भारत में स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की है कि वर्ष 2030 तक भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार 20 लाख करोड़ रुपये का विशाल आंकड़ा छू सकता है। इस जबरदस्त विस्तार के साथ ही यह क्षेत्र देश में लगभग 5 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है। यदि यह अनुमान सटीक बैठता है, तो आने वाले वर्षों में EV सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ रोजगार का सबसे बड़ा मुख्य चालक बनकर उभरेगा।
बुधवार को CII-ITC सेंटर फॉर एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने देश में इलेक्ट्रिक परिवहन के मौजूदा आंकड़ों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समय देश भर में लगभग 57 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। वर्तमान में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल हिस्सेदारी लगभग 7 फीसदी के आसपास है। हालांकि, तकनीकी प्रगति और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण आने वाले समय में इनकी मांग में तेजी से बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद जताई गई है।
इलेक्ट्रिक बसों की मांग और घरेलू उत्पादन क्षमता में बड़ा अंतर
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण अनुकूल बनाने के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री ने इलेक्ट्रिक बसों की स्थिति पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष करीब 1 लाख इलेक्ट्रिक बसों की आवश्यकता है, लेकिन इसके विपरीत देश में फिलहाल केवल 50,000 से 60,000 EV बसें सालाना तैयार करने की ही निर्माण क्षमता मौजूद है। मांग और उत्पादन के बीच बना यह बड़ा अंतर घरेलू विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर भी प्रस्तुत करता है, जिसे दूर करने के लिए औद्योगिक निवेश और उत्पादन विस्तार की अत्यंत आवश्यकता है।
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को दुनिया में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य
कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने सरकार के दीर्घकालिक विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि आगामी 5 वर्षों के भीतर भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग को वैश्विक स्तर पर नंबर-1 उद्योग बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने माना कि यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन भारत की मौजूदा क्षमताओं के बल पर इसे हासिल करना कतई असंभव नहीं है। भारत के पास अत्यधिक कुशल और प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध है। इसके अलावा, देश में निर्मित होने वाले वाहनों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है और उनका उत्पादन लागत ढांचा भी काफी प्रतिस्पर्धी है।
अतीत के आंकड़ों की तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्होंने परिवहन मंत्रालय का पदभार संभाला था, उस समय भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का कुल आकार करीब 14 लाख करोड़ रुपये था। निरंतर वृद्धि के बाद अब यह सेक्टर लगभग 22 से 23 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुका है। वैश्विक परिदृश्य में अगर देखा जाए तो वर्तमान में अमेरिका का ऑटोमोबाइल सेक्टर लगभग 78 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि चीन का ऑटो सेक्टर करीब 47 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर बना हुआ है।
जीवाश्म ईंधन के महंगे आयात और लॉजिस्टिक्स लागत में कटौती
देश के आर्थिक संतुलन और पर्यावरण सुरक्षा की चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने पर बल दिया। भारत हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये मूल्य का कच्चा तेल और जीवाश्म ईंधन विदेशी देशों से आयात करता है। यह भारी-भरकम आयात न केवल देश के खजाने पर वित्तीय बोझ डालता है, बल्कि प्रदूषण की समस्या को भी गंभीर बनाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों, बायोफ्यूल और आधुनिक जन परिवहन प्रणालियों को अपनाना भविष्य के लिए अनिवार्य कदम माना जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, सरकार देश की कुल लॉजिस्टिक्स लागत को घटाने के लिए लगातार प्रयासरत है। वर्तमान में लॉजिस्टिक्स लागत को करीब 10 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी के स्तर पर लाने का लक्ष्य तय किया गया है। IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बेंगलुरु की एक संयुक्त अध्ययन रिपोर्ट का हवाला देते हुए गडकरी ने जानकारी दी कि देश में नए एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से लॉजिस्टिक्स लागत पहले के 16 फीसदी के उच्च स्तर से घटकर 10 फीसदी तक आ चुकी है।



















