अमेठी जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए स्वयं सहायता समूह एक मजबूत जरिया बन रहे हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद और अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सामने आने वाली वित्तीय बाधाओं को दूर करना और उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर देना है।
समूह से जुड़ने की पात्रता और आवश्यक दस्तावेज
स्वयं सहायता समूह का हिस्सा बनने के लिए प्रक्रिया बेहद सरल रखी गई है। इस योजना से जुड़ने वाली महिला की उम्र 18 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी अनिवार्य है। इसके अलावा आवेदन करने वाली महिला की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कम से कम आठवीं पास होनी चाहिए।
किसी भी बेरोजगार महिला को समूह गठित करने या उसमें शामिल होने के लिए कम से कम 10 महिलाओं का एक समूह तैयार करना होता है। प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। इसमें शामिल हैं
- आवेदन करने वाली महिला का आधार कार्ड
- PAN कार्ड
- बैंक पासबुक की प्रति
- समूह के लिए न्यूनतम 10 महिला सदस्यों का चयन
इन क्षेत्रों में शुरू किए जा सकते हैं रोजगार
समूह के माध्यम से महिलाएं अपनी रुचि और कौशल के अनुसार विभिन्न प्रकार के लघु उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए कई कार्य विकल्पों को शामिल किया गया है।
महिलाएं निम्नलिखित प्रमुख व्यवसायों को चुनकर अपनी कमाई शुरू कर सकती हैं
- मूंज क्राफ्ट और हस्तशिल्प निर्माण
- घरेलू उत्पाद और खाद्य सामग्री का निर्माण
- सिलाई तथा कढ़ाई का कार्य
- खिलौना निर्माण उद्योग
- कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियां
- बैंक सखी और समूह सखी के रूप में सेवा
- प्रेरणा कैंटीन का संचालन
बिना गारंटी और ब्याज मुक्त 5 लाख का ऋण
आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं को नया काम शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस ऋण की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी भी प्रकार की गारंटी देने की आवश्यकता नहीं होती है और यह पूरी तरह से ब्याज मुक्त होता है। इसके साथ ही स्वीकृत राशि पर लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की छूट या अनुदान भी दिया जाता है, जिससे महिलाओं को व्यवसाय स्थापित करने में बड़ी सहूलियत मिलती है।
प्रशिक्षण और जागरूकता से बन रही हैं स्वावलंबी
जिला विकास अधिकारी वीरभानू सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के अनेक अवसर मिल रहे हैं और वर्तमान समय में महिलाएं विभिन्न गतिविधियों से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा, "समूह के जरिए महिलाएं विभिन्न बेहतर काम कर अच्छी कमाई कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।" प्रशासनिक स्तर पर महिलाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें जागरूक बनाकर स्वावलंबी बनाने का प्रयास जारी है।



















