गाड़ी चलाते वक्त अगर यह महसूस हो कि एक्सीलेटर दबाने पर भी पिकअप सुस्त पड़ रहा है और पेट्रोल या डीजल तेजी से खत्म हो रहा है, तो अक्सर लोग बड़ी खराबी की आशंका से घबरा जाते हैं। कई बार असल वजह कोई बड़ा तकनीकी दोष नहीं, बल्कि इंजन तक हवा पहुंचाने वाली नली में लगा मामूली सा एयर फिल्टर होता है। यह पुर्जा इंजन के लिए ठीक उसी तरह सांस की नली का काम करता है, जैसे इंसान के फेफड़े स्वच्छ हवा खींचते हैं। जब बाहर की बारीक धूल, रेतीले कण और मैल इस फिल्टर की जाली पर जम जाते हैं, तो इंजन के कंबशन चैंबर में हवा का स्वाभाविक प्रवाह रुकने लगता है। पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण गाड़ी का ईंधन पूरी तरह नहीं जल पाता, नतीजतन माइलेज धड़ाम से गिरता है और इंजन की ताकत कम होने लगती है। यदि इस गंदगी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो इंजन के भीतरी कलपुर्जों पर गैरजरूरी दबाव बनता है, जो बाद में भारी भरकम रिपेयरिंग बिल का कारण बनता है।
कब पड़ती है इस फिल्टर को बदलने की जरूरत
सामान्य परिस्थितियों में अधिकांश गाड़ियों का एयर फिल्टर 15,000 से 30,000 किलोमीटर चलने के बाद बदल देना चाहिए। हालांकि सड़कों पर उड़ने वाली धूल और निर्माण कार्यों वाले इलाकों में नियमित ड्राइविंग करने वाले चालकों के लिए यह सीमा और भी घट जाती है। तय अंतराल पर इस पुर्जे की पड़ताल करते रहने से इंजन की कार्यक्षमता और उम्र दोनों दुरुस्त रहती हैं, साथ ही ड्राइविंग का रिस्पॉन्स भी हमेशा हल्का और तेज बना रहता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस पूरी जांच और रिप्लेसमेंट के लिए किसी गैराज जाने या मैकेनिक को भारी मजदूरी चुकाने की कतई जरूरत नहीं होती। थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी के साथ कोई भी कार मालिक इसे अपने घर के गैराज या पार्किंग में खुद ही बदल सकता है।
बोनट के नीचे कहां छिपा होता है यह बॉक्स
फिल्टर की जांच शुरू करने के लिए सबसे पहले गाड़ी को समतल जगह पर खड़ा करके इंजन बंद करें और बोनट ऊपर उठाएं। इंजन ब्लॉक के ठीक पास एक बड़ा, काले रंग का मजबूत प्लास्टिक बॉक्स दिखाई देगा, जो आमतौर पर आयताकार या गोल आकार का होता है। इस प्लास्टिक बॉक्स को सुरक्षित रखने के लिए किनारों पर मेटल या प्लास्टिक की क्लिप्स, स्क्रू या मजबूत रबर बैंड लगे होते हैं। अगर पहली नजर में इसकी जगह स्पष्ट न हो, तो गाड़ी के साथ मिलने वाले यूजर मैनुअल में दिए गए डायग्राम की मदद ली जा सकती है। कुछ आधुनिक गाड़ियों में यह कंपार्टमेंट थोड़ा नीचे या गहराई में फिट किया गया होता है, जिसे ठीक से देखने के लिए हाथ में एक टॉर्च रखना काफी मददगार साबित होता है।
गंदगी की पहचान और जांच का आसान तरीका
बॉक्स पर लगी क्लिप्स या स्क्रू को सावधानी से खोलने के बाद फिल्टर को बाहर निकालें और किसी तेज रोशनी या दिन के उजाले में उसका मुआयना करें। यदि फिल्टर की सतह पूरी तरह गहरी काली, तैलीय या धूल की मोटी परत से अटी पड़ी दिखे, तो समझ जाएं कि इसे फौरन बदलने की घड़ी आ चुकी है। वहीं यदि इसका रंग सफेद या हल्का भूरा बना हुआ है, तो यह दर्शाता है कि फिल्टर अभी साफ है और काम करने की स्थिति में है। हल्की धूल दिखने पर उसे जमीन या हथेली पर हल्का सा थपथपाकर झाड़ा जा सकता है, मगर चिकनाई और गहरी जमी गंदगी के मामले में केवल झाड़ना काफी नहीं होता। उंगलियों से फिल्टर की परतों को थोड़ा फैलाकर देखें कि अंदरूनी छिद्र पूरी तरह बंद तो नहीं हो चुके हैं। अनुभवी कार चालकों के लिए इंजन ऑयल बदलने के हर रूटीन के साथ एयर फिल्टर की जांच कर लेना एक बेहतरीन आदत मानी जाती है।
नया फिल्टर चुनते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
बाजार से नया पुर्जा खरीदते समय अपनी कार के सटीक मॉडल, मेक और मैन्युफैक्चरिंग साल के हिसाब से ही ओईएम या किसी प्रतिष्ठित ब्रांड का आफ्टरमार्केट फिल्टर पसंद करें। गलत माप या सस्ते घटिया दर्जे के फिल्टर बॉक्स के अंदर ढीले रह जाते हैं, जिससे बिना छनी गंदी हवा सीधे इंजन में घुसकर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। फिल्टर के पैकेट पर छपे स्पेसिफिकेशन को अपनी गाड़ी की जरूरत से अच्छी तरह मिलाएं। बाजार में साधारण कागज और कॉटन सामग्री से बने फिल्टर सबसे ज्यादा चलन में हैं, जबकि हाई-परफॉर्मेंस वाले विकल्प थोड़े महंगे होने के बावजूद हवा का ज्यादा सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करते हैं। खरीदारी करते वक्त फिल्टर के चारों तरफ लगी रबर एज और सील की मजबूती जरूर जांचें, ताकि हवा के रिसाव की कोई गुंजाइश न बचे।
पुराने फिल्टर को हटाने और नया लगाने की सही विधि
बॉक्स को खोलते वक्त जल्दबाजी न दिखाएं और क्लिप्स हटाने के बाद पुराने फिल्टर को बिना किसी झटके के सीधे ऊपर की ओर खींचें। पुराना पुर्जा बाहर निकालते ही बॉक्स के अंदरूनी हिस्से को एक साफ सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें, ताकि अंदर जमा धूल या मरे हुए कीड़े-मकोड़े नए फिल्टर के रास्ते इंजन में न खिंच जाएं। उपयोग किए जा चुके गंदे फिल्टर को तुरंत एक प्लास्टिक बैग में सील करके कचरे में डाल दें। नया फिल्टर लगाते समय उसके बैठने की दिशा का खास ख्याल रखें और उसे ठीक उसी खांचे में बैठाएं जैसे पुराना लगा हुआ था। किनारों को उंगलियों से दबाकर यह पक्का कर लें कि कोई गैप बाकी नहीं बचा है, फिर बॉक्स का ढक्कन लगाकर क्लिप्स या पेंच मजबूती से कस दें। इसके बाद इंजन स्टार्ट करके कुछ पल किसी असामान्य आवाज पर गौर करें और कुछ किलोमीटर की टेस्ट ड्राइव लेकर थ्रॉटल रिस्पॉन्स तथा पिकअप महसूस करें।



















