बिहार के जहानाबाद जिले में आपराधिक तत्वों द्वारा कानून व्यवस्था को एक बार फिर खुली चुनौती दी गई है। अवैध मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त पर लगाम लगाने के उद्देश्य से निषेधात्मक कार्रवाई और छापेमारी के लिए निकले टाइगर मोबाइल के एक जांबाज जवान की तस्करों ने निर्ममता से जान ले ली। इस सनसनीखेज वारदात के दो दिन बाद लापता जवान का शव स्थानीय दरधा नदी से पुलिस ने बरामद किया, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है और स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल बन गया है।
कब और कैसे हुई घटना की शुरुआत
मृतक जवान गुरुवार की देर शाम अवैध धंधे के खिलाफ एक्शन लेने के लिए मौके पर रवाना हुए थे, लेकिन उसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिला और वह लापता हो गए। यह पूरी घटना काको थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नदियावां इलाके के नजदीक की बताई जा रही है। सहकर्मियों और स्थानीय प्रशासन द्वारा उनकी काफी खोजबीन की गई, मगर उनका कुछ पता नहीं चल सका। आखिरकार दो दिन की लंबी मशक्कत के बाद उनका शव दरधा नदी में तैरता हुआ मिला। मृतक जवान धनेश्वर यादव मूल रूप से भोजपुर जिले के आरा के रहने वाले थे और अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभा रहे थे।
शीर्ष अधिकारियों ने संभाली कमान और जांच जारी
इस गंभीर वारदात की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई। पुलिस अधीक्षक (एसपी), अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) और अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) समेत कई बड़े अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए। अधिकारियों ने पूरे इलाके का मुआयना किया और मौके की स्थिति का जायजा लेते हुए इस हत्याकांड की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि स्मैक तस्करों ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है। फिलहाल कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस मामले की तह तक जाने में जुटी हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस हत्या के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और किन मुख्य आरोपियों की क्या भूमिका रही है।



















