राजस्थान और गुजरात को आपस में पक्के तौर पर जोड़ने वाली तारंगा हिल-अंबाजी-आबू रोड रेल लाइन परियोजना से क्षेत्र के धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास को एक नई रफ्तार मिलने की पूरी उम्मीद है। राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू को गुजरात के मशहूर शक्तिपीठ अंबाजी और जैन तीर्थ स्थल तारंगा हिल से सीधे रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ने के लिए यह बड़ा काम किया जा रहा है। इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट के तहत कुल 116.65 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन बिछाई जा रही है, जिस पर लगभग 3,050 करोड़ रुपये की कुल लागत आएगी। इस पूरी परियोजना के धरातल पर उतर जाने से अंबाजी मंदिर, तारंगा हिल के जैन मंदिर और आबू रोड के बीच आपसी रेल संपर्क बेहद सुगम हो जाएगा। इसके अलावा, यात्रियों को अहमदाबाद और आबू रोड के पुराने और मौजूदा मार्ग के एक बेहतरीन और सुविधाजनक विकल्प के रूप में नया रास्ता मिल सकेगा।
वरेठा स्टेशन पर तकनीकी काम और आधुनिक स्टेशन डिजाइन
उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल के जन संपर्क निरीक्षक अशोक चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि वरेठा स्टेशन पर नई रेल लाइन को सिगनलिंग कनेक्टिविटी देने का जरूरी काम पूरा कर लिया गया है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न और कमीशन भी किया जा चुका है। अरावली की बेहद कठिन पहाड़ियों और घुमावदार रास्तों के बीच तैयार हो रही इस रेल लाइन परियोजना में कुल 15 नए रेलवे स्टेशन बनाए जाने तय किए गए हैं। इन सभी स्टेशनों में आबू रोड, कुई, सियावा, अंबाजी, सतलासना और तारंगा हिल को मुख्य स्टेशनों के रूप में शामिल किया गया है। इस पूरी परियोजना की सबसे खास बात यह है कि अंबाजी स्टेशन को वहां के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर की थीम के आधार पर सजाया जाएगा, जबकि तारंगा हिल स्टेशन को जैन मंदिर की पारंपरिक और भव्य शैली में डिजाइन किया जाएगा, ताकि ट्रेन से आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की एक अनूठी और सुंदर झलक देखने को मिल सके।
अरावली की पहाड़ियों में विशाल सुरंगे और ऊंचे रेलवे पुल
यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन अपनी बेहतरीन इंजीनियरिंग और आधुनिक निर्माण शैली के कारण देश भर में आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। इस पूरी परियोजना के अंतर्गत अंबाजी के पास स्थित चिखला क्षेत्र में टनल टी-6 का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई 2.27 किलोमीटर है और यह इस पूरे रेल मार्ग की सबसे लंबी सुरंग साबित होगी। इसके साथ ही, पोशीना क्षेत्र के ध्रुवपली के पास 1.83 किलोमीटर लंबी एक और बड़ी सुरंग का निर्माण कार्य चल रहा है। इन सभी सुरंगों को आधुनिक और सुरक्षित तकनीक की मदद से बनाया जा रहा है। राजस्थान और गुजरात की सीमा के बिल्कुल पास स्थित सुरपगला गांव में लगभग 80 मीटर की ऊंचाई पर एक विशाल रेलवे पुल का निर्माण किया जा रहा है, जो इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा। इस पूरे रेल मार्ग पर कुल 54 बड़े और 150 से अधिक छोटे पुल तैयार किए जा रहे हैं, और साथ ही पूरे ट्रैक को पूरी तरह से विद्युतीकृत ट्रेनों के संचालन के अनुकूल बनाया जा रहा है।
व्यापार, कृषि और क्षेत्रीय उद्योगों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इस नई रेल लाइन के शुरू हो जाने के बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अंबाजी और तारंगा हिल की यात्रा करने में अभूतपूर्व सुविधा और आसानी मिलेगी। इसके अलावा, इस क्षेत्र के स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन तथा यहां के दुनिया भर में प्रसिद्ध मार्बल यानी संगमरमर उद्योग को बहुत बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचेगा। रेलवे प्रशासन ने इस पूरी विशाल परियोजना को वर्ष 2026-27 तक हर हाल में पूरा करने का पक्का लक्ष्य निर्धारित किया है, और फिलहाल मैदान पर निर्माण कार्य अत्यंत तीव्र गति के साथ आगे बढ़ रहा है।





















