इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से तस्वीरों को अपनी पसंद के अनुसार बदलना बेहद आसान हो चुका है। इन दिनों आम लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को अलग-अलग रचनात्मक और आधुनिक अंदाज में ढालकर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर रहे हैं। हालांकि, तकनीक का यह आकर्षक और नया इस्तेमाल कई बार जी का जंजाल भी बन सकता है। इसी गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए कोडरमा के पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशिश ने आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा को लेकर खास तौर पर सतर्क रहने की अहम सलाह दी है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करने के छिपे जोखिम
किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी तस्वीर अपलोड करने से पहले उसके संभावित सुरक्षा खतरों को गहराई से समझना बेहद जरूरी है। बिना किसी दूरदर्शिता के अपनी निजी तस्वीरों को विभिन्न एआई टूल्स या अन्य अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर देने से तस्वीरों के दुरुपयोग की आशंका लगातार बनी रहती है। एक बार जब कोई तस्वीर किसी दूसरे पक्ष या सर्वर के पास चली जाती है, तो उसके बाद उसके इस्तेमाल और नियंत्रण पर व्यक्ति का अधिकार लगभग खत्म हो जाता है। ऐसे में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है।
गलत हाथों में पहुंचकर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं तस्वीरें
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि एआई तकनीक की सहायता से किसी भी इंसान के चेहरे की पहचान और उसकी मूल तस्वीर में आसानी से फेरबदल किया जा सकता है। यदि ऐसी तस्वीरें किसी असामाजिक तत्व या गलत हाथों में पड़ जाती हैं, तो इनका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के अवैध या गलत कार्यों में किया जा सकता है। यही कारण है कि अपनी व्यक्तिगत और निजी तस्वीरों को किसी भी अनजान या कम सुरक्षित माने जाने वाले प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से पहले पूरी सावधानी बरतना अनिवार्य है।
तस्वीरों के स्टोरेज और शेयरिंग पर पैनी नजर रखना जरूरी
नागरिकों को सलाह देते हुए एसपी ने कहा कि किसी भी एआई आधारित प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करने से पहले उससे जुड़ी शर्तों और गोपनीयता की नीतियों को भली-भांति पढ़ लेना चाहिए। यह जानना आवश्यक है कि आपकी निजी तस्वीरों को कहां और किस सर्वर पर स्टोर किया जा रहा है तथा उनका इस्तेमाल किस प्रकार किया जा सकता है। इसके अलावा, अपनी तस्वीरों को बिना किसी खास जरूरत के सार्वजनिक करना या अन्य लोगों के साथ बेहिसाब साझा करने से बचना भी सुरक्षा की दृष्टि से बहुत जरूरी है।
फर्जी प्रोफाइल और डीपफेक तकनीक का मंडराता बड़ा खतरा
अधिकारी ने आगाह किया कि एआई के जरिए तस्वीरों और चेहरों में हेरफेर करके फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल या भ्रामक सामग्री तैयार करना बहुत आसान हो गया है। आज के समय में साइबर अपराधी किसी भी आम या खास व्यक्ति की तस्वीर चुराकर उसका दुरुपयोग करते हुए फर्जी अकाउंट बना रहे हैं। इसके साथ ही, डीपफेक जैसी खतरनाक तकनीक का इस्तेमाल करके किसी भी इंसान की प्रतिष्ठा और छवि को भारी नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया जा सकता है। इस तरह के मामलों में फंसने पर लोगों को गंभीर मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अंत में एसपी ने जोर देकर कहा कि डिजिटल दुनिया में मिलने वाली सुविधाओं के साथ-साथ अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। नागरिकों को सोशल मीडिया और एआई का प्रयोग करते समय अपनी निजी तस्वीरों, पहचान और तमाम संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।


















