असंतुलित दिनचर्या और पोषण की कमी के चलते कम उम्र के लोग भी अब घुटनों की तकलीफ और जोड़ों की सूजन का सामना कर रहे हैं। इस तरह की शारीरिक परेशानियों से निपटने के लिए पारंपरिक खानपान और घरेलू नुस्खे बेहद कारगर साबित होते हैं। दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के क्षेत्रों में लंबे समय से बनाई जाने वाली हड़जोड़ की चटनी ऐसा ही एक पारंपरिक व्यंजन है, जिसे स्वास्थ्य और स्वाद दोनों के लिहाज से काफी फायदेमंद माना जाता है। इस वनस्पति को आयुर्वेद में अस्थिसंहारक के नाम से जाना जाता है, जिसका सीधा मतलब हड्डियों को मजबूत करने और उन्हें सहारा देने वाला तत्व होता है। इसमें प्राकृतिक फाइबर के साथ भरपूर मात्रा में कैल्शियम मौजूद रहता है।
शारीरिक मजबूती और जोड़ों की देखभाल में उपयोग
बुजुर्गों की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आहार में हड़जोड़ को नियमित और संतुलित मात्रा में शामिल किया जाए, तो जोड़ों की सूजन, दर्द और हड्डियों का खोखलापन दूर करने में सहायता मिलती है। पुरानी चिकित्सा पद्धतियों का मानना है कि इसके नियमित उपयोग से शरीर को इतनी ऊर्जा और मजबूती मिलती है कि इंसान भारी शारीरिक श्रम भी बिना थके आसानी से कर सकता है। हालांकि, इसे रसोई में इस्तेमाल करने से पहले कुछ जरूरी सावधानियों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है।
बनाने से पहले त्वचा की सुरक्षा और तैयारी
हड़जोड़ को काटने और छीलने के दौरान त्वचा में हल्की खुजली या जलन होने की संभावना रहती है। इसलिए इसे छूने या साफ करने से पहले हाथों पर तिल या सरसों का तेल अच्छी तरह लगा लेना चाहिए, जिससे इसका प्राकृतिक रस त्वचा को प्रभावित न करे। जिस प्रकार सहजन की फलियों के रेशे निकाले जाते हैं, ठीक उसी तरह हड़जोड़ के तने के चारों कोनों से रेशे छीलकर अलग किए जाते हैं। इसके बाद इसके कोमल तनों और हरी पत्तियों को बारीक टुकड़ों में काट लिया जाता है।
स्वादिष्ट और पौष्टिक चटनी बनाने की पारंपरिक विधि
इस चटनी को तैयार करने के लिए सबसे पहले एक कड़ाही में सफेद तिल को बिना तेल के सूखा भूनकर अलग रख लिया जाता है। इसके पश्चात कड़ाही में थोड़ा तेल डालकर साबुत धनिया और सूखी लाल मिर्च को हल्का तला जाता है। इसी तेल में कटे हुए हड़जोड़ के टुकड़े और ताजे करी पत्ते डालकर तब तक सेके जाते हैं, जब तक कि उनका रंग हल्का बदल न जाए।
पारंपरिक पोषक तत्व और मूल स्वाद सुरक्षित रखने के लिए इसे सिलबट्टे पर पीसने की परंपरा रही है। सबसे पहले भुने हुए सफेद तिल, लाल मिर्च, हल्दी और नमक को एक साथ बारीक पीसा जाता है। इसके उपरांत भुना हुआ हड़जोड़, कच्चा जीरा, लहसुन की कलियां और पानी में भिगोई गई इमली मिलाकर इसका महीन पेस्ट तैयार कर लिया जाता है। इमली का स्वाभाविक खट्टापन हड़जोड़ के कसैले स्वाद को दबाकर बेहतरीन संतुलन बनाता है। इस तैयार चटनी को भाप में पके गर्म चावल और एक चम्मच देसी घी के साथ खाया जाता है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए एक बेहद सस्ता और प्राकृतिक घरेलू उपाय बनता है।



















