स्वीडिश क्रोना को मजबूत आर्थिक विकास और ब्याज दरों में बढ़ोतरी से मिल सकता है बड़ा सहारापिछोला झील के सीने पर तैरती मेवाड़ की अनूठी विरासत, पर्यटकों को क्यों लुभाता है जग मंदिरपुष्य नक्षत्र में मंगल के प्रवेश से 4 राशियों को 24 दिन तक मिलेंगे बड़े लाभराजस्थान में अवैध खननकारियों की हिंसक करतूतें: कहीं वन रेंजर की जान ली, कहीं अफसरों पर चढ़ाई गाड़ियांठंड के मौसम में कमरा गर्म रखने के लिए सबसे भरोसेमंद स्पेस हीटर और खरीदारी गाइडकांगो में बुंडीबुग्यो इबोला का बढ़ता कहर, 7000 से अधिक संक्रमित और आधे मरीजों की मौत के बाद टीकों की दौड़ तेजदक्षिण मध्य रेलवे में कवच 4.0 की शुरुआत, रेल पटरियों पर सुरक्षा का नया सुरक्षा कवच तैयारलालबागचा राजा के दर्शन के बाद गरमाया विवाद, कश्मीरा शाह ने घर तोड़ने वालों पर कसा तंजअमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्रिटेन के सुस्त सर्विस आंकड़ों से पाउंड 12 हफ्तों के निचले स्तर पर फिसलालकी अली और अजय देवगन का पहला तालमेल, 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' का नया भावुक ट्रैक 'मुस्कुरा दो' हुआ जारी
मिश्रित सब्जी की पैदावार से रोजाना ₹1000 से अधिक की आय बना रहे हैं छपरा के किसान सत्यनारायण यादवबिहार
23 सित॰ 2026, 1:42 pm (4 घंटे पहले)· 1

मिश्रित सब्जी की पैदावार से रोजाना ₹1000 से अधिक की आय बना रहे हैं छपरा के किसान सत्यनारायण यादव

छपरा के मांझी प्रखंड स्थित गोंडा गांव के किसान सत्यनारायण यादव ने पारंपरिक अनाजों के बदले मिश्रित सब्जी की खेती अपनाकर रोज ₹1,000 से अधिक की आय का जरिया बनाया है।

बिहार में छपरा जिले के अंतर्गत मांझी प्रखंड स्थित गोंडा गांव में रहने वाले किसान सत्यनारायण यादव ने अपनी जोत पर खेती की दिशा बदलकर नियमित कमाई का एक मजबूत मॉडल तैयार किया है। पहले वह पारंपरिक तरीके से केवल धान, गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलें ही उगाया करते थे। हालांकि इन सामान्य फसलों से परिवार के लिए अपेक्षित और संतोषजनक आमदनी हासिल नहीं हो पा रही थी। इसी आर्थिक चुनौती को देखते हुए उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से बकायदा तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर अपने खेतों में नकद आमदनी देने वाली हरी सब्जियों की मिश्रित पैदावार शुरू कर दी।

एक ही खेत में कई किस्मों का सटीक संयोजन

सत्यनारायण यादव ने अपने पूरे खेत को किसी एक अकेली फसल के हवाले करने के बजाय वहां आधा दर्जन से ज्यादा प्रकार की हरी सब्जियों की बोआई की है। उन्होंने खेत के एक बड़े हिस्से में 704 वैरायटी का बैंगन लगाया है, जिसके बारे में उनका कहना है कि यह किस्म काफी लंबे समय तक लगातार फल देती रहती है। इसी बैंगन के पौधों के बीच खाली जगहों का उपयोग करते हुए उन्होंने राधिका वैरायटी की भिंडी की कतारें भी लगाई हैं। भिंडी की यह किस्म पौधे तैयार होने के बाद निरंतर पैदावार देती रहती है। इसके अतिरिक्त खेत के दूसरे हिस्से में उन्होंने लौकी की व्यवस्थित बुवाई की है। इस तरह एक साथ छह से अधिक किस्मों की सब्जियां एक ही रकबे में फल-फूल रही हैं।

ये भी पढ़ें

रोटेशन में मंडी पहुंचकर निरंतर आमदनी

इस बहुफसली व्यवस्था का सबसे व्यावहारिक लाभ यह है कि यदि किसी दिन एक सब्जी की तुड़ाई धीमी या कम रहती है, तो दूसरी सब्जी तुरंत तोड़कर बाजार भेजने के लिए तैयार मिलती है। सत्यनारायण यादव कभी भी प्रतिदिन एक ही जैसी उपज लेकर मंडी नहीं जाते। वह चक्र बनाकर किसी दिन लौकी, किसी दिन बैंगन तो किसी दिन ताजी भिंडी लेकर स्थानीय बाजार पहुंचते हैं। खेत से फसलों की तुड़ाई का सिलसिला बिना रुके चलने के कारण उनकी जेब में रोजाना नकद पैसा आता रहता है। उनका कहना है कि इस मिश्रित मॉडल से वह हर दिन 1,000 रुपये से अधिक की कमाई कर लेते हैं, हालांकि यह अंतिम मुनाफा मौसम के मिजाज, कुल उत्पादन, मंडी भाव और दैनिक बिक्री की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

