केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राजस्थान के जोधपुर में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की सरकार की नीति पर खुलकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आम लोगों से सीधी अपील की कि अगर उन्हें इस काम में कहीं कोई खामी नजर आती है तो वे बेझिझक उसे सामने रखें। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि हर वाजिब कमी को दूर किया जाएगा और अच्छे सुझावों को नीति में शामिल भी किया जाएगा। इसी दौरान उन्होंने उन अफवाहों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों में कीड़े लग जाएंगे और उनका इंजन फेल हो जाएगा। पुरी ने साफ शब्दों में कहा कि आज तक देश में किसी भी वाहन के साथ ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इथेनॉल का इस्तेमाल कोई नया विचार नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में करीब एक सदी से इस दिशा में काम चल रहा है।
आलोचना का स्वागत है
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बायोफ्यूल ब्लेंडिंग को लेकर लगातार कई पोस्ट और वीडियो सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस तरह की आलोचना का स्वागत करते हैं और इसे नकारात्मक नजरिए से नहीं देखते। उनके मुताबिक, अगर किसी को लगता है कि सरकार जो काम कर रही है उसमें कोई कमी है, तो उसे जरूर सामने रखा जाए, सरकार पूरी गंभीरता से उस बात को सुनेगी। पुरी ने भरोसा दिलाया कि लोगों के जायज सुझावों को आगे की नीति में शामिल किया जाएगा और जहां भी जरूरत महसूस होगी, वहां जरूरी बदलाव भी किए जाएंगे। उनका कहना था कि सरकार का मकसद पारदर्शिता बनाए रखना है, न कि आलोचना से बचना।
कीड़े लगने और इंजन फेल होने की अफवाह पर सफाई
हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से बताया कि दो तरह की भ्रामक बातें लगातार फैलाई जा रही थीं। पहली अफवाह यह थी कि इथेनॉल मिले पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों में कीड़े लग जाएंगे। दूसरी अफवाह यह थी कि इससे इंजन खराब हो जाएगा, गाड़ी बंद पड़ जाएगी या फ्यूल पंप काम करना बंद कर देगा। मंत्री ने कहा कि हकीकत में अब तक ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है। उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि आगे चलकर भी इस तरह की कोई दिक्कत आने की आशंका नहीं है, यानी यह डर पूरी तरह बेबुनियाद है।
सदी भर पुराना है इथेनॉल का इस्तेमाल
पुरी ने कहा कि इथेनॉल का इस्तेमाल भारत के लिए भले ही नया लगे, लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में इस पर लंबे अरसे से काम हो रहा है। उनके मुताबिक वैज्ञानिक कई वर्षों से इस पर लगातार रिसर्च करते आए हैं और बड़े स्तर पर परीक्षण के बाद ही इसे नीति के तौर पर लागू किया गया। उन्होंने कहा कि यह कॉन्सेप्ट न तो उनकी सरकार ने गढ़ा है और न ही यह भारत की खोज है, बल्कि करीब एक सदी से इस पर दुनियाभर में काम चल रहा है। इस सिलसिले में उन्होंने फोर्ड मोटर कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड का जिक्र किया और बताया कि वे अपने दौर में बायोफ्यूल, केरोसिन और फॉसिल फ्यूल के सहारे कारें चलाया करते थे। भारत की बात करें तो इस दिशा में सबसे पहला प्लान कांग्रेस सरकार के समय बना था। पुरी ने अपने ब्राजील में भारत के राजदूत रहने के दिनों को भी याद किया, खासतौर पर 2006 से 2008 के बीच के समय को, जब शरद पवार देश के कृषि मंत्री थे। उस दौर में दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर कुल 5% बायोफ्यूल हासिल करने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका और आंकड़ा सिर्फ 1.4% पर ही अटक कर रह गया।
रेसिंग कारों में भी होता है इस्तेमाल, माइलेज पर भी दिया जवाब
शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप सिंह पुरी ने माइलेज घटने से जुड़ी आशंकाओं पर भी विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि इथेनॉल मिलाने से फ्यूल माइलेज कम हो जाएगा। मंत्री के मुताबिक अब यह अच्छी तरह साबित हो चुका है कि इथेनॉल मिले फ्यूल का इस्तेमाल रेसिंग कारों में भी किया जाता है, जहां एक्सेलरेशन और नॉकिंग दोनों बेहतर होती है। उन्होंने माना कि माइलेज में मामूली गिरावट हो सकती है, लेकिन इसके पीछे कई अलग-अलग वजहें होती हैं, अकेले इथेनॉल इसकी वजह नहीं है। पुरी ने कहा कि यह फैसला अकेले सरकार ने नहीं लिया है, बल्कि SIAM और ARAI समेत सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से सलाह-मशविरा करने के बाद ही इस स्टेज तक पहुंचा गया है। उन्होंने इंश्योरेंस को लेकर फैली अफवाह पर भी सफाई दी, जिसमें दावा किया जा रहा था कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल इस्तेमाल करने पर वाहन का इंश्योरेंस कवर नहीं मिलेगा। मंत्री ने बताया कि इंश्योरेंस कंपनियां पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि ऐसा कोई नियम मौजूद नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस तरह की झूठी बातें फैलाने से किसे फायदा मिलता है, हालांकि उन्होंने साफ किया कि वे किसी पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगा रहे। पुरी ने कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता कंज्यूमर मार्केट इतना बड़ा है कि इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों और बायोफ्यूल ब्लेंडेड वाहनों, दोनों तरह की टेक्नोलॉजी के लिए पर्याप्त जगह है। उन्होंने बताया कि फिलहाल देश 20 परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग के स्तर पर है, और इसे 20 परसेंट से बढ़ाकर 25 परसेंट तक ले जाने का फैसला तभी लिया जाएगा जब इससे जुड़े सभी जरूरी टेस्ट पूरी तरह पूरे हो जाएंगे।













