बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में तीन साल पहले खैनी की एक चुटकी को लेकर हुई तकरार आखिरकार हत्या के आरोप तक जा पहुंची थी। अब इस मामले में बड़ा मोड़ आया है, बगहा व्यवहार न्यायालय ने ठोस सबूतों की कमी के चलते आरोपी कलीमुद्दीन गद्दी को दोषमुक्त करार दे दिया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्र की अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया।
खैनी की एक चुटकी से भड़का था विवाद
पुलिस के मुताबिक यह पूरा मामला जिले के धनहा थाना क्षेत्र के खलवा पट्टी गांव से जुड़ा है, जहां करीब तीन साल पहले एक हत्या हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 4 सितंबर 2023 को नाजिर गद्दी ने धनहा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने अपने 35 वर्षीय बेटे गुलाब गद्दी के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था। शिकायत में बताया गया था कि दोनों पक्षों के बीच झगड़े की जड़ में सिर्फ एक चुटकी खैनी थी, बात इतनी छोटी थी लेकिन देखते ही देखते बड़ी हो गई।
गले पर पेचकस से वार का आरोप, पोस्टमार्टम में पुष्टि नहीं
प्राथमिकी के अनुसार जब यह छोटी सी कहासुनी झगड़े में बदली तो आरोपी कलीमुद्दीन ने कथित तौर पर गुलाब गद्दी के गले पर पेचकस से वार कर दिया था। इसी वार को लेकर मामला हत्या की धारा में दर्ज हुआ और पुलिस ने कलीमुद्दीन को आरोपी बनाया। हालांकि जांच के दौरान हुए पोस्टमार्टम में गले पर पेचकस से हमले की पुष्टि नहीं हो पाई, जिसने शुरुआत से ही अभियोजन के केस को कमजोर कर दिया था।
सुनवाई में कई गवाह अपने बयान से पलटे
अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई तो अभियोजन पक्ष के लिए राह आसान नहीं रही। सुनवाई के दौरान कई गवाह अपने पहले दर्ज कराए गए बयानों से मुकर गए, जबकि कुछ गवाह पूरी तरह पक्षद्रोही घोषित हो गए। नतीजा यह हुआ कि अदालत के सामने आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश ही नहीं हो सके। सबूतों की इसी कमी को आधार बनाते हुए अदालत ने कलीमुद्दीन गद्दी को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया।
तीन साल जेल में बिताने के बाद मिली रिहाई
हत्या के इस मामले में कलीमुद्दीन गद्दी को करीब तीन साल तक जेल में बंद रहना पड़ा। अदालत का फैसला आने के बाद अब उसे रिहाई मिल गई है। कोर्ट ने साफ किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने लायक सबूत जुटाने में नाकाम रहा, इसी वजह से फैसला आरोपी के पक्ष में गया। वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोग अब जांच एजेंसी और पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठा रहे हैं, उनका कहना है कि अगर जांच शुरू से मजबूत होती तो शायद नतीजा कुछ और होता।





















