तमिलनाडु की चुनावी राजनीति में धारापुरम विधानसभा उपचुनाव के प्रचार अभियान के दौरान जुबानी जंग ने एक तीखा मोड़ ले लिया है। डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन द्वारा टीवीके उम्मीदवार सत्यभामा को लेकर की गई एक टिप्पणी पर भारी राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने गंभीर आरोप लगाया है कि चुनावी रैली के दौरान स्टालिन ने उनकी महिला प्रत्याशी के शारीरिक रूप-रंग का बेहद अशोभनीय अंदाज में उपहास उड़ाया। यह टकराव केवल जुबानी बयानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के कानूनी दल ने तुरंत कदम उठाते हुए चुनाव आयोग और स्थानीय पुलिस के पास औपचारिक शिकायतें दर्ज करा दी हैं। इसके तुरंत बाद टीवीके के शीर्ष नेता विजय ने सोशल मीडिया पर आकर डीएमके नेतृत्व के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया और पार्टी की राजनीतिक संस्कृति पर तीखे सवाल उठाए।
धारापुरम की चुनावी रैली से उपजा विवाद
इस पूरे राजनीतिक टकराव की शुरुआत धारापुरम में शुक्रवार को आयोजित डीएमके की चुनावी जनसभा के दौरान हुई। टीवीके के अनुसार, इसी जनसभा में मंच से बोलते हुए स्टालिन ने उनकी प्रत्याशी सत्यभामा को निशाना बनाया और उनके रंग-रूप पर अनुचित टिप्पणी की। इस बयान के सामने आते ही टीवीके खेमे में तीव्र रोष फैल गया। प्रारंभिक तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री निर्मल कुमार ने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया कि इस अशोभनीय आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत ले जाई जाएगी। कुछ ही समय में पार्टी के अधिवक्ताओं के एक आधिकारिक दल ने चुनाव आयोग के दफ्तर और पुलिस प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायत सौंप दी। इस शिकायत में स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया गया कि एक महिला उम्मीदवार के शारीरिक स्वरूप को लेकर सार्वजनिक मंच से अपमानजनक बातें कही गई हैं, जो चुनावी आचार संहिता और सामान्य मर्यादा का खुला उल्लंघन है।
विजय का डीएमके नेतृत्व पर सीधा हमला
मामले के तूल पकड़ते ही टीवीके प्रमुख विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा और आक्रामक वक्तव्य जारी किया। उन्होंने कहा कि धारापुरम विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार की आड़ लेकर डीएमके ने एक मानहानिकारक और अमर्यादित सभा का आयोजन किया। विजय ने आरोप लगाया कि स्टालिन ने धारापुरम से टीवीके की उम्मीदवार सत्यभामा की शारीरिक बनावट का सरेआम मजाक उड़ाया और इस अशिष्ट व्यवहार को प्रदर्शित करते हुए मंच पर प्रसन्नता भी जाहिर की। अपनी प्रतिक्रिया में विजय ने डीएमके पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि यह संगठन राजनीति में अश्लीलता और दुर्भावना को लगातार बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि स्टालिन ने इस तरह की बातें कहकर अपने कथित आचरण को खुद ही उजागर कर दिया है।
महिला सम्मान के सवाल पर सियासी घेराबंदी
अपने वक्तव्य में विजय ने महिलाओं के प्रति राजनीतिक दलों के नजरिए को लेकर भी डीएमके को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के बारे में अशोभनीय और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना डीएमके की राजनीतिक कार्यशैली की एक पुरानी आदत बन चुकी है। विजय ने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर उपस्थित महिलाओं के सामने ही किसी दूसरी महिला पर इस तरह की ओछी टिप्पणी करना बेहद आपत्तिजनक और असहनीय है। उन्होंने विश्वास जताया कि तमिलनाडु की जागरूक जनता और विशेष रूप से धारापुरम के मतदाता इस तरह की भाषा शैली का उचित जवाब देंगे। खुद को राज्य की महिलाओं का बेटा और भाई बताते हुए विजय ने डीएमके की इस कार्यशैली की कड़े शब्दों में भर्त्सना की और इसे राज्य की अस्मिता पर चोट बताया।
उपचुनाव की लड़ाई अब कानूनी गलियारों में
टीवीके के कानूनी प्रकोष्ठ द्वारा पुलिस और चुनाव आयोग में शिकायत दाखिल किए जाने के बाद यह चुनावी तकरार अब औपचारिक प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आ चुकी है। इससे पहले जब निर्मल कुमार ने इस मामले में दखल देने की बात कही थी, तब से ही राजनीतिक विश्लेषक मान रहे थे कि टीवीके इसे एक बड़ा मुद्दा बनाएगी। वहीं दूसरी ओर डीएमके के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने टीवीके के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे जानते हैं कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों में उनकी हार तय है क्योंकि उनके अपने कार्यकर्ता ही नाराज हैं, और इसी भय के कारण वे अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। धारापुरम उपचुनाव के इस अहम पड़ाव पर दोनों प्रमुख ताकतों के बीच खिंची यह तलवार चुनावी परिणाम तक क्या रूप लेती है, इस पर पूरे तमिलनाडु की निगाहें टिकी हुई हैं।



















