दक्षिण कोरिया के प्रमुख वाहन समूह हुंडई मोटर ग्रुप ने भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी उपस्थिति को अभूतपूर्व विस्तार देने की तैयारी कर ली है। कंपनी वर्ष 2032 तक देश में 15.5 अरब डॉलर यानी करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये की भारी पूंजी लगाएगी। आगामी सात वर्षों में पूरी की जाने वाली इस वित्तीय योजना को लेकर समूह के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन ईसुन चुंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे बातचीत की और ऑटो उद्योग की भविष्य की दिशा पर मंथन किया। इस कदम के जरिए कंपनी भारत को उभरते अंतरराष्ट्रीय बाजारों और अपनी आने वाली वृद्धि के सबसे बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है।
विनिर्माण क्षमता और अनुसंधान को मिलेगा नया विस्तार
इस भारी-भरकम पूंजी को केवल असेंबली लाइनों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसके तहत व्यापक औद्योगिक बुनियादी ढांचा तैयार करने की योजना है। कंपनी का मुख्य जोर स्थानीय स्तर पर पार्ट्स तैयार करने, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) तंत्र को अपग्रेड करने और अत्याधुनिक मोबिलिटी तकनीकों को भारत में लाने पर रहेगा। भारतीय सप्लायर्स को नई तकनीक से लैस किया जाएगा ताकि कलपुर्जों के आयात पर निर्भरता कम हो सके और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला और अधिक मजबूत बन सके।
परियोजनाओं के संचालन के लिए गठित होगी अलग इंवेस्टमेंट शाखा
इतने बड़े निवेश को सुचारू और व्यवस्थित रूप से जमीनी स्तर पर उतारने के लिए हुंडई भारत में एक समर्पित इंवेस्टमेंट यूनिट स्थापित करने जा रही है। यह विशेष इकाई आरएंडडी, नई तकनीकों और ऑटोमोटिव इकोसिस्टम से जुड़ी सभी वित्तीय गतिविधियों में समन्वय बनाए रखेगी। इसके अलावा, देश में नए रणनीतिक साझेदारों को तलाशने और स्थानीय विनिर्माताओं के साथ दीर्घकालिक व्यावसायिक समझौते कराने की जिम्मेदारी भी इसी इकाई के पास होगी।
तीन दशकों के रिश्ते को अगले 30 वर्षों तक ले जाने का संकल्प
समूह के शीर्ष नेतृत्व ने इस विस्तार को भारतीय बाजार के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता बताया है। इस मौके पर ईसुन चुंग ने कहा,
"भारत ग्लोबल लेवल पर हुंडई मोटर के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में से एक है।"उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय धरती पर अपने तीन दशक पूरे करने के बाद यह कदम अगले 30 साल और उससे भी आगे तक के सफर की नींव रखता है, जिससे बड़े पैमाने पर नए रोजगार सृजित होंगे और देश के औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलेगी।
हुंडई मोटर इंडिया और किआ इंडिया की उत्पादन क्षमता में होगी बढ़ोतरी
वर्तमान में समूह भारत के भीतर अपनी दो प्रमुख कंपनियों हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड और किआ इंडिया के माध्यम से काम कर रहा है। नई वित्तीय योजना के तहत इन दोनों ही कंपनियों की फैक्टरियों में वाहनों के निर्माण की क्षमता को काफी बढ़ाया जाएगा। इस कदम का दोहरा फायदा मिलेगा: एक तरफ जहां तेजी से बढ़ती घरेलू मांग की आपूर्ति समय पर होगी, वहीं दूसरी तरफ भारत को वैश्विक बाजारों के लिए एक प्रमुख एक्सपोर्ट हब के रूप में तैयार किया जा सकेगा। भारत में समूह का मौजूदा कार्यबल पहले ही 24,000 से अधिक कर्मचारियों का है। इस नए निवेश चक्र के शुरू होने से कारखानों, आरएंडडी केंद्रों, इंजीनियरिंग डिवीजनों और लॉजिस्टिक्स चेन में युवाओं के लिए नौकरियों के हजारों नए अवसर बनने की उम्मीद है।



















