बिहार के सारण जिले में गंडक नदी की विनाशकारी बाढ़ के बीच एक दुखद दुर्घटना सामने आई है। अमनौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत परशुरामपुर गांव में शुक्रवार दोपहर हवाई मार्ग से राहत सामग्री गिराने के दौरान एक व्यक्ति की जान चली गई। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब हेलीकॉप्टर से भोजन और राहत के पैकेट नीचे गिराए जा रहे थे, तभी एक भारी पैकेट सीधे 58 वर्षीय ग्रामीण पर आ गिरा। इस अप्रत्याशित हादसे में ग्रामीण गंभीर रूप से चोटिल हो गया और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
मृतक ग्रामीण की पहचान परशुरामपुर गांव के ही निवासी अनिल कुमार सिंह के रूप में की गई है। मढ़ौरा के अनुमंडल पुलिस अधिकारी सबिंद्र कुमार दास ने पूरी घटना का ब्योरा देते हुए स्पष्ट किया कि यह दुर्घटना शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे एक स्थापित राहत शिविर के पास घटित हुई। शुरुआती बयानों और प्राथमिक सूचना के आधार पर यह बात सामने आई है कि हेलीकॉप्टर से तेजी से नीचे गिरे राशन पैकेट के सिर पर लगने से व्यक्ति की जान गई। पुलिस प्रशासन ने शव को अपने कब्जे में लेकर विधिवत पोस्टमार्टम कराने के लिए अस्पताल भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं और मौत के सटीक चिकित्सकीय कारणों की अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही हो पाएगी।
हवा के भारी दबाव से टिन शेड उड़ा, महिला भी चोटिल
इस हादसे को लेकर अमनौर थाना प्रभारी विमलेश कुमार ने स्थानीय ग्रामीणों के हवाले से बताया कि व्यक्ति की मौत राहत सामग्री का पैकेट ऊपर से गिरने की वजह से हुई। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रारंभिक मुआयने में मृतक के सिर अथवा शरीर के किसी अन्य हिस्से पर चोट के बहुत गहरे या स्पष्ट बाहरी निशान नहीं मिले हैं, इसलिए पोस्टमार्टम की जांच रिपोर्ट बेहद अहम होगी। इसी राहत अभियान के दौरान गांव में एक दूसरी अप्रिय घटना भी दर्ज की गई। थाना प्रभारी ने जानकारी दी कि राहत सामग्री गिराने के लिए हेलीकॉप्टर काफी नीचे उड़ान भर रहा था, जिसके चलते उसके रोटर की तेज हवा और दबाव से एक टिन शेड उखड़कर दूर जा गिरा। इस उड़ते हुए शेड की चपेट में आने से पास मौजूद एक स्थानीय महिला के पैर में हल्की चोट लग गई। मौके पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा प्राथमिक उपचार दिए जाने के बाद महिला की शारीरिक स्थिति स्थिर और सामान्य बताई गई है।
तटबंध कटने से नए क्षेत्रों में तबाही, राष्ट्रीय राजमार्ग जलमग्न
सारण जिले में जलस्तर लगातार बढ़ने के पीछे गंडक नदी का भीषण रूप है। शुक्रवार को गंडक नदी के तटबंध में दरार आने और टूटने के कारण बाढ़ का तेज बहाव जिले के कई नए रिहायशी और मैदानी इलाकों में तेजी से फैल गया। इस आपदा की सीधी मार यातायात संपर्क पर भी पड़ी है। छपरा से मुजफ्फरपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 722 पर लगभग 3 से 4 किलोमीटर का लंबा दायरा पूरी तरह जलमग्न हो चुका है, जिससे आवागमन ठप पड़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह संकट मकेर प्रखंड के हैजलपुर में सुरक्षा बांध के क्षतिग्रस्त होने और टूटने के बाद पैदा हुआ है। खेतों, रिहायशी बस्तियों, घरों और मुख्य सड़कों के जलमग्न होने के बाद प्रशासन ने जमीनी स्तर पर बचाव और राहत अभियानों की गति काफी तेज कर दी है।
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि सारण जिले में स्थिति को संभालने के लिए एनडीआरएफ की 12 और एसडीआरएफ की 7 समर्पित टीमें तैनात की गई हैं। जैसे ही पानी नए रिहायशी इलाकों में दाखिल हुआ, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बेतिया, गोपालगंज, भागलपुर, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर और पूर्वी चंपारण जैसे पड़ोसी जिलों से भी अतिरिक्त बचाव दल तुरंत सारण रवाना किए गए हैं।
उत्तर बिहार की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी देश नेपाल और उत्तर प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश होने के बाद गंडक, गंगा, कोसी, बागमती और घाघरा नदियों का जलस्तर कई स्थानों पर लाल निशान यानी खतरे के स्तर से काफी ऊपर बह रहा है। जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस नाजुक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि गंडक नदी के अभूतपूर्व उफान के चलते सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, वैशाली, सुपौल और पटना समेत कई जिलों के तटबंधों पर पानी का अत्यधिक दबाव बन गया है। कुछ बेहद संवेदनशील स्थानों पर नदी के बाएं और दाएं, दोनों ओर बने तटबंधों पर भारी कटाव और दबाव की स्थिति बनी हुई है, जहां जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीमें लगातार निगरानी रख रही हैं।
वायुसेना के हेलीकॉप्टरों और दर्जनों नावों से चल रहा बचाव कार्य
बाढ़ के पानी से घिरे सुदूर ग्रामीण इलाकों तक मदद पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर हवाई और जल अभियान चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से अब तक 3,000 से ज्यादा राशन पैकेट हवाई मार्ग से गिराकर जरूरतमंदों तक पहुंचाए जा चुके हैं। जमीन और पानी पर मोर्चा संभालते हुए एनडीआरएफ की 12 टीमों में शामिल 360 प्रशिक्षित जवान 50 से अधिक आधुनिक नावों की मदद से लगातार लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा रहे हैं। इसके साथ ही एसडीआरएफ की टीमों के 140 से ज्यादा प्रशिक्षित जवान 36 से अधिक नावों के सहारे राहत और बचाव कार्यों में मुस्तैदी से जुटे हैं। पूरे राज्य से राहत सामग्री, सूखा राशन और जरूरी दवाएं लगातार सारण जिले में भेजी जा रही हैं। जिला प्रशासन पल-पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरी सेवाओं की बहाली के लिए समन्वय स्थापित कर रहा है।
दूसरी ओर, मुजफ्फरपुर जिले के पश्चिमी इलाकों में भी गंडक नदी के उफान ने हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। जिले के पारू प्रखंड स्थित चक्की सुहागपुर थाना परिसर में तीन फीट से ज्यादा बाढ़ का पानी घुस चुका है। इस थाने में प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसके चलते पुलिसकर्मियों और अपनी शिकायतें दर्ज कराने आने वाले फरियादियों को नाव पर सवार होकर थाने तक पहुंचना पड़ रहा है। प्रभावित ग्रामीण इलाकों में पुलिस के जवान गश्त भी नावों के जरिए ही कर रहे हैं।





















