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सहारनपुर के मंदिर गुंबद में अंग्रेजों से छिपे थे शहीद भगत सिंह, जानिए लाहौर कांड के बाद की पूरी कहानीउत्तर प्रदेश
14 अग॰ 2026, 6:52 pm (4 घंटे पहले)· 2

सहारनपुर के मंदिर गुंबद में अंग्रेजों से छिपे थे शहीद भगत सिंह, जानिए लाहौर कांड के बाद की पूरी कहानी

सन 1928 में ब्रिटिश अधिकारी सांडर्स को ढेर करने के बाद शहीद भगत सिंह ने सहारनपुर के फुलवारी आश्रम स्थित ठाकुर जी मंदिर के गुंबद में शरण ली थी। जानिए कैसे उन्होंने पुलिस को चकमा दिया और बाद में वहां बम फैक्ट्री स्थापित की।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उत्तर प्रदेश का सहारनपुर शहर देश की आजादी के दीवानों के लिए एक प्रमुख और सुरक्षित शरण स्थली रहा है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांति की योजनाएं बनाने और गुप्त बैठकों के आयोजन में इस ऐतिहासिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जीवन और क्रांतिकारी गतिविधियों से भी सहारनपुर का गहरा संबंध रहा है। जब ब्रिटिश हुकूमत की पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए चप्पे-चप्पे पर जाल बिछा रही थी, तब उन्होंने इसी शहर के एक मंदिर में छिपकर अपनी जान बचाई थी और बाद में स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी थी।

सांडर्स वध के बाद सहारनपुर में शरण और खुफिया घेराबंदी

ऐतिहासिक घटनाक्रम के अनुसार, वर्ष 1928 में लाहौर में अंग्रेज पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या के बाद शहीद भगत सिंह ब्रिटिश फौज और खुफिया तंत्र से बचते हुए गुप्त रूप से सहारनपुर पहुंचे थे। वे शहर के प्रसिद्ध फुलवारी आश्रम में ठहरे हुए थे। हालांकि, अंग्रेजी हुकूमत के खुफिया विभाग को जल्द ही उनके सहारनपुर में होने की भनक लग गई, जिसके बाद पूरे इलाके में भगत सिंह को पकड़ने के लिए व्यापक नाकेबंदी और तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। इस संकट के समय में भगत सिंह के संगठन से जुड़े सहयोगी ललिता प्रसाद अख्तर ने आगे आकर उनकी सुरक्षा का प्रबंध किया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में मदद की।

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ठाकुर जी मंदिर के गुंबद में बिताया कठिन समय

साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आजम के अनुसार, जब आश्रम की तरफ ब्रिटिश पुलिस के आने की सूचना मिली, तब भगत सिंह को आश्रम परिसर में स्थित ठाकुर जी मंदिर के ऊपरी गुंबद में छिपा दिया गया। अंग्रेजी सिपाहियों ने आसपास के पूरे इलाके को घेर लिया और गहन छानबीन की, लेकिन वे मंदिर के गुंबद तक नहीं पहुंच सके। शहीद भगत सिंह बिना अन्न और जल के पूरे एक दिन तक उस संकीर्ण स्थान में भूखे-प्यासे छिपे रहे। जब अंग्रेजों का कड़ा पहरा ढीला पड़ा और पुलिस वहां से हटी, तब वे अपने अन्य साथी क्रांतिकारियों के साथ चुपचाप पंजाब के लिए रवाना हो गए।

सहारनपुर में बम फैक्ट्री की स्थापना और क्रांति का अगला चरण

फुलवारी आश्रम की इस घटना के बाद भी भगत सिंह का सहारनपुर से नाता खत्म नहीं हुआ। क्रांतिकारी गतिविधियों को विस्तार देने के लिए वे बाद में तीन बार फिर सहारनपुर आए। स्वतंत्रता संग्राम को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से उन्होंने यहां एक गुप्त बम फैक्ट्री की स्थापना भी की थी। आज भी सहारनपुर का फुलवारी आश्रम और वहां बना ठाकुर जी का मंदिर भारतीय स्वाधीनता संग्राम की उस महान गाथा और अमर बलिदानियों के साहस का जीवंत साक्षी बना हुआ है।

सवाल-जवाब

सांडर्स कांड के बाद भगत सिंह कहां छिपे थे?
सन 1928 में लाहौर में सांडर्स की हत्या के बाद भगत सिंह उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित फुलवारी आश्रम के ठाकुर जी मंदिर के गुंबद में छिपे थे।
सहारनपुर में भगत सिंह की मदद किसने की थी?
उनके क्रांतिकारी संगठन से जुड़े सहयोगी ललिता प्रसाद अख्तर ने उन्हें ब्रिटिश पुलिस से बचाने और छिपाने में सहायता की थी।
भगत सिंह मंदिर के गुंबद में कितने समय तक रहे?
अंग्रेजी पुलिस की गहन तलाशी के दौरान भगत सिंह बिना अन्न और जल के पूरे एक दिन तक मंदिर के गुंबद में छिपे रहे।
क्या भगत सिंह ने सहारनपुर में बम फैक्ट्री बनाई थी?
हाँ, आश्रम से सुरक्षित निकलने के बाद भगत सिंह तीन बार और सहारनपुर आए और वहां एक गुप्त बम फैक्ट्री की स्थापना की।
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