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समस्तीपुर की 52 कोठी: जहां अंग्रेजों ने बनाए थे 52 तहखाने, जानिए इस ऐतिहासिक सड़क का अनसुना इतिहासबिहार
27 जुल॰ 2026, 6:07 pm (18 दिन पहले)· 0

समस्तीपुर की 52 कोठी: जहां अंग्रेजों ने बनाए थे 52 तहखाने, जानिए इस ऐतिहासिक सड़क का अनसुना इतिहास

बिहार के समस्तीपुर जिले के पटोरी में स्थित 52 कोठी रोड ब्रिटिश काल की कई अनकही कहानियों को समेटे हुए है। यहां अंग्रेजों द्वारा सुरक्षा और गुप्त बैठकों के लिए तहखाने बनाए गए थे, जिनका इतिहास आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है।

समस्तीपुर जिले के पटोरी प्रखंड मुख्यालय के बिल्कुल सामने मौजूद 52 कोठी रोड आज भी इतिहास के कई अनछुए अध्यायों को अपने भीतर समेटे हुए है। कवि चौक से होकर गुजरने वाला यह रास्ता कभी ब्रिटिश शासनकाल की तमाम गतिविधियों का एक मुख्य केंद्र हुआ करता था। बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों के बयानों के मुताबिक, उस दौर में अंग्रेजों ने यहां एक बहुत बड़ी हवेली का निर्माण करवाया था। इस हवेली के ठीक नीचे जमीन के अंदर कुल 52 अलग-अलग कोठरियां यानी तहखाने तैयार किए गए थे। इन्ही भूमिगत तहखानों की मौजूदगी के कारण यह पूरी जगह धीरे-धीरे 52 कोठी के नाम से मशहूर हो गई। जानकारों का कहना है कि इन तहखानों का मुख्य इस्तेमाल सुरक्षा के इंतजामों, गुप्त रणनीतिक बैठकों और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था। देश को आजादी मिलने से पहले इस पूरे इलाके में ब्रिटिश अफसरों का काफी आना-जाना लगा रहता था और यह क्षेत्र प्रशासनिक गतिविधियों का एक अहम ठिकाना था। हालांकि वक्त के साथ इस ऐतिहासिक धरोहर की रूपरेखा पूरी तरह बदल चुकी है, लेकिन इसकी पुरानी पहचान आज भी स्थानीय लोगों की यादों और इतिहास के पन्नों में अपनी जगह बनाए हुए है।

वेली से लेकर फैक्ट्रियों तक, लगातार बदलता रहा इस ऐतिहासिक मार्ग का ताना-बाना

इतिहासकारों और क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, 52 कोठी रोड का दायरा केवल अंग्रेजों की उस विशाल हवेली तक ही सीमित नहीं था। इसी मार्ग पर उस पुराने दौर में तंबाकू और सिगरेट बनाने वाली फैक्ट्रियां भी चलाया करती थीं, जो उस समय के व्यापार और रोजगार का सबसे बड़ा जरिया हुआ करती थीं। जब देश आजाद हुआ, तो अंग्रेजों के जमाने की वह हवेली, 52 कोठी और तमाम फैक्ट्री परिसरों को स्थानीय नागरिकों ने खरीद लिया था। आज स्थिति यह है कि उसी हवेली के परिसर में रिहायशी मकान और कोल्ड स्टोरेज चल रहे हैं, जबकि पुरानी सिगरेट फैक्ट्रियों की जगह अब विशाल तंबाकू उद्योग स्थापित हो चुके हैं। बीतते वक्त के साथ 52 कोठी की इमारत बेहद जर्जर हो चुकी थी, जिसे बाद में पूरी तरह गिराकर वहां आवासीय परिसर का विकास कर दिया गया। इसी रास्ते पर आगे चलकर टेलीफोन एक्सचेंज भी बनाया गया, जिससे यह क्षेत्र आधुनिक विकास की दौड़ में आगे बढ़ता गया। भले ही वे प्राचीन इमारतें अब लगभग पूरी तरह नेस्तनाबूद हो चुकी हैं, लेकिन इस सड़क का नाम आज भी लोगों को उस ब्रिटिश हुकूमत के दौर की याद दिलाता है।

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स्थानीय लोगों की स्मृतियों में आज भी जीवंत है 52 कोठी का अतीत

पटोरी के रहने वाले लक्ष्मीकांत चौधरी बताते हैं कि उन्होंने अपने बचपन के दिनों में बुजुर्गों से यह किस्सा सुना था कि अंग्रेजों ने सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यहां जमीन के भीतर 52 कोठरियों वाला एक अनोखा भवन बनवाया था। उनके मुताबिक, यह ऐतिहासिक जगह वर्तमान पटोरी के चंदन चौक से दक्षिण और पश्चिम दिशा की तरफ स्थित थी। जब अंग्रेज भारत छोड़कर अपने देश वापस लौट गए, तो कुछ समय तक इस भवन का इस्तेमाल सरकारी कामकाज के लिए भी किया गया। इसे सर्वे कार्यालय, अंचल कार्यालय और प्रखंड कार्यालय के रूप में भी संचालित किया गया था। उनका यह भी कहना है कि ब्रिटिश हुकूमत के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर इतने चौकन्ने थे कि वे इस भवन में छिपकर रहते थे और किसी भी आपात या विशेष परिस्थिति में इन तहखानों का जमकर इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि आज उस पुरानी भव्य संरचना के अधिकांश निशान मिट चुके हैं, लेकिन 52 कोठी रोड समस्तीपुर की उन गिनी-चुनी विरासतों में शुमार है जो आने वाली पीढ़ियों को जिले के औपनिवेशिक काल के इतिहास से रूबरू कराती है।

सवाल-जवाब

समस्तीपुर में 52 कोठी रोड कहां स्थित है?
यह मार्ग समस्तीपुर जिले के पटोरी प्रखंड मुख्यालय के सामने कवि चौक से होकर गुजरता है।
इस स्थान का नाम 52 कोठी क्यों पड़ा?
ब्रिटिश काल में अंग्रेजों द्वारा इस हवेली के नीचे 52 भूमिगत कोठरियां यानी तहखाने बनवाए गए थे, जिसके कारण यह स्थान 52 कोठी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
इन तहखानों का उपयोग किस काम के लिए किया जाता था?
कहा जाता है कि इन तहखानों का इस्तेमाल सुरक्षा, गोपनीय बैठकों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के संरक्षण के लिए किया जाता था।
आजादी के बाद इस ऐतिहासिक इमारत का क्या उपयोग हुआ?
अंग्रेजों के जाने के बाद इस भवन का उपयोग कुछ समय तक सर्वे कार्यालय, अंचल कार्यालय और प्रखंड कार्यालय के रूप में भी किया गया था।
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