मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर कड़ा प्रहार करते हुए जांच एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा इलाके में छिपाई गई दो गुप्त ड्रग प्रयोगशालाओं को पकड़कर सीज कर दिया है। इस बड़ी छापेमारी के दौरान मौके से बड़े पैमाने पर तैयार सिंथेटिक नशीले पदार्थ, नशीली दवाएं बनाने में प्रयुक्त होने वाला कच्चा माल, कई प्रकार के रासायनिक तत्व और निर्माण से जुड़े आधुनिक उपकरण जब्त किए गए। इस पूरे गैरकानूनी नेटवर्क में संलिप्त पाए जाने पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल है।
मादक पदार्थों के नेटवर्क पर खुफिया प्रहार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संयुक्त छापेमारी को नशीले पदार्थों के खिलाफ जारी राष्ट्रीय जंग में एक उल्लेखनीय और बड़ी कामयाबी बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह सटीक और पुख्ता खुफिया इनपुट के आधार पर तैयार की गई योजना का परिणाम है। सरकार मादक पदार्थों की आपूर्ति और निर्माण में सक्रिय ड्रग कार्टेल की जड़ों पर प्रहार करने के लिए संकल्पबद्ध है, ताकि उनके पूरे वित्तीय और वितरण तंत्र को एक साथ समाप्त किया जा सके।
दिसंबर 2029 तक नशा मुक्त भारत का लक्ष्य
केंद्रीय गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशा मुक्त भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए समयबद्ध तरीके से कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत दिसंबर 2029 से पूर्व ऐसे सभी अवैध नेटवर्क और गिरोहों को पूरी तरह ध्वस्त करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पूरी कार्ययोजना नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है, जिसका मूल उद्देश्य अवैध उत्पादन केंद्रों, सीमाओं के पार से होने वाली तस्करी और स्थानीय वितरण पर चौतरफा रोक लगाना है।
सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध उत्पादन के खिलाफ तेज कार्रवाई
आवासीय और औद्योगिक इलाकों की आड़ में छिपाई जाने वाली अवैध सिंथेटिक ड्रग प्रयोगशालाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं। मौजूदा कार्रवाई को देश में सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण तंत्र को तोड़ने की दिशा में बेहद अहम कदम माना जा रहा है। जांच तंत्र का मुख्य जोर खुफिया सूचनाओं को समय रहते कार्रवाई में बदलने और न सिर्फ दवाओं को जब्त करने, बल्कि उनसे जुड़े कच्चे माल के सप्लायरों तक पहुंचने पर है।
केंद्र और राज्यों के बीच साझा समन्वय की आवश्यकता
मादक पदार्थों के खतरे से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत तालमेल को बेहद जरूरी माना जा रहा है। पूर्व में 23 सितंबर को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर भी अमित शाह ने कहा था कि जब तक केंद्र और राज्य सरकारों के सभी विभाग 2029 तक नशा मुक्त भारत के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए एकजुट होकर काम नहीं करते, तब तक निर्णायक परिणाम तक पहुंचना संभव नहीं होगा। इसी साझा रणनीति के तहत देश भर में अवैध प्रयोगशालाओं की लगातार पहचान की जा रही है।



















