भारत के दोपहिया वाहन बाजार में आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले शानदार तेजी देखने को मिल रही है। अगस्त के महीने में शोरूम्स पर ग्राहकों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है, जिससे टू-व्हीलर कंपनियों और डीलरों के चेहरे खिल उठे हैं। शुरुआती आंकड़ों और बाजार संकेतकों के अनुसार, इस महीने रिटेल बिक्री में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 18 से 20 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज किए जाने का अनुमान है। वाहनों की यह मांग केवल प्रारंभिक पूछताछ तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में लोग गाड़ियां खरीदने के इरादे से शोरूम पहुंच रहे हैं।
ओणम और ऑर्गेनिक पूछताछ से शोरूम में बढ़ी रौनक
इस बिक्री उछाल का एक प्रमुख तात्कालिक कारण दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला ओणम का त्योहार है। ओणम के दौरान दक्षिण भारतीय राज्यों में नए वाहनों की खरीदारी में पारंपरिक रूप से बड़ी बढ़ोतरी होती है, जिसने इस बार भी बाजार को शुरुआती रफ्तार दी है। हालांकि, वाहन उद्योग के जानकारों का मानना है कि तेजी सिर्फ त्योहारों तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, शोरूम्स पर आने वाले ग्राहकों की ऑर्गेनिक या प्राकृतिक पूछताछ में भी 10 से 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि आम उपभोक्ता अब केवल गाड़ियाँ देखने या एक्स-शोरूम कीमतें पूछने नहीं आ रहे, बल्कि वे खरीदारी का अंतिम फैसला लेने को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की भारी मांग और वेटिंग पीरियड
इस बार के बिक्री रुझानों में सबसे दिलचस्प बदलाव इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV श्रेणी में देखा जा रहा है। मेट्रो और बड़े शहरों के अलावा टियर-1 और टियर-2 शहरों में भी इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग बहुत तेजी से उभरी है। शोरूम्स पर ग्राहकों का झुकाव पर्यावरण-अनुकूल और कम रनिंग कॉस्ट वाले EV मॉडल्स की तरफ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मांग में इस अचानक आई तेजी के कारण कई लोकप्रिय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का वेटिंग पीरियड 3 से 4 महीने तक पहुंच गया है। इसका तात्पर्य यह है कि डिलीवरी पाने के लिए ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि निर्माता कंपनियां त्योहारों से पहले आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने में जुटी हुई हैं।
प्रीमियम पेट्रोल गाड़ियों का जलवा और बदलती ग्राहक पसंद
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते दबदबे के बावजूद पारंपरिक इंटरनल कंबस्टन इंजन वाले प्रीमियम पेट्रोल मॉडल्स की चमक फीकी नहीं पड़ी है। बाजार में ज्यादा मांग वाले पेट्रोल टू-व्हीलर्स के लिए भी ग्राहकों को लगभग 1 से 1.5 महीने का वेटिंग टाइम झेलना पड़ रहा है। इससे यह साफ होता है कि भारतीय उपभोक्ता अब सिर्फ सबसे सस्ती या एंट्री-लेवल गाड़ियां नहीं खोज रहा है। इसके विपरीत, आधुनिक फीचर्स, बेहतर इंजन परफॉर्मेंस, उन्नत कनेक्टिविटी और नई टेक्नोलॉजी से लैस टॉप-एंड वेरिएंट्स की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब गाड़ी खरीदते समय शुरुआती कीमत के बजाय सुविधाओं और वाहन की ओवरऑल क्वालिटी को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
CNG वाहनों की मांग में उछाल और E20 ईंधन की चिंताएं
वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले दोपहिया वाहनों को लेकर भी ग्राहकों के व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, CNG और EV दोनों ही विकल्पों के लिए पूछताछ और प्री-बुकिंग में 30 प्रतिशत से अधिक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में नए CNG मॉडल्स की लॉन्चिंग ने उपभोक्ताओं को नया विकल्प दिया है। इसके अलावा, पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 ईंधन को लेकर बनी चिंताओं ने भी वाहन खरीदारों को वैकल्पि के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है। ग्राहक अब केवल गाड़ी की शुरुआती कीमत नहीं देख रहे, बल्कि यह भी गणित लगा रहे हैं कि लंबे समय में वाहन का प्रति किलोमीटर चलने का खर्च कितना आएगा।
निर्माताओं की ओर से स्थिर डिस्काउंट और संभावित मूल्य वृद्धि
आमतौर पर बिक्री बढ़ाने के लिए कंपनियां भारी-भरकम छूट और ऑफर्स का सहारा लेती हैं, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। अगस्त के महीने में कंपनियों ने डिस्काउंट में कोई बड़ा इजाफा नहीं किया है, और छूट का स्तर पिछले महीनों की तरह ही स्थिर बना हुआ है। इसके बावजूद बिक्री की गति पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। दूसरी ओर, कच्चे माल और इनपुट कॉस्ट की लागत बढ़ने के कारण वाहन निर्माताओं यानी OEMs पर मार्जिन का दबाव है। कई कंपनियों ने हाल ही में कीमतें बढ़ाई हैं और आने वाले हफ्तों में गाड़ियों के दामों में 0.5 से 1.5 प्रतिशत तक की एक और बढ़ोतरी लागू होने की संभावना है। इसके बावजूद ग्राहकों की खरीदारी की इच्छा बनी हुई है, जो बाजार की अंतर्निहित मजबूती को दर्शाती है।
नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के लिए सकारात्मक संकेत
अगस्त में दर्ज की गई लगभग 20 फीसदी की यह रिटेल ग्रोथ आगामी मुख्य त्योहारी सीजन के लिए एक बेहद मजबूत आधार तैयार करती है। आने वाले महीनों में देश भर में नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार मनाए जाएंगे, जब पारंपरिक रूप से ऑटोमोबाइल बिक्री अपने शिखर पर होती है। EV और प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट्स के प्रति बढ़ता आकर्षण, CNG की ओर रुझान और कंपनियों द्वारा सप्लाई चेन में किया जा रहा सुधार यह संकेत देता है कि इस साल का फेस्टिव सीजन टू-व्हीलर इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है।



















