हरियाणा के गुरुग्राम स्थित हीरा नगर क्षेत्र में एक निर्माणाधीन मकान पर काम करते समय बिजली का करंट लगने से 28 वर्षीय मजदूर अजित कुमार की दुखद मौत हो गई। मृतक युवक मूल रूप से बिहार के मधेपुरा जिले के अंतर्गत आने वाली बेलारी पंचायत का रहने वाला था और गुरुग्राम में रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। 3 अगस्त की शाम हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद जब गुरुवार को अजित का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बेलारी पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। अपने घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य का शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके आवास पर एकत्र हुए।
हादसे का विवरण और सीसीटीवी फुटेज
प्राप्त जानकारी के मुताबिक 3 अगस्त की शाम गुरुग्राम के हीरा नगर में एक मकान की छत पर लेंटर ढलाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही कंक्रीट मिक्सिंग मशीन में अचानक से हाई-वोल्टेज बिजली का करंट उतर आया। कार्यस्थल पर काम कर रहे अजित कुमार जैसे ही उस मशीन के संपर्क में आए, वे करंट की चपेट में आ गए। हादसे का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें 28 वर्षीय मजदूर करंट लगते ही अचानक से जमीन पर गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। वहां मौजूद अन्य साथी मजदूरों ने तुरंत मशीन का संपर्क काटा और अचेत अवस्था में अजित को पास के अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
लापरवाही का आरोप और पुलिस जांच
घटना के बाद मृतक के छोटे भाई श्रवण कुमार ने गुरुग्राम पुलिस को एक लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस निर्माणाधीन मकान में ढलाई का काम चल रहा था, उसके ठीक ऊपर से हाई-वोल्टेज बिजली के तार गुजर रहे थे। इसके बावजूद मकान मालिक और निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार ने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कोई भी पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे। श्रवण कुमार का कहना है कि यदि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो उनके भाई की जान नहीं जाती। इस शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मकान मालिक तथा ठेकेदार की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ और ग्रामीणों की मांगें
अजित कुमार अपने पीछे पत्नी बेबी देवी के अलावा तीन मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। इनमें आठ वर्ष का बेटा विशाल कुमार, चार वर्ष की बेटी लक्ष्मी कुमारी और मात्र 10 माह का छोटा बेटा ऋषभ कुमार शामिल हैं। इसके अलावा वृद्ध पिता डोमी यादव, माता मंजू देवी और दो भाइयों की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी अजित के ही कंधों पर थी। परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की इस तरह अचानक हुई मौत से उनके घर में गहरा आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। बेलारी गांव के निवासियों ने बताया कि अजित बेहद मेहनती, सरल और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को उचित वित्तीय मुआवजा प्रदान किया जाए, परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और लापरवाही बरतने वाले मकान मालिक व ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ऊंचे तनाव के तारों से बढ़ते खतरे
निर्माणाधीन इमारतों के पास से गुजरने वाली हाई-टेंशन बिजली की लाइनें आए दिन गंभीर हादसों का सबब बन रही हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर 63 की छिजारसी कॉलोनी में भी ऐसा ही एक भयानक हादसा देखने को मिला था। वहां 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन लाइन का तार अचानक टूटकर सड़क से गुजर रहे तीन स्कूटी सवारों पर गिर गया था। उस हादसे में पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। शहरी क्षेत्रों में बिना सुरक्षा मानकों के बिजली के तारों के नीचे होने वाले निर्माण कार्य मजदूरों और राहगीरों के जीवन के लिए लगातार बड़ा जोखिम पैदा कर रहे हैं।



















