निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब सड़कों पर पहुंच चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने देशव्यापी स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। राजनीतिक दलों का आरोप है कि आयोग के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था को पूरी तरह से केंद्रीकृत कर दिया गया है, जिससे मतदाता सूचियों की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं, जबकि विभिन्न राज्यों में राजनीतिक संगठन चुनाव आयोग के कार्यालयों के बाहर घेराव की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशांत भूषण ने लगाए गंभीर आरोप और मुकदमे की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने 25 सितंबर 2026 को निर्वाचन आयोग से जुड़े इस विवाद को अत्यंत संवेदनशील और गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आयोग के पूरे तंत्र को एकल नियंत्रण में सीमित कर दिया है। उनके अनुसार, आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने बार-बार अपनी असहमति जताई, लेकिन उनकी आपत्तियों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया।
प्रशांत भूषण ने तकनीकी ढांचे पर उंगली उठाते हुए स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के संपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे को पूरी तरह से केंद्रीकृत बना दिया गया है। मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने या पुराने नाम हटाने के समस्त अधिकार अब राजधानी दिल्ली से संचालित किए जा रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पूरी तरह खिलाफ है, इसलिए ज्ञानेश कुमार को केवल पद से मुक्त करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन पर औपचारिक कानूनी मुकदमा भी चलाया जाना चाहिए।
कांग्रेस का देशव्यापी घेराव और युवा कांग्रेस का मार्च
विपक्षी दल कांग्रेस ने विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के विरोध में देश भर में निर्वाचन आयोग के क्षेत्रीय कार्यालयों के सामने व्यापक प्रदर्शन का आह्वान किया है। नई दिल्ली में स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
इसी क्रम में भारतीय युवा कांग्रेस ने भी राजधानी में कड़ा रुख अख्तियार किया है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने 5 रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च निकालने की घोषणा की है। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बल संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रहे।
जयराम रमेश की ऐतिहासिक तुलना और मतदान अधिकार पर बयान
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी बात रखते हुए देश के दो प्रधानमंत्रियों के दौर की तुलना की। उन्होंने लिखा कि एक प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी को मताधिकार प्रदान किया था, जबकि दूसरे ने उनके अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की।
जयराम रमेश ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि दिसंबर 1988 में संसद द्वारा पारित 61वें संविधान संशोधन के जरिए ही मतदान की न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई थी। इस महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम ने देश के करोड़ों युवाओं को पहली बार मतदान का सीधा अधिकार देकर लोकतांत्रिक रूप से सशक्त बनाया था।
सीजेपी का 78 घंटे का अल्टीमेटम और तीन प्रमुख शर्तें
सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर तीखा हमला बोला है। एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से सामने आया कि ज्ञानेश कुमार के दो सहयोगी चुनाव आयुक्त उनके निर्णयों से सहमत नहीं थे और पिछले 10 महीनों की अवधि में उन्होंने कुल 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के तुरंत बाद सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार को 78 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देने की समयसीमा दी है। संयोजक ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में त्यागपत्र नहीं दिया गया तो जंतर-मंतर पर बड़ा जन-आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही सीजेपी ने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं, जिनमें विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्ष स्वतंत्र जांच कराना, पूर्व की मतदाता सूची को तुरंत बहाल करना और मुख्य निर्वाचन आयुक्त समेत अन्य आयुक्तों की नियुक्ति प्रणाली में व्यापक सुधार करना शामिल है। अभिजीत दीपके ने विपक्षी नेताओं के क्षेत्रों, जैसे ममता बनर्जी, एमके स्टालिन और पिनारायी विजयन के प्रभाव वाले इलाकों में व्यापक पैमाने पर वोट काटे जाने का भी दावा किया।
बिहार में राजद का पुतला दहन अभियान
बिहार में मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीधे आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। 25 सितंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में जोरदार विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तय की गई है।
राजद के अनुसार, यह राज्यव्यापी कार्यक्रम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के दिशा-निर्देशों और कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के विमर्श के बाद तय किया गया है। योजना के तहत दोपहर करीब 2 बजे सभी जिलों में मुख्य चुनाव आयुक्त के पुतले दहन किए जा रहे हैं, जिसमें पार्टी के कार्यकर्ता और स्थानीय नेता भारी संख्या में भाग ले रहे हैं।



















