भारतीय सेना ने अपनी युद्धक और हवाई प्रशिक्षण क्षमताओं में एक अनूठा मील का पत्थर हासिल किया है। रक्षा बल की सूर्य कमांड से जुड़े एक पैराट्रूपर ने बेहट ड्रॉप जोन के ऊपर एक विशेष टैंडम पैराशूट जंप में हिस्सा लिया। इस साहसिक अभ्यास की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें पैराट्रूपर के साथ एक प्रशिक्षित कॉम्बैट डॉग और उसका हैंडलर भी हवा से नीचे उतरे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरी युद्धक सामग्री यानी कॉम्बैट लोड भी साथ में था, जिससे यह अभियान और अधिक जटिल हो गया था।
पहली बार हुआ ऐसा अनूठा अभ्यास
सैनिकों और सैन्य श्वानों के बीच तालमेल का यह अपनी तरह का पहला मामला है, जिसमें किसी टैंडम डिसेंट के दौरान श्वान को भी सीधे तौर पर शामिल किया गया। सेना के इस तरह के प्रशिक्षण अभ्यास सैनिकों को वास्तविक युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार करने के वास्ते बेहद अहम माने जाते हैं। आसमान की ऊंचाइयों से छलांग लगाने के दौरान जानवर को सुरक्षित रखना और उसके साथ जमीन पर उतरना अपने आप में एक कठिन चुनौती थी जिसे सैनिकों ने पूरी दक्षता के साथ पूरा किया।
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी
सूर्य कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पूरे सैन्य अभ्यास से जुड़ी जानकारियां और तस्वीरें साझा की हैं। अभियान से जुड़े एक विशेष संदेश में इस साहस को रेखांकित करते हुए कहा गया, "आसमान में पंजे और जमीन पर साहस।" इस कैप्शन के जरिए सेना ने अपने जांबाजों और उनके चार पैरों वाले साथियों की संयुक्त मारक क्षमता और सटीक प्रशिक्षण का प्रदर्शन किया है।
पूर्ण युद्धक साजो-सामान के साथ छलांग
यह केवल एक साधारण पैराशूट कूद नहीं थी, बल्कि इसे पूर्ण कॉम्बैट लोड के साथ अंजाम दिया गया था। इसका मतलब है कि सैनिकों और उनके श्वान साथियों ने अपने सामान्य उपकरणों के अलावा उन सभी भारी हथियारों और सामग्रियों को भी साथ रखा था जिनका उपयोग युद्ध के मैदान में किया जाता है। इस प्रकार के परीक्षण सेना के एयरबोर्न कॉम्बैट ट्रेनिंग प्रोग्राम को अधिक आधुनिक और व्यावहारिक बनाते हैं, ताकि विषम परिस्थितियों में भी त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।















