बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। जेडीयू द्वारा की गई सख्त कार्रवाई के बाद अब अनंत सिंह की पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी पर एक और बड़ा कदम उठाया गया है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पटना स्थित सरकारी आवास खाली करने का आधिकारिक नोटिस थमाया गया है। राज्य सरकार के इस निर्देश के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
मॉल रोड स्थित आवास खाली करने का आदेश
बिहार सरकार की तरफ से पूर्व विधायक नीलम देवी को पटना के मॉल रोड पर स्थित सरकारी आवास को खाली करने का फरमान जारी किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की सदस्यता समाप्त हो जाने के बाद यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है। उन्हें हर हाल में 25 नवंबर 2026 तक इस सरकारी आवास को खाली करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
जेडीयू ने पार्टी से किया है निष्कासित
इससे पहले जनता दल यूनाइटेड यानी जेडीयू ने मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप के चलते छह साल की लंबी अवधि के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता को भी तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया गया है। जेडीयू ने अनंत सिंह को पार्टी से निष्कासित करते हुए उनकी सदस्यता पर भी बड़ा कदम उठाया है।
नेतृत्व के आदेशों की अवहेलना का आरोप
जेडीयू की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि अनंत सिंह ने पार्टी के दिशा-निर्देशों का बिल्कुल पालन नहीं किया। उन पर शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के साथ-साथ विरोधी दल के उम्मीदवार के पक्ष में खुलकर प्रचार करने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
विधान परिषद चुनाव में समर्थन का विवाद
यह पूरा विवाद हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधान परिषद चुनाव से जुड़ा हुआ है। अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था और उनके लिए प्रचार भी किया था। प्रचार के दौरान उन्होंने जेडीयू के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को हराने तक का दावा किया था। पार्टी ने इस आचरण को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए यह सख्त कदम उठाया है।
विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश
पार्टी ने केवल निष्कासन तक ही सीमित न रहते हुए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को भी समाप्त करने की औपचारिक सिफारिश कर दी है। इसके लिए संविधान की 10वीं अनुसूची का विशेष रूप से हवाला दिया गया है जो दल-बदल विरोधी मामलों से जुड़ी होती है। हालांकि, सदस्यता रद्द होने को लेकर अंतिम फैसला नियमानुसार संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा।
मोकामा में परिवार का पुराना राजनीतिक प्रभाव
मोकामा विधानसभा क्षेत्र में अनंत सिंह और उनके पूरे परिवार का लंबे समय से दबदबा और राजनीतिक प्रभाव रहा है। स्थानीय स्तर पर अनंत सिंह को 'छोटे सरकार' के नाम से भी पुकारा जाता है। साल 2022 में एक मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अनंत सिंह की विधायकी चली गई थी, जिसके बाद उनकी राजनीतिक विरासत को उनकी पत्नी नीलम देवी ने आगे बढ़ाया था।
राजनीतिक समीकरणों का बदलता दौर
राष्ट्रीय जनता दल ने साल 2020 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद साल 2022 के उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी मैदान में उतरीं और चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं। हालांकि, साल 2024 आते-आते नीलम देवी ने एनडीए का दामन थाम लिया था। राजनीतिक हलकों में माना जाता है कि उन्होंने यह फैसला अपने पति की सहमति से ही लिया था।



















