गुजरात के सूरत में रोजी-रोटी कमाने वाले गोपालगंज के हजारों लोगों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी रेल मंडल ने सूरत-थावे-सूरत ताप्ती गंगा एक्सप्रेस को दीघवा दुबौली रेलवे स्टेशन पर रोकने का फैसला किया है। काफी समय से इलाके के लोग इस ठहराव की मांग कर रहे थे, और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रयास के बाद रेल मंत्रालय ने आखिरकार इसे हरी झंडी दे दी। इस घोषणा के साथ ही पूरे क्षेत्र के यात्रियों में उत्साह देखा जा रहा है।
किसे और क्यों मिलेगी राहत
गोपालगंज और बैकुंठपुर इलाके से बड़ी तादाद में लोग रोजगार, कारोबार और दूसरे कामों के सिलसिले में गुजरात आते-जाते रहते हैं। खासकर बैकुंठपुर, सिधवलिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोग कपड़ा कारोबार और नौकरी के लिए सूरत में बसे हुए हैं। अब इन्हीं हजारों प्रवासियों, श्रमिकों और व्यापारियों को सूरत तक आने-जाने का एक सीधा जरिया उनके घर के पास ही उपलब्ध हो जाएगा।
अब तक की परेशानी
इस अहम ट्रेन को पकड़ने के लिए अब तक स्थानीय यात्रियों को या तो थावे जंक्शन तक जाना पड़ता था, या फिर छपरा और मसरख जैसे दूर के स्टेशनों तक का सफर तय करना पड़ता था। इसमें उनका अतिरिक्त समय तो खर्च होता ही था, साथ ही जेब पर भी बोझ पड़ता था और मानसिक तौर पर भी काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी। दीघवा दुबौली पर ट्रेन रुकने से यह झंझट अब खत्म हो जाएगी।
दीघवा दुबौली का नया टाइम टेबल
रेलवे प्रशासन की आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक यह ठहराव फिलहाल प्रायोगिक तौर पर दिया गया है और स्टेशन पर ट्रेन दो मिनट रुकेगी। दोनों दिशाओं की समय-सारणी इस प्रकार है—
सूरत से थावे (19045 अप)
निर्धारित दिनों में सूरत से रवाना होने वाली यह ट्रेन शाम 19:20 बजे दीघवा दुबौली स्टेशन पहुंचेगी और दो मिनट के ठहराव के बाद 19:22 बजे थावे जंक्शन की ओर आगे बढ़ जाएगी।
थावे से सूरत (19046 डाउन)
वापसी में थावे से चलकर यह ट्रेन सुबह 06:28 बजे दीघवा दुबौली पहुंचेगी और दो मिनट रुकने के बाद 06:30 बजे मसरख जंक्शन तथा वाराणसी होते हुए सूरत के लिए प्रस्थान करेगी।
आर्थिक और सामाजिक असर
माना जा रहा है कि इस ठहराव का सबसे ज्यादा फायदा स्थानीय कपड़ा व्यापारियों और सूरत में रहकर मेहनत-मजदूरी करने वाले कामगारों को होगा। वाराणसी रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले इस स्टेशन पर ट्रेन रुकने से यात्रियों के समय और पैसे की भारी बचत तो होगी ही, पूरे इलाके के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद की जा रही है।













