिल रही है। EUR/USD की विनिमय दर पिछले कई महीनों के उच्चतम स्तर के पास मजबूती से टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 1.1700 के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तर के आसपास बनी हुई है। अमेरिकी डॉलर में नरमी और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ओर से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने यूरो को मजबूत सपोर्ट प्रदान किया है। हालांकि, यूरोप और अमेरिका दोनों तरफ से आने वाले प्रारंभिक परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों से ठीक पहले कारोबारी सतर्क रुख अपना रहे हैं और बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।
वैश्विक मुद्रा बाजार इस समय कई आपस में जुड़ी आर्थिक और भू-राजनीतिक गतिविधियों से प्रभावित हो रहा है। यूरोप में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गहराती चिंताएं, अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बांड बायबैक योजना में अचानक किया गया बदलाव, मध्य पूर्व में बना सैन्य और राजनयिक तनाव और वॉशिंगटन में बढ़ता राष्ट्रीय कर्ज जैसे कारकों ने मिलकर एक जटिल वित्तीय माहौल तैयार कर दिया है। इसके बावजूद, तकनीकी संकेतकों से स्पष्ट होता है कि निकट अवधि की रुकावटों के बाद भी यूरो का ढांचागत आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।
यूरोपीय गैस भंडारण का दबाव और केंद्रीय बैंक की दर नीतियां
यूरो की हालिया मजबूती के पीछे एक प्रमुख कारण यूरोपीय ऊर्जा बाजार में फिर से बढ़ती अनिश्चितता है। वित्तीय संस्थान कॉमर्जबैंक के विश्लेषण के अनुसार, यूरोप के प्राकृतिक गैस भंडारण केंद्रों में घटता स्टॉक आने वाले महीनों में आयात बढ़ाने का भारी दबाव पैदा कर रहा है। बैंक ने आगाह किया है कि यदि सर्दियों से पहले गैस की आपूर्ति पर्याप्त रूप से बहाल नहीं होती है, तो पूरे यूरोपीय महाद्वीप में ऊर्जा और बिजली की कीमतों में नया उछाल देखने को मिल सकता है।
गैस भंडार में आई इस कमी के कारण यूरोपीय देशों को तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के वैश्विक बाजार में सीमित आपूर्ति हासिल करने के लिए भारी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। इस प्रतिस्पर्धी होड़ से यूरोपीय संघ के भीतर आने वाले महीनों में बिजली और हीटिंग के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। ऊर्जा लागत में यह बढ़ोतरी यूरोपीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता महंगाई को फिर से भड़काने का काम कर सकती है।
महंगाई दर में फिर से बढ़ोतरी की आशंकाओं के कारण वित्तीय बाजारों में यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हो गई हैं। ऊंची ब्याज दरों की संभावना से यूरो-नामित संपत्तियों पर रिटर्न बढ़ता है, जिससे वैश्विक निवेशकों की पूंजी यूरोप की ओर आकर्षित होती है। यही वजह है कि किसी भी गिरावट के समय यूरो को निचले स्तरों पर मजबूत खरीदारी का सहारा मिल रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी की बांड बायबैक योजना और फेडरल रिजर्व का रुख
दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर इस समय घरेलू राजकोषीय कदमों और मौद्रिक नीति के विरोधाभासी संकेतों से जूझ रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा घोषित बांड बायबैक योजना का बाजार पर शुरुआती असर अब धीमा पड़ता दिख रहा है। बुधवार को दोपहर 12:32 GMT पर अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने नियमित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा फैसला लेते हुए दीर्घकालिक सरकारी बांड्स की पुनर्खरीद (बायबैक) सीमा को दोगुना करने का ऐलान किया था।
इस नई योजना के तहत 9 सितंबर से 4 नवंबर के बीच 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाले दीर्घकालिक बांड्स के लिए प्रत्येक बायबैक ऑपरेशन की अधिकतम सीमा को $2 अरब से बढ़ाकर कम से कम $4 अरब कर दिया गया है। हालांकि इस कदम का उद्देश्य बांड बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ाना था, लेकिन ऊर्जा कीमतों से जुड़े मुद्रास्फीति के खतरों ने इस कदम के असर को फीका कर दिया है।
इसके साथ ही, बुधवार को जारी हुए फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के मिनट्स से यह संकेत मिला है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति जारी रख सकता है। बाजार सहभागियों का मानना है कि वर्ष 2026 के दौरान फेडरल रिजर्व द्वारा कम से कम एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। ऊंची अमेरिकी बांड यील्ड डॉलर को निचले स्तरों पर सहारा दे रही है और गिरावट को सीमित कर रही है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और सुरक्षित निवेश मांग
मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भी EUR/USD जोड़ी की तेजी को सीमित करने में एक बड़ा कारक बना हुआ है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है। चूंकि यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य बाधा से कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी प्रशासन के कड़े बयानों ने इस अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध और अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय अलगाव की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी देश ईरान को किसी भी तरह की वित्तीय या रसद सहायता प्रदान करता है, तो उसे अमेरिका के कड़े आर्थिक परिणामों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
वैश्विक बाजार में जब भी इस तरह का भू-राजनीतिक संकट गहराता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की ओर रुख करते हैं। हालांकि, डॉलर की यह मांग कच्चे तेल के ऊंचे दामों से जुड़ी हुई है, जो अंततः यूरोप में महंगाई बढ़ाकर यूरो की ब्याज दर प्रत्याशाओं को बल देती है। इस प्रकार दोनों मुद्राओं के बीच एक संतुलित रस्साकशी देखने को मिल रही है।
अमेरिकी कर्ज संकट, क्रेडिट बाजार, पाउंड और सोने की चाल
विदेशी मुद्रा बाजार के अलावा वैश्विक वित्तीय बाजार अमेरिका के विशालकाय राष्ट्रीय कर्ज से भी चिंतित हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज तेजी से $40 ट्रिलियन के अभूतपूर्व आंकड़े की ओर बढ़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों ने इस बढ़ते कर्ज को अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बताया है और साथ ही $1.4 ट्रिलियन के विशाल प्राइवेट क्रेडिट बाजार में छिपे जोखिमों के प्रति आगाह किया है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों की बात करें तो ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) गुरुवार को अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार नहीं रख सका और recede होकर 1.3630 से 1.3620 के दायरे में आ गया। शुक्रवार को आने वाले ब्रिटेन के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों से पहले पाउंड में यह सुस्ती देखने को मिली है।
वहीं दूसरी ओर, कीमती धातुओं में जोरदार तेजी दर्ज की गई। शुक्रवार के एशियाई सत्र के दौरान सोना (Gold) उछलकर $4,544 प्रति औंस के नए बहु-महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। जून की शुरुआत के बाद यह सोने का सबसे ऊंचा स्तर है, जहां सोने की कीमतें अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के ऊपर मजबूत तकनीकी गति दिखा रही हैं।
गुरुवार को उत्तरी अमेरिकी कारोबारी सत्र के समापन पर EUR/USD जोड़ी में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 1.1700 के स्तर से नीचे आ गई। डॉलर की देर शाम रिकवरी ने यूरो को दबा दिया, जिसके बाद यह लगभग स्थिर बंद हुई। अब निवेशकों का पूरा ध्यान शुक्रवार (21 अगस्त 2026, सुबह 08:00 बजे) जारी होने वाले S&P Global मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI के आंकड़ों पर केंद्रित है।
तकनीकी ढांचा और लाइव मार्केट इंडिकेटर विश्लेषण
तकनीकी दृष्टि से EUR/USD का अल्पकालिक और मध्यमकालिक ढांचा काफी मजबूत बना हुआ है। यह जोड़ी अपने 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और अप्रैल-जून की गिरावट के 61.8% फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 1.1644 के काफी ऊपर कारोबार कर रही है। चार्ट विश्लेषण से पता चलता है कि 1.1323 के चक्र निचले स्तर से शुरू हुई रिकवरी का रुझान बना हुआ है और हर गिरावट पर खरीदार सक्रिय हो रहे हैं, जिनका अगला लक्ष्य 78.6% रिट्रेसमेंट स्तर 1.1731 का परीक्षण करना है।
21 अगस्त 2026 के लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD 1.1700 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव से 0.19% ऊपर है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.1300 से 1.2000 के बीच रहा है और दैनिक वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 1.00 गुना है। तकनीकी गति को मापने वाला 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 73 के स्तर पर है, जो ओवरबॉट्स स्थिति को दर्शाता है। MACD इंडिकेटर 0.00 पर न्यूट्रल है।
मूविंग एवरेज की बात करें तो 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA20) 1.15, 50-दिवसीय (EMA50) 1.15 और 200-दिवसीय (EMA200) 1.16 पर है। 50-दिवसीय SMA 1.15 और 200-दिवसीय SMA 1.16 पर स्थित है, जो दीर्घकालिक अपट्रेंड की पुष्टि करते हैं। बॉलिंगर बैंड्स (20,2) 1.14 से 1.17 के बीच हैं, जहां कीमत ऊपरी बैंड को छू रही है। ADX (14) का 34 पर होना मजबूत ट्रेंड की उपस्थिति बताता है, जबकि स्टोकेस्टिक लाइनें 93 (फास्ट) और 77 (सिग्नल) पर हैं। ATR (14) 0.01 पर है जो दैनिक वोलेटिलिटी का संकेत देता है, वहीं मुख्य पिवट, सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर 1.1700 के आसपास केंद्रित हैं।



















