बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। तस्कर कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए आए दिन परिवहन के नए और अनोखे हथकंडे अपनाते रहते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बीते 10 सालों में राज्य के भीतर 5.13 करोड़ लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त की जा चुकी है और 17 लाख से अधिक लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ताजा मामले में, उत्पाद विभाग की टीम ने मुजफ्फरपुर जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मैथी टोल प्लाजा के पास पकड़े गए एक राजस्थान रजिस्टर्ड कंटेनर से भारी मात्रा में पंजाब निर्मित शराब जब्त की गई है।
लोहे की चादर और खाली कैरेट की आड़ में खेल
तस्करों ने जांच एजेंसियों और स्कैनर मशीनों को धोखा देने के लिए इस वाहन में खास इंतजाम कर रखे थे। उत्पाद अधिकारियों की जांच में यह बात सामने आई कि कंटेनर के पिछले हिस्से के दोनों किनारों पर मोटी लोहे की चादरें वेल्ड की गई थीं। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि बॉर्डर पर लगाई जाने वाली हैंड स्कैनर मशीनों की पकड़ से अंदर छिपाई गई खेप बच सके। इसके अलावा, अवैध शराब के 375 कार्टनों को ऊपर से खाली कैरेटों की आड़ में छिपाकर रखा गया था। इन कार्टनों को खाली कैरेटों के नीचे एक विशेष चैंबर बनाकर इस तरह व्यवस्थित किया गया था कि वाहन के चलने पर किसी भी तरह की संदिग्ध आवाज न आए और किसी को भी शक न हो सके।
टोल प्लाजा के पास संदिग्ध हालत में खड़ा था वाहन
उत्पाद विभाग को पहले ही गुप्त सूचना मिल चुकी थी कि पंजाब से भारी मात्रा में अवैध शराब की खेप उत्तर प्रदेश के रास्ते बलिया, सिवान और छपरा होते हुए मुजफ्फरपुर पहुंचने वाली है। इस पुख्ता सूचना के आधार पर एएसआई रंजन कुमार सिंह और अजीत कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने मैथी टोल प्लाजा के पास घेराबंदी की। अधिकारियों के मुताबिक, यह कंटेनर टोल प्लाजा से लगभग 100 मीटर की दूरी पर पहले से ही खड़ा था। चालक लगातार मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रहा था और किसी स्थानीय संपर्क के आने का इंतजार कर रहा था। जब तय समय तक कोई व्यक्ति वहां नहीं पहुंचा और काफी देर तक वाहन वहीं खड़ा रहा, तो उत्पाद विभाग की टीम ने उसकी तलाशी लेने का फैसला किया।
रात में होनी थी स्थानीय तस्करों को डिलीवरी
उत्पाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार राम ने जानकारी दी कि इस खेप की डिलीवरी रात के अंधेरे में स्थानीय स्तर के तस्करों को की जानी थी। चालक को स्पष्ट निर्देश मिले थे कि वह पूरे दिन कंटेनर को उसी स्थान पर खड़ा रखे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान वाहन के चालक और कंडक्टर को मौके से ही हिरासत में ले लिया गया। पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान हरियाणा के रहने वाले कुलदीप (चालक) और रामचरण (कंडक्टर) के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान कुछ स्थानीय तस्करों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश देने की तैयारी चल रही है।
उत्पाद अधिनियम के तहत कानूनी शिकंजा
विभाग ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के खिलाफ उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बिहार में पिछले एक दशक में शराबबंदी कानूनों के तहत व्यापक स्तर पर जब्ती और गिरफ्तारियां हुई हैं। पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीमें अब इस पूरे तस्करी नेटवर्क की तह तक जाने के लिए काम कर रही हैं ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों को भी कानून के दायरे में लाया जा सके।





















