बिहार में गांवों की बहुलता है और यहां के कई गांवों के नाम ऐसे हैं जो लोगों को हैरत में डाल देते हैं। कुछ नामों को सुनकर जहां हंसी आती है, वहीं कुछ अजीब भी लगते हैं। जहानाबाद जिले में एक ऐसा ही अनोखा गांव बसा है, जिसका नाम सुनते ही लोग असमंजस में पड़ जाते हैं। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव तक पहुंचने के लिए जहानाबाद से घोसी स्टेट हाईवे पकड़ना होता है। इसके बाद हाटी मोड़ से महज 5 किलोमीटर दक्षिण की ओर बढ़ने पर धनी गांव मिल जाता है।
क्या है इस अनोखे नाम के पीछे का इतिहास
धनी बिगहा नाम सुनते ही लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो जाते हैं कि आखिर इस जगह का ऐसा नाम क्यों पड़ा। बाहर से देखने पर यह गांव बाकी आम बस्तियों जैसा ही नजर आता है, लेकिन जब यहां के बाशिंदों से बातचीत की जाती है, तो इसके नाम की सार्थकता और यहां की खासियत समझ में आती है। गांव के 55 वर्षीय निवासी सूरज प्रसाद बताते हैं कि इस इलाके के सबसे पहले बाशिंदे धनी गोप थे जो एक जमींदार थे। उनका स्वभाव बेहद उदार था और वे हमेशा जरूरतमंदों की मदद करते थे। उनके इसी दयालु और मददगार चरित्र के कारण लोग उन्हें प्यार से धनी कहने लगे थे और उनके ही नाम पर इस जगह का नाम धनी गांव पड़ गया।
सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आगे
इस गांव में कुल 70 घर हैं और यहां की आबादी लगभग 500 लोगों की है। खास बात यह है कि इस छोटी सी आबादी में से करीब 30 घरों के लोग सरकारी सेवा में हैं। यहां के निवासी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं जिनमें शिक्षक, इंजीनियर और बिहार पुलिस जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। गांव के बुजुर्ग तेज नारायण यादव, जिनकी उम्र 75 वर्ष है, बताते हैं कि उनका गांव भले ही धन-दौलत के मामले में आगे न हो, लेकिन दिल से हमेशा धनी रहा है। जिला मुख्यालय से दूरी के बावजूद यह क्षेत्र समाज की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ है और यहां सरकारी नौकरी पाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
खेती के साथ बदल रहा युवाओं का रुझान
यह गांव बढ़ौना पंचायत के अंतर्गत आता है और यहां के लोगों का मुख्य पेशाानी कृषि ही है। हालांकि, समय के साथ अब हालात बदल चुके हैं। आज के युवा केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पढ़ाई-लिखाई पर भी पूरा जोर दे रहे हैं। इसी का नतीजा है कि गांव में शिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ रही है और लगातार नौकरियां मिल रही हैं। बुजुर्ग तेज नारायण यादव अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि उन्होंने जो दौर देखा था, आज का जमाना उससे काफी अलग और बेहतर हो चुका है।




















