टाटा मोटर्स की लग्जरी कार बनाने वाली कंपनी जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) अपने कर्मचारियों के लिए एक स्वैच्छिक छंटनी योजना लाने की तैयारी में है, जिसके तहत अगले दो साल में करीब 4,000 पदों में कटौती हो सकती है। कंपनी सोमवार को इस योजना का औपचारिक ऐलान कर सकती है।
दो साल में 1.7 अरब पाउंड बचाने का लक्ष्य
जेएलआर का कहना है कि बदलते वैश्विक बाजार हालात के हिसाब से खुद को ढालने के लिए उसे आने वाले दो वर्षों में करीब 1.7 अरब पाउंड की बचत करनी होगी। कंपनी ने अपने बयान में बताया कि पिछले तीन सालों में उसने अपने ब्रांड को मजबूत बनाने पर काम किया है और आने वाली पीढ़ी की गाड़ियों के लिए प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में भी जरूरी फेरबदल किए हैं। कंपनी इसे तीन साल पहले शुरू किए गए अपने टर्नअराउंड प्लान का अगला चरण बता रही है, जब उसने खुद को प्रीमियम सेगमेंट में मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया था। अब बदलते और मुश्किल होते वैश्विक कारोबारी माहौल में इसी बचत लक्ष्य को हासिल करना कंपनी की प्राथमिकता बन गया है।
3 लाख गाड़ियां बेचने का इरादा, कर्मचारियों को दिया जाएगा विकल्प
जेएलआर के मुताबिक उसकी रणनीति के अगले चरण में बदलते वैश्विक हालात के अनुसार खुद को ढालना और साथ ही करीब 3 लाख गाड़ियों की बिक्री करना शामिल है। इसी योजना के तहत कंपनी 1.7 अरब पाउंड बचाने की कोशिश करेगी। यह बिक्री लक्ष्य बताता है कि कर्मचारियों की संख्या घटाने के बावजूद कंपनी ज्यादा मुनाफे वाली बिक्री बढ़ाने पर कितना जोर दे रही है। जेएलआर ने बताया कि उसने अपने कर्मचारियों और कारोबारी संघों के प्रतिनिधियों को स्वैच्छिक छंटनी कार्यक्रम की जानकारी पहले ही दे दी है। इस योजना के तहत वेतनभोगी कर्मचारियों और प्रबंधन टीम में शामिल लोगों को कंपनी से खुद अलग होने का विकल्प दिया जाएगा, यानी यह छंटनी सिर्फ फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार कंपनी की कमाई में भारी गिरावट
जगुआर लैंड रोवर ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मानी जाती है, लेकिन हाल के समय में उसकी कमाई में तेज गिरावट देखी गई है। इसकी बड़ी वजहें कम बिक्री, कंपनी पर हुआ साइबर हमला और डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बताए जा रहे हैं। कमजोर मांग, साइबर हमले और टैरिफ के बोझ, इन तीनों वजहों ने मिलकर कंपनी के वित्तीय हालात पर दबाव बढ़ा दिया है, वो भी उस समय जब कंपनी अपनी अगली पीढ़ी की गाड़ियों में निवेश करने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि लागत घटाने की योजना पर अमल करने की जरूरत और भी बढ़ गई है।
यूनियन बोली, कर्मचारियों की कीमत पर बार-बार समझौता स्वीकार नहीं
यूनाइट वर्कर्स यूनियन की महासचिव शेरोन ग्राहम ने कहा कि जेएलआर में होने वाली छंटनी का असर कम करने के उपायों को लेकर वीकेंड में सरकार के साथ गहन बातचीत हुई है, और कर्मचारियों की मदद के लिए यूनियन हरसंभव कोशिश करेगी। उन्होंने कहा, "ये स्वीकार्य नहीं है कि एक बार फिर कर्मचारियों को इसकी कीमत चुकानी पड़े।" उनके इस बयान में इस्तेमाल हुए "एक बार फिर" शब्द से जाहिर होता है कि यूनियन के भीतर यह चिंता बनी हुई है कि जब भी कंपनी अपने कामकाज को नए सिरे से व्यवस्थित करती है, उसका बोझ बार-बार कर्मचारियों पर ही आ जाता है।


















