दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की गई लक्ष्मी योजना के लिए पंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की वित्तीय सहायता प्रदान की जानी है। हालांकि, इस आर्थिक मदद को प्राप्त करने के लिए निर्धारित की गई मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी में सामान्य कागजी औपचारिकताओं से कहीं आगे बढ़कर कई कड़े और असामान्य नियम शामिल किए गए हैं। आमतौर पर किसी भी कल्याणकारी योजना में बुनियादी पहचान प्रमाण और आय से जुड़े दस्तावेज मांगे जाते हैं, परंतु इस कार्यक्रम के अंतर्गत परिवार के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को पात्रता का सीधा आधार बनाया गया है।
परिवार के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण और बेटियों के लिए विशेष वैक्सीन
योजना के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, आवेदन करने वाली महिला के परिवार में मौजूद सभी बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं, यदि परिवार में 14 वर्ष से अधिक आयु की बेटियां हैं, तो उनके लिए ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी एचपीवी का टीका लगा होना भी आवश्यक पात्रता में शामिल है। भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास में टीकाकरण सामान्यतः स्वैच्छिक रहा है, यहाँ तक कि महामारी के दौरान भी इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं बनाया गया था। ऐसे परिदृश्य में किसी नकद हस्तांतरण वाली सरकारी योजना को सीधे बच्चों के टीकाकरण कार्ड से जोड़ना एक बेहद अनूठा प्रयोग माना जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक अभियानों की ऑनलाइन शपथ
आर्थिक सहायता हासिल करने के लिए आवेदकों को केवल स्वास्थ्य संबंधी नियमों का ही पालन नहीं करना है, बल्कि नागरिक और पर्यावरणीय दायित्वों से जुड़ी औपचारिकताएं भी निभानी होंगी। एसओपी के दिशा-निर्देशों के तहत फॉर्म भरते समय महिलाओं को कुछ प्रमुख राष्ट्रीय और सामाजिक अभियानों के समर्थन में ऑनलाइन प्रतिज्ञा लेनी होगी। इन संकल्पों में 'एक पेड़ माँ के नाम' मुहिम, स्वच्छ भारत अभियान और सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह बंद करने जैसी पहल शामिल हैं। इन डिजिटल शपथों को पूरा किए बिना आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी।
व्यक्तिगत डेटा साझा करने की बिना शर्त मंजूरी
इस योजना में शामिल होने के लिए गोपनीयता से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियम भी तय किया गया है। आवेदन करने वाली महिलाओं को अपना व्यक्तिगत डेटा अन्य संबंधित प्राधिकरणों, बैंकिंग भागीदारों और संबद्ध हितधारकों के साथ साझा करने की बिना शर्त सहमति प्रदान करनी होगी। आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार, इस पूरे डेटा को साझा करने का प्राथमिक उद्देश्य योजना के सही संचालन, लाभार्थी सत्यापन, निरंतर निगरानी और समग्र मूल्यांकन को सुनिश्चित करना है।
सत्यापन प्रक्रिया को लेकर बने हुए हैं सवाल
नियमों की लंबी सूची तय किए जाने के बावजूद पात्रता के व्यावहारिक सत्यापन को लेकर कई व्यावहारिक संशय बने हुए हैं। मानक संचालन प्रक्रिया में अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रशासनिक स्तर पर बच्चों के टीकाकरण की पुष्टि किस माध्यम से की जाएगी। क्या संबंधित अधिकारियों को बच्चों का पारंपरिक पीला टीकाकरण कार्ड भौतिक रूप से दिखाना होगा, या फिर डिजिटल पोर्टल पर केवल आवेदक के स्व-हस्ताक्षरित घोषणापत्र को ही अंतिम प्रमाण माना जाएगा, इस पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।



