वैज्ञानिक सलाह और बाजार की मांग के आधार पर योजना

पारंपरिक खेती में जहां महीनों बाद एकमुश्त फसल कटने पर ही पैसा हाथ आता है, वहीं अलग-अलग समय पर तैयार होने वाली इन सब्जियों से किसान की नकदी की दैनिक जरूरतें पूरी होती रहती हैं। सत्यनारायण यादव अन्य काश्तकारों को यही सलाह देते हैं कि वे केवल रिवायती फसलों पर निर्भर न रहें, बल्कि मंडी की मांग को देखते हुए नकद फसलों को भी अपनी जमीन पर जगह दें। साथ ही उनका कहना है कि काम शुरू करने से पहले कृषि विशेषज्ञों अथवा कृषि वैज्ञानिकों से फसलों का सही चुनाव, उन्नत बीज, कतारों के बीच की दूरी, सिंचाई का चक्र और कीट नियंत्रण के तौर-तरीके अच्छी तरह समझ लेना बेहद जरूरी है। कम जोत वाले किसान मिट्टी, मौसम, पानी की उपलब्धता और स्थानीय बाजार की मांग का आकलन करके इस तरह का लाभदायक मिश्रित मॉडल आसानी से अपना सकते हैं।

सवाल-जवाब

सत्यनारायण यादव कहां के रहने वाले हैं?
सत्यनारायण यादव बिहार के छपरा जिले में स्थित मांझी प्रखंड के गोंडा गांव के निवासी हैं।
मिश्रित खेती से किसान सत्यनारायण यादव की रोज की कमाई कितनी है?
सत्यनारायण यादव के अनुसार इस मिश्रित खेती से वह प्रतिदिन 1,000 रुपये से अधिक की कमाई कर लेते हैं।
खेत में बैंगन और भिंडी की कौन सी किस्में लगाई गई हैं?
उन्होंने खेत में 704 वैरायटी का बैंगन लगाया है और इसके बीच में राधिका वैरायटी की भिंडी उगाई है।
सब्जियों की खेती से पहले वह कौन सी फसलें उगाते थे?
सब्जियों से पहले वह पारंपरिक रूप से धान, गेहूं और मक्का की खेती करते थे।
मिश्रित खेती अपनाने से पहले किसान ने क्या कदम उठाया?
उन्होंने इस बदलाव से पहले कृषि वैज्ञानिकों से विधिवत प्रशिक्षण हासिल किया था।
खेत में बैंगन और भिंडी के अलावा और कौन सी सब्जी लगाई गई है?
खेत के दूसरे हिस्से में लौकी लगाई गई है और वह कुल मिलाकर आधा दर्जन से ज्यादा प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·3 घंटे पहले

रोज़ाना एक हज़ार की कमाई सुनने में अच्छी लगती है, पर रोज़ सब्ज़ी बेचने जाने का झंझट और बाज़ार के भाव ऊपर-नीचे होना रोज़ आसान नहीं होता होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 घंटे पहले

बिहार दौरे के वक्त ऐसे किसानों से मिलना हमेशा सुकून देता है जो लीक से हटकर सोचते हैं। सत्यनारायण जी ने साबित कर दिया कि थोड़ी सी तकनीक और समझ से रोज की कमाई मुमकिन है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 घंटे पहले

अर्जुन जी, बात तो आपकी सही है कि ऐसे किसान प्रेरणा देते हैं। पर क्या मौसम की मार से फसल खराब होने पर भी इनकी रोज की कमाई सुरक्षित रह पाएगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

सत्यनारायण जी ने बढ़िया रास्ता निकाला है, लेकिन अगर बेमौसम बारिश या कीड़े लगने से पूरी फसल खराब हो जाए, तो इस दैनिक कमाई के मॉडल में नुकसान से बचने का क्या जुगाड़ है?

Rohan Verma@rohan-verma·3 घंटे पहले

करण भाई, बात तुम्हारी सही है पर रोज़ एक हज़ार रुपये का गणित हर दिन नहीं बैठता। मौसम और मंडी के भाव कब पलट जाएं, कह नहीं सकते।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp