खरीफ सीजन के दौरान मौसमी अनिश्चितताओं और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिम को देखते हुए रामपुर जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण की समयसीमा बढ़ा दी गई है। क्षेत्र के खेतों में इस समय फसलें लहलहा रही हैं, लेकिन अचानक बेमौसम बारिश, जलभराव, ओलावृष्टि या कीटों के हमले से फसलों के नष्ट होने की संभावना बनी रहती है। किसानों को इस संभावित आर्थिक क्षति से बचाने के लिए प्रशासन ने ऋणी किसानों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है। इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो बैंक ऋण के माध्यम से खेती कर रहे हैं और किसी कारणवश अब तक अपनी फसल का बीमा नहीं करा सके थे।
किसान क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए 24 अगस्त की अहम समयसीमा
योजना के तहत किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC धारक पात्र ऋणी किसानों के लिए एक विशेष प्रावधान लागू किया गया है। नियम के मुताबिक यदि कोई ऋणी किसान अपनी फसल का बीमा नहीं कराना चाहता है, तो उसे 24 अगस्त तक अपनी संबंधित बैंक शाखा में जाकर लिखित रूप से ऑप्ट-आउट आवेदन जमा करना अनिवार्य है। यदि किसान इस निर्धारित तिथि तक बैंक में अपना लिखित आवेदन प्रस्तुत नहीं करता है, तो बैंक नियमानुसार उसके खाते से तय प्रीमियम राशि काटकर फसल का बीमा स्वतः कर देगा। इसलिए जो किसान योजना का हिस्सा नहीं बनना चाहते, उन्हें 24 अगस्त से पहले बैंक में सूचना देना आवश्यक है।
व्यापक प्राकृतिक आपदाओं और कीट-रोगों से सुरक्षा कवच
अक्सर देखा जाता है कि किसान फसल बीमा को केवल बाढ़ या सूखे जैसी भीषण आपदाओं तक सीमित मानते हैं, लेकिन यह योजना इससे कहीं व्यापक सुरक्षा प्रदान करती है। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सूखा, भारी जलभराव, ओलावृष्टि, चक्रवाती तूफान, आकाशीय बिजली, अचानक फैली बीमारियां और कीट-रोगों से खड़ी फसल को पहुंचे नुकसान की पूरी भरपाई योजना के तहत की जाती है। यह बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र किसानों की मेहनत और लागत को डूबने से बचाता है।
बुवाई में बाधा और फसल चक्र के बीच में नुकसान पर मुआवजा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसल की बुवाई प्रभावित होने से लेकर कटाई तक के हर चरण को शामिल किया गया है। यदि प्रतिकूल मौसम के कारण किसान अपने खेतों में बुवाई ही न कर पाएं, तो भी सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा, बुवाई के लगभग एक महीने बाद से लेकर कटाई के 15 दिन पहले तक की अवधि में यदि मौसम की मार से संभावित उपज में 50 प्रतिशत से अधिक का नुकसान दर्ज किया जाता है, तो किसानों को मध्य-सीजन आपदा प्रावधानों के अंतर्गत क्षतिपूर्ति सहायता प्रदान की जाती है।
स्थानीय आपदाएं और कटाई के बाद 14 दिनों का सुरक्षा कवर
सामान्य आपदाओं के अतिरिक्त यह योजना स्थानीय स्तर पर होने वाले नुकसान को भी कवर करती है। खेत में खड़ी फसल को ओलावृष्टि, भूस्खलन, बादल फटने, जलभराव या बिजली गिरने से आग लगने जैसे कारणों से नुकसान पहुंचता है, तो किसान व्यक्तिगत आधार पर भी दावे प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके साथ ही, कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी गई फसल को भी सुरक्षा मिलती है। यदि कटाई के बाद 14 दिनों के भीतर ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश या चक्रवाती वर्षा से खेत में रखी फसल खराब होती है, तो उसका मुआवजा भी बीमा कंपनी द्वारा दिया जाता है।
रामपुर जिले के लिए बीमा कंपनी, बीमित राशि और प्रीमियम दरें
खरीफ 2026 के लिए रामपुर जिले की अधिसूचित फसलों का बीमा करने हेतु इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को अधिकृत किया गया है। कृषि विभाग द्वारा जिले की प्रमुख फसलों के लिए बीमित राशि और प्रीमियम की दरें पारदर्शी रूप से निर्धारित की गई हैं।
- धान: बीमित राशि 86,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है, जिसके लिए किसान को 1,720 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रीमियम देना होगा।
- उड़द: बीमित राशि 59,300 रुपये प्रति हेक्टेयर है और इसका प्रीमियम 1,186 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित है।
- बाजरा: बीमित राशि 29,700 रुपये प्रति हेक्टेयर रखी गई है, जिसके प्रीमियम के रूप में 594 रुपये प्रति हेक्टेयर का भुगतान करना होगा।
ऋणी बनाम गैर-ऋणी किसान और प्रशासनिक सलाह
यह योजना ऋणी और गैर-ऋणी दोनों श्रेणियों के किसानों के लिए उपलब्ध है। हालांकि, गैर-ऋणी किसानों के लिए आवेदन करने की अंतिम समयसीमा 14 अगस्त थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। अब केवल ऋणी किसानों के पास 31 अगस्त तक बीमा प्रक्रिया पूरी कराने का अवसर बचा है। उप कृषि निदेशक राम किशन सिंह ने रामपुर के किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना समय रहते अपनी संबंधित बैंक शाखा से संपर्क करें। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी भूमि, फसल विवरण और बैंक खाते से जुड़े सभी कागजात दुरुस्त रखें और बीमा प्रीमियम कटने अथवा जमा होने के बाद उसकी रसीद या प्रमाणपत्र सुरक्षित अपने पास रखें।



















