गया स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान यानी बिपार्ड में चल रहे 70वीं बीपीएससी बैच के प्रशिक्षण में अनुशासन का एक मामला सामने आया है, जिसमें एक प्रशिक्षु को बीच ट्रेनिंग में ही बाहर कर दिया गया है। जिला समादेष्टा समूह-4 में तैनात प्रशिक्षु रोहित आनंद को संस्थान ने बिहार सरकार सेवक आचरण नियमों के उल्लंघन और कथित दुर्व्यवहार का दोषी मानते हुए प्रशिक्षण से विरमित कर दिया। यह फैसला संस्थान की ओर से 5 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
मोबाइल फोन को लेकर हुआ पूरा विवाद
घटना 31 अगस्त की है, जब बैच का चौथा CFC/CIC मॉक टेस्ट कराया जा रहा था। इसी परीक्षा के दौरान रोहित आनंद पर मोबाइल फोन अपने पास रखने और उसका उपयोग करने का आरोप लगा। परीक्षा हॉल की निगरानी कर रहे आईटी फैकल्टी दीपक वर्मा ने इसे संस्थान के नियमों का सीधा उल्लंघन बताते हुए मामला दर्ज कराया। बताया गया कि जब रोहित आनंद से मोबाइल जमा करने के लिए कहा गया, तो उन्होंने फोन देने से इनकार कर दिया। इसी बहस के दौरान फैकल्टी के साथ उनके व्यवहार को भी अनुचित और अशिष्ट माना गया, जिसे संस्थान ने शिष्टाचार के उल्लंघन के तौर पर देखा।
ट्रेनिंग की शुरुआत में ही बता दिए गए थे सख्त नियम
बिपार्ड प्रशासन के मुताबिक, यह कोई अनजाने में हुई चूक नहीं थी। संस्थान का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होते ही सभी चुने हुए प्रशिक्षुओं को संस्थान की एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया और अनुशासन से जुड़े नियमों की पूरी जानकारी दी जा चुकी थी। संस्थान की डिसिप्लिन मैनुअल में साफ लिखा है कि कक्षा के भीतर या परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित है। घटना को साबित करने के लिए संस्थान के पास संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है। मामला सामने आने के बाद रोहित आनंद से लिखित रूप में अपनी बात रखने और सफाई देने को भी कहा गया था।
जांच रिपोर्ट के बाद हुई अंतिम कार्रवाई
बिपार्ड ने बताया कि रोहित आनंद की ओर से दी गई लिखित सफाई, सीसीटीवी फुटेज और जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों की बारीकी से समीक्षा की गई। इस पूरी प्रक्रिया के बाद संस्थान इस नतीजे पर पहुंचा कि उन पर लगे आरोप शुरुआती तौर पर सही साबित होते हैं, जबकि उनकी सफाई को संतोषजनक नहीं माना गया। प्रशिक्षण दल में शामिल यंग प्रोफेशनल शुभम मिश्रा ने भी अपनी अलग जांच रिपोर्ट में इन्हीं आरोपों की पुष्टि की। इन सभी बिंदुओं को आधार बनाते हुए बिपार्ड ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता और मिसकंडक्ट का मामला करार दिया और रोहित आनंद को प्रशिक्षण से हटाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया।



















