बिहार के जमुई जिले में बेटियों के प्रति सामाजिक नजरिया बदलने की एक बेहद प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली है। गिद्धौर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गंगरा गांव में जब एक नवजात बच्ची अस्पताल से अपने घर पहुंची, तो परिजनों ने किसी बड़े पर्व जैसा माहौल तैयार कर दिया। परिवार ने अपनी इस नन्हीं बिटिया का नाम आरोही रखा है और उसके पहले कदम को यादगार बनाने के लिए पारंपरिक रीति-रिवाजों और आधुनिक उल्लास का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसे देखकर रास्ते से गुजर रहे राहगीर भी हैरान और भावुक हो गए।
करीब एक दर्जन फूलों से सजी गाड़ियां और डीजे की धुन
यह पूरा मामला गंगरा निवासी अमित कुमार सिंह के परिवार से जुड़ा है, जिनके घर हाल ही में पुत्री का जन्म हुआ। जब जच्चा और नवजात बच्ची को स्वास्थ्य केंद्र से छुट्टी मिलने के बाद घर वापस लाने का समय आया, तो परिजनों ने इस आगमन को साधारण तरीके से पूरा करने के बजाय बेहद खास बनाने का निर्णय लिया। अस्पताल परिसर से लेकर गांव के घर तक के सफर के लिए करीब एक दर्जन वाहनों को रंग-बिरंगे ताजे फूलों से पूरी तरह सजाया गया था।
इस काफिले के साथ चल रहे परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और करीबी लोग डीजे पर बज रहे मांगलिक और उल्लास भरे गीतों की धुन पर नाचते-झूमते आगे बढ़ रहे थे। जब यह भव्य काफिला सड़कों से गुजरा, तो आसपास के लोग ठहर गए। किसी ने दूर से देखा तो उसे लगा कि शायद कोई शाही बारात या बड़ा विजय जुलूस निकल रहा है, लेकिन जब लोगों को पता चला कि यह एक नवजात बालिका के स्वागत की तैयारी है, तो हर किसी ने परिवार के इस प्रयास की सराहना की।
मंगलाचरण और पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ गृह प्रवेश
काफिला जब गंगरा गांव में स्थित पैतृक आवास पर पहुंचा, तो वहां उत्सव का उत्साह और अधिक बढ़ गया। घर की महिलाओं और बुजुर्गों ने वैदिक मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते हुए नन्हीं आरोही का गृह प्रवेश कराया। पूरे आंगन को सजाया गया था और परिवार के सभी लोग अपनी नई पीढ़ी की सदस्य का अभिनंदन करने के लिए एकत्र थे।
परिवार के सदस्यों ने बातचीत में स्पष्ट किया कि उनके मन में बेटी के जन्म को लेकर तनिक भी मलाल या हिचकिचाहट नहीं थी। उनका मानना है कि संतान के रूप में कन्या का आना जीवन के सबसे बड़े सौभाग्य और अद्वितीय क्षणों में से एक है। परिजनों के अनुसार, वे इस क्षण को जीवन भर के लिए संजोकर रखना चाहते थे, ताकि बड़ी होकर जब आरोही यह देखे तो उसे अपने अस्तित्व पर गर्व हो।
बेटियां परिवार का गौरव, समाज को सकारात्मक संदेश
नवजात बच्ची के दादा दिलीप सिंह ने इस अवसर पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उनके घर केवल एक संतान का जन्म नहीं हुआ, बल्कि साक्षात लक्ष्मी का पदार्पण हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के आधुनिक दौर में बेटियां शिक्षा, प्रशासन, खेल और विज्ञान सहित जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं। किसी भी दृष्टिकोण से वे बेटों से पीछे नहीं हैं, इसलिए उन्हें बेटों के बराबर ही सम्मान, स्नेह और अवसर मिलना अनिवार्य है।
दिलीप सिंह का कहना था कि बच्ची के आगमन पर इस स्तर का आयोजन करने का मूल उद्देश्य समाज को यह स्पष्ट संदेश देना है कि बेटियां किसी भी दृष्टि से परिवार पर बोझ नहीं होतीं, बल्कि वे घर का मान और सम्मान बढ़ाती हैं। यह सोच जब तक हर गांव और कस्बे तक नहीं पहुंचेगी, तब तक सामाजिक बराबरी का सपना पूरा नहीं हो सकता।
जमुई में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे प्रेरक प्रसंग
उल्लेखनीय है कि जमुई क्षेत्र में बालिका के जन्म पर इस प्रकार का असाधारण उत्सव मनाए जाने का यह कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले बीते अगस्त महीने के दौरान जिले के चकाई प्रखंड क्षेत्र में भी एक ऐसा ही भावुक प्रसंग सामने आया था, जहां एक परिवार ने लगभग 38 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद बेटी का जन्म होने पर भव्य जश्न मनाया था। उस समय भी नवजात के स्वागत के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे, जिसने पूरे इलाके में बेटियों के प्रति सम्मान की एक मजबूत मिसाल कायम की थी।





















