सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और रात के समय ड्राइवरों को सामने से आने वाली तेज रोशनी की चकाचौंध से राहत देने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक अहम प्रस्ताव पेश किया है। मंत्रालय के इस नए नोटिफिकेशन के तहत नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप ऑन (एएचओ) सिस्टम को सिर्फ पासिंग बीम यानी लो-बीम मोड में ही चलाने की अनिवार्यता रखी गई है। इस नई व्यवस्था को 1 अप्रैल 2028 से देशभर में लागू करने की योजना बनाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य रात में हाईवे और शहरी सड़कों पर बेहतर दृश्यता सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं के खतरे को कम करना है।
दोपहिया वाहनों में केवल लो बीम पर काम करेगा ऑटोमैटिक सिस्टम
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से जारी मसौदा नियमों में स्पष्ट किया गया है कि 1 अप्रैल 2028 या उसके बाद बनने वाले सभी नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप ऑन (एएचओ) प्रणाली सिर्फ लो-बीम पर ही सक्रिय होगी। मौजूदा समय में एएचओ प्रणाली वाहन की सेटिंग्स या जरूरत के हिसाब से लो-बीम अथवा हाई-बीम दोनों पर संचालित हो सकती है। हालांकि, नए नियमों के प्रभावी होने के बाद जब भी ऑटोमैटिक सिस्टम चालू होगा, तब हेडलैंप डिफ़ॉल्ट रूप से लो-बीम पर ही रहेगा, ताकि सामने से आ रहे अन्य चालकों की आंखों पर तेज रोशनी न पड़े।
कार और बाइक की हेडलाइट ब्राइटनेस पर सख्त सीमाएं
रोशनी की तीव्रता को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने वाहनों की अधिकतम ब्राइटनेस सीमा में भारी कटौती का प्रस्ताव रखा है। रोशनी मापने की आधिकारिक एसआई इकाई कैंडेला (cd) के आधार पर नए मानक तय किए गए हैं। दोपहिया वाहनों के लिए हाई-इंटेंसिटी हेडलैंप की अधिकतम अनुमत रोशनी तीव्रता को 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला करने की सिफारिश की गई है। वहीं, चार पहिया वाहनों के लिए अधिकतम रोशनी की सीमा को 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला तय करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
रात के समय हाईवे और शहरों में हादसों पर लगेगी रोक
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, देश में रात के समय होने वाले गंभीर सड़क हादसों का एक बड़ा कारण वाहनों की तेज रोशनी और हाई-बीम का अत्यधिक उपयोग है। राजमार्गों पर जब तेज गति से आ रही गाड़ियाँ हाई-बीम जलाती हैं, तो सामने वाले चालक को कुछ क्षणों के लिए सड़क दिखाई देना बंद हो जाता है, जिससे जानलेवा टक्कर हो जाती है। मंत्रालय का मानना है कि दोपहिया और चार पहिया वाहनों की लाइट ब्राइटनेस पर सीमा लगाने और लो-बीम को अनिवार्य करने से राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ शहरों के भीतर होने वाली दुर्घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।



















