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टेस्ट क्रिकेट इतिहास में बिना डक आउट हुए करियर पूरा करने वाले 5 अनोखे दिग्गज बल्लेबाजक्रिकेट
27 अग॰ 2026, 7:20 pm (1 घंटे पहले)· 2

टेस्ट क्रिकेट इतिहास में बिना डक आउट हुए करियर पूरा करने वाले 5 अनोखे दिग्गज बल्लेबाज

लाल गेंद के क्रिकेट में बिना खाता खोले पवेलियन न लौटने की उपलब्धि बेहद दुर्लभ मानी जाती है। जिम्बाब्वे, ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज और भारत के इन 5 दिग्गज बल्लेबाजों का टेस्ट करियर बिना किसी डक के समाप्त हुआ।

टेस्ट क्रिकेट का प्रारूप केवल शारीरिक सहनशक्ति का ही इम्तिहान नहीं लेता, बल्कि यह किसी भी बल्लेबाज के मानसिक अनुशासन की सबसे कठिन परीक्षा भी होता है। 149 वर्षों से भी अधिक लंबे अंतरराष्ट्रीय टेस्ट इतिहास में लाल गेंद का सामना करना, विपरीत परिस्थितियों में खुद को संभालना और विरोधी गेंदबाजों के पैने आक्रमण के सामने डटे रहना हर बल्लेबाज के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। किसी भी पारी की शुरुआती कुछ गेंदें बल्लेबाज की एकाग्रता को आसानी से भंग कर सकती हैं। ऐसे दबाव भरे माहौल में अपने पूरे करियर के दौरान एक बार भी शून्य यानी 'डक' पर आउट न होना एक असाधारण और दुर्लभ कारनामा माना जाता है। यह उपलब्धि केवल बेहतरीन बल्लेबाजी तकनीक का ही प्रमाण नहीं है, बल्कि यह खिलाड़ी के अटूट संयम और दिमागी मजबूती को भी दर्शाती है। खेल के इस सबसे लंबे प्रारूप में कुछ ही ऐसे खिलाड़ी हुए हैं, जिनके नाम के आगे कभी 0 रन पर आउट होने का दाग नहीं लगा। इस खास ऐतिहासिक क्लब में जिम्बाब्वे, ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज और भारत के कुल 5 दिग्गज बल्लेबाजों का नाम दर्ज है।

सीन विलियम्स: जिम्बाब्वे के दिग्गज का रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन

बिना डक के करियर समाप्त करने वाले बल्लेबाजों की सूची में सबसे शीर्ष पर जिम्बाब्वे के सीन विलियम्स का नाम आता है। उन्होंने पारियों की संख्या और निरंतरता के मामले में सभी को पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2013 से शुरू होकर 2025 तक चले अपने 12 साल के लंबे टेस्ट करियर के दौरान विलियम्स ने जिम्बाब्वे की राष्ट्रीय टीम के लिए 24 मुकाबले खेले। इस दौरान उन्होंने कुल 47 पारियों में बल्लेबाजी की।

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अपनी टीम के मध्यक्रम के मजबूत स्तंभ रहे सीन विलियम्स ने 47 पारियों में से 4 मौकों पर नाबाद रहते हुए 45.25 के बेहतरीन औसत से कुल 1946 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में उनका उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर 154 रन रहा, जबकि उनका स्ट्राइक रेट 64.43 का दर्ज किया गया। अपनी मैराथन पारियों में उन्होंने कुल 3020 गेंदों का सामना किया, जिसके दौरान उनके बल्ले से 6 शतक और 7 अर्धशतक निकले। विलियम्स ने अपने टेस्ट करियर में 222 चौके और 16 छक्के भी जड़े। इतनी लंबी अवधि और 47 बार क्रीज पर उतरने के बावजूद वे एक बार भी 0 रन पर पवेलियन नहीं लौटे।

जिम बर्क: 1950 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई मध्यक्रम का मजबूत आधार

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज जिम बर्क का नाम इस ऐतिहासिक फेहरिस्त में दूसरे स्थान पर आता है। 1950 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम को मजबूती देने वाले बर्क ने 1951 से लेकर 1959 तक अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट खेला। इस 8 साल के करियर में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 24 टेस्ट मैचों में हिस्सा लिया और कुल 44 पारियों में बल्लेबाजी की।

अपनी ठोस तकनीक और संयमित खेल शैली के लिए पहचाने जाने वाले जिम बर्क 7 पारियों में नाबाद रहे। उन्होंने 34.59 के बल्लेबाजी औसत से कुल 1280 रन जुटाए। उनका सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर 189 रन रहा। अपने करियर में उन्होंने 3 शतकीय और 5 अर्धशतकीय पारियां खेलीं। विपक्षी गेंदबाजों की तमाम रणनीतियों और पैनी गेंदों के बावजूद बर्क अपनी 44 पारियों में कभी शून्य का शिकार नहीं हुए और हर बार अपना खाता खोलने में सफल रहे।

रेजी डफ: 20वीं सदी के शुरुआती दौर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के पन्नों को पलटें तो 20वीं सदी की शुरुआत में रेजी डफ ने एक ऐसा कारनामा किया जो आज भी क्रिकेट इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वर्ष 1902 से 1905 के बीच खेले गए अपने छोटे लेकिन बेहद प्रभावी टेस्ट करियर में डफ ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 22 मुकाबले खेले और 40 पारियों में बल्लेबाजी का मौका पाया।

