बिहार सरकार की कैबिनेट बैठक में शिक्षा, सामाजिक कल्याण और ढांचागत विकास से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लग गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कुल 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, और सरकार का दावा है कि इन फैसलों का सीधा फायदा राज्य के छात्रों, शिक्षकों और गांव-देहात की महिलाओं को मिलेगा।
दो विश्वविद्यालयों को मिलेगा नया नाम
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े फैसले की रही। सरकार ने राज्य के दो विश्वविद्यालयों के नाम बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। अब एक विश्वविद्यालय को शिक्षाविद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से जाना जाएगा, जबकि दूसरे विश्वविद्यालय का नाम स्वतंत्रता सेनानी अमर शहीद जुब्बा साहनी पर रखा जाएगा। सरकार की तरफ से कहा गया है कि यह फैसला इन दोनों महान हस्तियों के योगदान को याद रखने और युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेने के मकसद से लिया गया है। शिक्षा जगत से जुड़े लोग इसे राज्य की विरासत को संस्थागत पहचान देने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
सरस्वती विद्या निकेतन के बच्चों को 6,000 रुपये का किट
स्कूली बच्चों के हित में भी कैबिनेट ने बड़ा कदम उठाया है। सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब पढ़ाई की जरूरी सामग्री मुफ्त मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने जीविका के माध्यम से एक खास योजना शुरू करने को मंजूरी दी है, जिसके तहत हर छात्र को 6,000 रुपये कीमत का किट दिया जाएगा। इन किटों को बच्चों तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी गांव-गांव में सक्रिय जीविका दीदियों के कंधों पर होगी। सरकार के मुताबिक इस फैसले का दोहरा फायदा होगा, एक तरफ बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन मिलेंगे, तो दूसरी तरफ जीविका दीदियों को भी काम और अतिरिक्त कमाई का एक नया जरिया मिलेगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण भी मजबूत होगा।
आठ और प्रस्तावों को हरी झंडी
दो विश्वविद्यालयों के नामकरण और स्कूली बच्चों को किट देने के फैसले के अलावा कैबिनेट ने जनहित, प्रशासनिक सुधार और ढांचागत विकास से जुड़े 8 और प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इन तमाम फैसलों से राज्य में रोजगार के नए मौके बनेंगे और विकास से जुड़े कामकाज की रफ्तार और तेज होगी।




















