मानसून में गमलों को सड़ने से बचाने के घरेलू उपाय और पौधों की देखभाल के आसान तरीकेकंगना रनौत के बेरोजगार वाले बयान पर सौरव दास की अनोखी प्रतिक्रिया, खुद की तुलना ऋतिक रोशन से कीभारत में लॉन्च हुआ एक्सक्लूसिव मिनी कनवर्टिबल का स्टारडस्ट एडिशन, कीमत 62.90 लाख रुपयेफाइनेंस में 20 लाख रुपये का पैकेज दिलाने वाले 3 ग्लोबल कोर्स, जानें CFA, CPA और FRM में कौन सा है बेस्टराम भक्तों को अब चढ़ावे की रसीद तुरंत मिलेगी, ट्रस्ट ने वेबसाइट में किया बदलाव30 जुलाई 2026 को मूलांक 9 के जातकों को मंगल से मिलेगी नई ऊर्जा, जिम्मेदारियों को पूरा कर हासिल करेंगे बढ़तसावन कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली गाजियाबाद से हरिद्वार तक बदला ट्रैफिक रूट, सफर पर निकलने से पहले जानें एडवाइजरीतेलंगाना में नल्ला विजय कुमार ने बनाई माचिस में समाने वाली सिल्क साड़ी, श्रीशैलम मंदिर में की अर्पितपाकिस्तान को सऊदी अरब से बड़ी मदद, 5 अरब USD के नकद भंडार की समयसीमा 3 साल बढ़ीप्रेडिक्शन मार्केट के दम पर रॉबिनहुड का रिकॉर्ड प्रदर्शन, दूसरी तिमाही में राजस्व 1.31 अरब डॉलर पहुंचा
जहानाबाद के किसान का जुड़ाव: 35 साल बाद भी खेतों में दौड़ रहा वही पुराना HMT ट्रैक्टर, जानिए 90 के दशक में कैसे होती थी खरीदबिहार
15 जून 2026, 9:24 am (45 दिन पहले)· 0

जहानाबाद के किसान का जुड़ाव: 35 साल बाद भी खेतों में दौड़ रहा वही पुराना HMT ट्रैक्टर, जानिए 90 के दशक में कैसे होती थी खरीद

जहानाबाद के किसान चंद्र शेखर का HMT ट्रैक्टर 35 साल बाद भी चालू है। उन्होंने बताया कि 90 के दशक में ट्रैक्टर खरीदना आज जैसा आसान नहीं था।

खेती-किसानी सदियों से हमारे देश की रीढ़ रही है, लेकिन इसका चेहरा वक्त के साथ पूरी तरह बदल गया। एक दौर वह था जब हल खींचने के लिए बैल, भैंस और इंसानी ताकत ही किसान का असली सहारा हुआ करती थी और हर काम पसीने से तय होता था। फिर आधुनिकता ने दस्तक दी और खेतों में बैलों की जगह ट्रैक्टर ने ले ली। आज हालत यह है कि जैसे खाद और बीज के बिना फसल नहीं उगाई जा सकती, वैसे ही ट्रैक्टर के बिना खेती की कल्पना भी मुश्किल है। खेती में इसकी भूमिका अब खाद-बीज जितनी ही अहम मानी जाती है।

आज आसान, पहले मुश्किल थी ट्रैक्टर की राह

मौजूदा दौर में ट्रैक्टर खरीदने पर सरकार किसानों की आर्थिक मदद करती है, जिससे यह काम पहले के मुकाबले काफी सरल हो गया है। लेकिन जरा उस समय की कल्पना कीजिए जब ट्रैक्टर बाजार में नया-नया आया था और गिने-चुने लोगों के पास ही दिखता था — तब इसे हासिल करना कितना टेढ़ा रहा होगा। इसी कहानी को समझने के लिए हमें 1991 के दौर में लौटना होगा। जहानाबाद जिले के किसान चंद्र शेखर आज भी 22 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और अपने खेतों में हर तरह की फसल उगाते हैं।

ये भी पढ़ें

दादा के जमाने से चली आ रही खेती

चंद्र शेखर TrendKia को बताते हैं कि उनके परिवार में खेती कोई नई बात नहीं, बल्कि दादा के समय से ही यही पेशा चला आ रहा है। आज वे खुद इसी से अपने परिवार का खर्च चला रहे हैं। हालांकि उन्हें इस बात का अफसोस है कि नई पीढ़ी अब खेती से दूरी बनाने लगी है। वे 1990 के दशक को याद करते हुए कहते हैं कि उस वक्त खेती ही आजीविका का सबसे बड़ा जरिया हुआ करती थी। उनके पिता को लगा कि इतनी बड़ी जमीन पर सिर्फ बैल और मजदूरों के बल पर खेती करना बेहद कठिन है, और तभी परिवार ने ट्रैक्टर खरीदने का फैसला किया। इसके बाद सवालों का सिलसिला शुरू हुआ — ट्रैक्टर की कीमत क्या है, उसका बॉडी पार्ट्स कहां तैयार होता है और आखिर यह मिलता कैसे है।

2 लाख में तैयार हुआ था ट्रैक्टर

चंद्र शेखर बताते हैं कि उनके ट्रैक्टर के घर आने की कहानी अपने आप में दिलचस्प है। उनके मुताबिक उस दौर में नियम ऐसा था कि ट्रैक्टर सिर्फ उन्हीं किसानों को मिल पाता था जिनके पास 22 एकड़ से ज्यादा जमीन होती थी। TrendKia इस नियम की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता, यह बात किसान के बताए अनुसार ही दर्ज की जा रही है। चंद्र शेखर के पास 22 एकड़ जमीन थी और उन्होंने HMT का एक ट्रैक्टर खरीदा। उस वक्त इंजन पार्ट्स की कीमत एक लाख 40 हजार रुपए थी, जबकि बॉडी पार्ट्स और बाकी सामान अलग से खरीदने और जुड़वाने में खर्च मिलाकर कुल करीब 2 लाख रुपए लगे। वे गर्व से कहते हैं कि इस ट्रैक्टर को आज 35 साल हो चुके हैं, फिर भी यह पूरी तरह सही-सलामत है और इसी से खेती का काम आज भी चल रहा है।

संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR