बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए राज्य में एक बड़े राजनीतिक और विकासोन्मुख आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। आगामी 21 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के दौरे पर पहुंचेंगे। राजधानी पटना में इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री को राज्य सरकार के एक सफल वर्ष के उपलक्ष्य में आमंत्रित किया गया है। यह पूरा आयोजन राज्य के ऐतिहासिक जिले वैशाली में संपन्न होगा, जहां केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भविष्य के विकास का खाका जनता के सामने प्रस्तुत करेंगी।
वैशाली में जुटेगा नेतृत्व, जनता के बीच रखी जाएगी रिपोर्ट
वैशाली में आयोजित होने वाला यह भव्य कार्यक्रम केवल एक सामान्य राजनीतिक रैली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एनडीए के साझा शासन की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के एक बड़े मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि 21 नवंबर का दिन बिहार की राजनीति और प्रशासनिक दिशा दोनों के लिए बेहद ऐतिहासिक बनने वाला है। इस सम्मेलन के माध्यम से सरकार अपने बीते एक साल के कामकाज का लेखा-जोखा राज्य की जनता के सामने प्रस्तुत करेगी। शासन के विभिन्न विभागों द्वारा किए गए जनहित के कार्यों, आधारभूत संरचना के विस्तार और प्रशासनिक सुधारों को इस मंच से उजागर किया जाएगा। इसके साथ ही आगामी वर्षों के लिए राज्य के विकास से संबंधित रणनीतियों को भी साझा किया जाएगा।
औद्योगिक निवेश और बड़े समझौतों पर रहेगा विशेष जोर
प्रधानमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे का एक प्रमुख आयाम बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस दौरे के दौरान राज्य के आर्थिक परिदृश्य को बदलने के उद्देश्य से कई बड़े ऐलान किए जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश भर के कई प्रमुख उद्योगपतियों और व्यावसायिक घरानों को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया है। राज्य में निजी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई अहम समझौता ज्ञापनों यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाने की प्रबल संभावना है। सरकार का यह स्पष्ट मानना है कि राज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर आजीविका उपलब्ध कराने के लिए भारी औद्योगिक निवेश को जमीन पर उतारना अनिवार्य है।
बिहार सरकार ने पूर्व में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उसका दीर्घकालिक लक्ष्य नवंबर 2026 तक राज्य में पांच लाख करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश आकर्षित करना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विनिर्माण इकाइयों, सेवा क्षेत्र के प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को आमंत्रित किया जा रहा है। 21 नवंबर को वैशाली में होने वाले एमओयू इसी पांच लाख करोड़ रुपये के विशाल निवेश लक्ष्य की दिशा में एक ठोस और निर्णायक कदम माने जा रहे हैं। जब देश के बड़े उद्योगपति सीधे प्रधानमंत्री और राज्य नेतृत्व की उपस्थिति में समझौतों पर मुहर लगाएंगे, तो इससे अन्य संभावित निवेशकों में भी बिहार के प्रति एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
गठबंधन के भीतर पूर्ण एकजुटता का दावा
हाल के दिनों में संपन्न हुए विधान परिषद चुनाव के नतीजों के पश्चात राजनीतिक गलियारों में एनडीए के घटक दलों के बीच समन्वय को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। इन सभी अटकलों और चर्चाओं पर पूर्ण विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि एनडीए पूरी एकजुटता और दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड समेत गठबंधन के सभी घटक दल कंधे से कंधा मिलाकर प्रधानमंत्री के वैशाली कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने की तैयारियों में जुटे हैं। गठबंधन का यह साझा प्रयास यह साबित करता है कि राजनीतिक स्तर पर किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं है और सभी दल मिलकर राज्य के विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बस्तर में जवानों संग दिवाली मनाने पर प्रधानमंत्री की सराहना
पटना में बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ स्थित बस्तर दौरे का भी विशेष रूप से उल्लेख किया और उनके कदम की मुक्तकंठ से सराहना की। प्रधानमंत्री ने रविवार को बस्तर पहुंचकर सुरक्षा बलों के जवानों और पुलिसकर्मियों के साथ प्रकाश पर्व दिवाली का पावन त्योहार मनाया था। इस कदम की प्रशंसा करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह निरंतर प्रयास रहा है कि वे सीमाओं और दुर्गम इलाकों में मुस्तैद सुरक्षा बलों के बीच पहुंचकर उनका हौसला बढ़ाएं। कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाले जवानों के साथ त्योहार की खुशियां बांटना नेतृत्व की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के सशक्त नेतृत्व और नीतियों के परिणामस्वरूप ही देश ने कई क्षेत्रों को नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त करने का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया है। बस्तर जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में स्वयं पहुंचकर जवानों का अभिनंदन करना पूरे देश और सुरक्षा बलों के लिए गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री ने भी अपने संबोधन में इस बात को रेखांकित किया था कि जो इलाका कभी नक्सलवाद के आतंक और भय के साए में जीता था, वह आज शांति और विकास के नए रास्ते पर मजबूती से अग्रसर है। सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, निस्वार्थ सेवा भावना और सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र हमेशा कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।



