रेजी डफ ने अपनी 40 पारियों में 3 बार नाबाद रहते हुए 35.59 के औसत से कुल 1317 रन बनाए। उनका उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर 146 रन रहा। उन्होंने अपने करियर में 2 शतक और 6 अर्धशतक लगाए। उस दौर में जब क्रिकेट पिचें अनिश्चित स्वभाव की होती थीं और बिना ढकी पिचों पर बल्लेबाजी करना बेहद कठिन होता था, तब भी डफ अपनी सभी 40 पारियों में शून्य पर आउट होने से बचे रहे।

ब्रिजेश पटेल: भारतीय मध्यक्रम के बल्लेबाज की अनोखी सफलता

भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह रिकॉर्ड बेहद खास है क्योंकि इस सूची में भारत के ब्रिजेश पटेल का नाम शामिल है। वर्ष 1974 से 1977 के दौरान भारतीय टेस्ट टीम के मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने वाले पटेल ने देश के लिए 21 अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैचों में प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्हें कुल 38 पारियों में बल्लेबाजी करने का अवसर मिला।

ब्रिजेश पटेल ने 38 पारियों में से 5 मौकों पर नाबाद रहते हुए 29.45 की औसत से कुल 972 रन बनाए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नाबाद 115 रन रहा। अपने टेस्ट करियर में उन्होंने 794 से अधिक गेंदों का सामना किया और 1 शतक के साथ 5 अर्धशतक जमाए। उनके बल्ले से 86 से ज्यादा चौके और 7 शानदार छक्के भी निकले। भारतीय टीम के लिए खेलते हुए वे हर बार अपनी पहली रन बनाने में सफल रहे और 38 पारियों में कभी डक पर आउट नहीं हुए।

रॉबर्ट क्रिस्टियानी: वेस्टइंडीज के आक्रामक युग में संयम की मिसाल

वेस्टइंडीज के क्रिकेट की जब भी बात की जाती है तो आमतौर पर बल्लेबाजों के आक्रामक तेवरों का जिक्र होता है, लेकिन रॉबर्ट क्रिस्टियानी ने मैदान पर गजब का धैर्य और संयम दिखाया। वर्ष 1948 से 1954 के बीच क्रिस्टियानी ने वेस्टइंडीज के लिए 22 टेस्ट मैचों में शिरकत की और कुल 37 पारियों में बल्लेबाजी की।

रॉबर्ट क्रिस्टियानी 37 पारियों में 3 बार नाबाद रहे और उन्होंने 26.35 की औसत से कुल 896 रन बनाए। उनका उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर 107 रन रहा। उन्होंने अपने करियर में 1 शतक और 4 अर्धशतक जड़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर के तेज और तीखे गेंदबाजों के सामने बल्लेबाजी करते हुए भी उन्होंने अपनी 37 पारियों में कभी शून्य का सामना नहीं किया।

टेस्ट इतिहास में शून्य पर आउट न होने का महत्व

टेस्ट क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाज का बिना शून्य पर आउट हुए करियर समाप्त करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। जिम्बाब्वे के सीन विलियम्स (47 पारियां), ऑस्ट्रेलिया के जिम बर्क (44 पारियां), ऑस्ट्रेलिया के रेजी डफ (40 पारियां), भारत के ब्रिजेश पटेल (38 पारियां) और वेस्टइंडीज के रॉबर्ट क्रिस्टियानी (37 पारियां) ने अपनी अद्भुत एकाग्रता से यह साबित किया कि अनुशासन और तकनीक के बल पर दुनिया के सबसे कठिन प्रारूप में भी डक से बचा जा सकता है।

सवाल-जवाब

टेस्ट क्रिकेट में बिना डक आउट हुए सबसे ज्यादा पारियां खेलने का रिकॉर्ड किसके नाम है?
जिम्बाब्वे के सीन विलियम्स के नाम यह रिकॉर्ड है, जिन्होंने 2013 से 2025 के दौरान अपनी सभी 47 टेस्ट पारियों में बिना 0 पर आउट हुए बल्लेबाजी की।
किस भारतीय बल्लेबाज ने अपना टेस्ट करियर बिना किसी डक के खत्म किया?
भारत के ब्रिजेश पटेल ने 1974 से 1977 तक 21 टेस्ट मैचों की 38 पारियों में बल्लेबाजी की और हर बार अपना खाता खोलने में सफल रहे।
ऑस्ट्रेलिया के कौन से बल्लेबाज बिना डक पर आउट हुए टेस्ट करियर खत्म करने की सूची में शामिल हैं?
ऑस्ट्रेलिया के जिम बर्क (44 पारियां, 1951-1959) और रेजी डफ (40 पारियां, 1902-1905) इस खास रिकॉर्ड सूची का हिस्सा हैं।
टेस्ट क्रिकेट इतिहास में कुल कितने बल्लेबाजों ने बिना डक के अपना करियर पूरा किया है?
149 साल से भी लंबे टेस्ट क्रिकेट इतिहास में केवल 5 बल्लेबाजों (सीन विलियम्स, जिम बर्क, रेजी डफ, ब्रिजेश पटेल और रॉबर्ट क्रिस्टियानी) ने यह उपलब्धि हासिल की है।
सीन विलियम्स का टेस्ट क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर और औसत क्या रहा?
सीन विलियम्स का सर्वोच्च टेस्ट स्कोर 154 रन रहा और उन्होंने 45.25 के औसत से कुल 1946 रन बनाए।
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