बिहार की राजधानी पटना के कई इलाके इन दिनों बाढ़ की भयंकर विभीषिका झेल रहे हैं। पटना के दीघा स्थित बिंद टोली में गंगा नदी का पानी आवासीय इलाकों में भर जाने के कारण लगभग 1500 परिवार पूरी तरह बेघर हो गए हैं। हालात यह हैं कि ये सभी पीड़ित परिवार अब जेपी गंगा पथ के किनारे पॉलीथिन और त्रिपाल के सहारे टेंट लगाकर गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2026 में बिहार सरकार ने जेपी सेतु के निर्माण कार्य के चलते इन परिवारों को उनकी पुरानी जमीन के बदले इस जगह पर बसाया था। हालांकि, यह इलाका सड़क की सतह से काफी नीचा है और गंगा नदी के बिल्कुल करीब स्थित है, जिस वजह से जलस्तर में थोड़ी भी बढ़ोतरी होते ही हर साल यहां पानी भर जाता है।
थर्मोकोल की नाव बनी लाइफलाइन और प्रशासन पर उठे सवाल
बिंद टोली के अधिकांश घरों के भीतर तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है, जिससे लोगों का कीमती घरेलू सामान और राशन पानी में डूब गया है। स्थानीय निवासी किसी तरह अपना थोड़ा-बहुत बचा हुआ सामान लेकर मुख्य सड़क पर पहुंचे और वहीं तंबू गाड़कर रहने लगे। प्रभावित लोगों का आरोप है कि सरकार की ओर से भोजन की जो व्यवस्था की गई है, वह काफी विलंब से पहुंचता है और खाने की गुणवत्ता भी बेहद खराब है। जिन लोगों के मकान थोड़े ऊंचे स्थान पर बने हैं, उनके घरों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। ऐसे में आवागमन के लिए स्थानीय लोगों ने खुद ही थर्मोकोल के टुकड़ों से देसी जुगाड़ वाली नाव तैयार की है, जिसके सहारे वे लोग किसी तरह मुख्य सड़क तक आ-जा पा रहे हैं।
गांधी घाट पर गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड
पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर बढ़कर 50.57 मीटर के खतरे के निशान को पार कर गया है, जिसने साल 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम जलस्तर के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है। इस आपदा से पूरे बिहार के 12 जिलों के 70 प्रखंड और कुल 368 पंचायतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जहां दूर-दूर तक बाढ़ का पानी फैला हुआ है। गंगा के अलावा पुनपुन, गंडक, कोसी और बागमती जैसी कई अन्य नदियां भी राज्य में कई जगहों पर लाल निशान यानी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं।
बिहार के कई जिलों में तबाही का मंजर
लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सूबे की प्रमुख नदियां उफान पर हैं और सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पटना जिले में ही पुनपुन नदी का पानी खतरे के स्तर से ऊपर बहने के बाद कई नए इलाकों में फैल गया है। इसके अलावा वैशाली जिले के हाजीपुर में भी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से कई घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। मुंगेर जिले की बात करें तो वहां गंगा नदी पहले ही खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं और नदी के बढ़ते पानी के साथ स्थानीय नागरिकों की मुसीबतें भी बढ़ती जा रही हैं।



















