उत्तर-पूर्वी अल्जीरिया के जंगलों में अचानक भड़की भीषण आग ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। देश भर में एक ही दिन में 159 अलग-अलग स्थानों पर आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। यह प्राकृतिक आपदा अल्जीरिया और पड़ोसी देश ट्यूनीशिया में जारी भीषण हीटवेव के दौरान आई है, जहाँ रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने सूखी वनस्पतियों को तेज़ी से लपटों में बदल दिया। कई प्रभावित क्षेत्रों से स्थानीय निवासियों और परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।
प्रांतवार तबाही और मौतों का विवरण
अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस आग की चपेट में आने से जिजेल प्रांत में 5 लोगों की जान गई है, बेजाया प्रांत में 4 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि तिजी ओउजौ प्रांत में 3 लोगों की मौत दर्ज की गई। बुधवार को दर्ज की गई 159 आग की घटनाओं में सबसे गंभीर स्थिति बेजाया प्रांत में देखी गई, जहाँ अकेले 36 स्थानों पर आग भड़क उठी। राहत टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बेजाया में 18 आग पर काबू पा लिया है, लेकिन 18 अन्य स्थानों पर लपटें अभी भी अनियंत्रित बनी हुई हैं। इसी तरह, पड़ोसी जिजेल प्रांत की 12 अलग-अलग नगरपालिकाओं में भी आग बुझाने का व्यापक अभियान जारी है।
सरकारी तंत्र की सक्रियता और अस्पतालों का दौरा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अल्जीरिया के राष्ट्रपति अब्देलमजीद तेब्बौने ने शीर्ष अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाने के निर्देश दिए। राष्ट्रपति के आदेश पर गृह मंत्री सईद सयूद ने गुरुवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद सेद्दीक ऐत मेसाउडेन भी मौजूद थे। दोनों मंत्रियों ने बेजाया और फिर जिजेल प्रांत पहुँचकर चल रहे बचाव अभियानों की समीक्षा की। गृह मंत्री सईद सयूद ने बेजाया प्रांत के सौक एल थेनाइन शहर स्थित अस्पताल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने आग की लपटों में झुलसे तथा विषैले धुएं की चपेट में आए मरीजों का हाल-चाल जाना और उनके इलाज की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
नियंत्रित क्षेत्र और मौसम की चुनौतियाँ
कड़ी मशक्कत के बाद आपातकालीन सेवाओं ने स्किक्दा, एल तारफ, बुइरा, तिजी ओउजौ और तेबेस्सा प्रांतों में भड़की आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया है। हालांकि, तटीय क्षेत्रों में चल रही तेज़ हवाओं और अत्यधिक तापमान ने स्थिति को जटिल बना रखा है। भूमध्यसागरीय तटीय पट्टी में गर्मियों के मौसम के दौरान जंगलों में आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में बढ़ती भीषण गर्मी, लंबे सूखे और तेज़ हवाओं के संयोजन ने इस प्राकृतिक जोखिम को बेहद खतरनाक स्तर पर पहुँचा दिया है। वर्तमान में सुरक्षा बल और अग्निशमन कर्मी प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज किए हुए हैं।



















