बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के चुनाव परिणाम आज सामने आने वाले हैं, जिसको लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक एमएलसी सीटों के साथ-साथ पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन सीटों पर भी मतों की गिनती आज ही की जाएगी। इस बार का चुनाव केवल राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यूनाइटेड) या एनडीए बनाम महागठबंधन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी सभी आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर इस मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है। इसके अलावा, कई सीटों पर कांग्रेस और आरजेडी के बीच भी आपसी खींचतान और सीधी टक्कर देखने को मिल रही है, जिससे चुनावी परिणाम काफी दिलचस्प होने की उम्मीद है।
इन सभी आठ सीटों के लिए मतदान प्रक्रिया 23 अक्टूबर को संपन्न हुई थी और आज यानी 27 अक्टूबर को सुबह ठीक आठ बजे से वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। निर्वाचन आयोग और प्रशासन द्वारा मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। परिसरों के भीतर सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सभी मतगणना केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू कर दी गई है, ताकि मतगणना का कार्य शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जा सके।
इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में आम मतदाता वोट नहीं डालते हैं, बल्कि इसमें वही मतदाता हिस्सा लेते हैं जिनका नाम विशेष स्नातक या शिक्षक मतदाता सूची में दर्ज होता है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदान करने के लिए मतदाता का कम से कम तीन साल पहले ग्रेजुएट होना अनिवार्य होता है। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए यह नियम है कि मतदाता के पास माध्यमिक स्तर या उससे ऊपर के किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में न्यूनतम तीन साल तक पढ़ाने का शिक्षण अनुभव होना चाहिए। इन चुनावों में वीवीपैट या सामान्य बटन वाले ईवीएम का उपयोग नहीं होता है, बल्कि वोटर बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के नाम के आगे अपनी प्राथमिकता के अनुसार 1, 2, 3 लिखकर अपनी पसंद का क्रम दर्ज करते हैं।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र इस बार सबसे ज्यादा चर्चा और राजनीतिक उथल-पुथल का केंद्र बना हुआ है। यहां जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने खुलकर बगावत कर दी थी। अनंत सिंह ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में जोरदार चुनाव प्रचार किया था, जिसके बाद पार्टी ने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया और छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। अब देखना यह है कि इन तमाम राजनीतिक समीकरणों, बगावती तेवरों और त्रिकोणीय संघर्ष के बीच आज आने वाले परिणाम किसके पक्ष में जाते हैं।



















