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आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर है मरुआ का पौधा, जानिए इस्तेमाल करने के आसान तरीकेस्वास्थ्य
1 सित॰ 2026, 10:49 am (58 मिनट पहले)· 2

आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर है मरुआ का पौधा, जानिए इस्तेमाल करने के आसान तरीके

मरुआ का पौधा तुलसी जैसा दिखने वाला एक औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल पेट की समस्याओं, सर्दी-जुकाम और थकान दूर करने के लिए पारंपरिक घरेलू नुस्खों में किया जाता है।

घरों के आंगन और बगीचों में तुलसी के समान दिखने वाला मरुआ का पौधा आसानी से देखा जा सकता है। इसकी पत्तियां भले ही तुलसी से मिलती-जुलती प्रतीत होती हैं, लेकिन वनस्पति और गुणों के मामले में दोनों अलग प्रजातियां हैं। मरुआ की पत्तियों से एक विशेष प्रकार की महक आती है जो आसपास के वातावरण को तरोताजा कर देती है। ग्रामीण इलाकों में प्राचीन काल से ही लोग इसका उपयोग विभिन्न घरेलू उपचारों के लिए करते आ रहे हैं। कई लोग इसकी ताजी पत्तियों को सीधे तोड़कर चबाना पसंद करते हैं, यही कारण है कि इसे केवल सजावट के लिए ही नहीं बल्कि एक उपयोगी जड़ी-बूटी के रूप में भी घरों में उगाया जाता है।

पेट की परेशानियों में पारंपरिक राहत

डॉ. अनु शर्मा, वरिष्ठ आयुर्वेद परामर्शदाता एवं आर्युवेदम की संस्थापक के अनुसार मरुआ की पत्तियों का प्रयोग पेट से जुड़ी सामान्य दिक्कतों को दूर करने के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। गैस की समस्या, अपच और पेट फूलने जैसी स्थिति में इसकी पत्तियां काफी मददगार साबित हो सकती हैं। कई लोग भारी भोजन करने के बाद असहजता महसूस होने पर इसका सेवन करते हैं। इसकी तीव्र और अनोखी महक भूख को बढ़ाने में भी सहायक मानी जाती है। हालांकि यदि पेट की तकलीफ लंबे समय तक बनी रहे या तेज दर्द महसूस हो, तो घरेलू उपाय आजमाने के बजाय किसी योग्य चिकित्सक से तुरंत परामर्श करना चाहिए।

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सर्दी और गले की खराश के लिए असरदार

मौसम के बदलाव के दौरान सर्दी, खांसी और गले में खराश होना एक आम स्वास्थ्य समस्या है। ऐसी परिस्थितियों में मरुआ की पत्तियों का उपयोग पारंपरिक नुस्खे के रूप में किया जाता है। लोग इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर एक प्रकार की चाय या काढ़ा तैयार करते हैं। यह गर्म पेय गले को राहत देने का काम करता है। इसके अलावा, इसकी महक बंद नाक की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को तुरंत आराम का अहसास करा सकती है। यदि किसी को तेज बुखार है या सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य हो जाता है।

एंटीऑक्सीडेंट्स और प्राकृतिक तेलों का खजाना

मरुआ की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक तेल जैसे महत्वपूर्ण तत्व मौजूद होते हैं। ये घटक शरीर के भीतर फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं। इसी खूबी की वजह से मरुआ को स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद वनस्पति माना गया है। संतुलित मात्रा में इसका नियमित सेवन शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल मरुआ का सेवन करने भर से पूरा शरीर स्वस्थ नहीं रहता, बल्कि इसके साथ पौष्टिक आहार और पूरी नींद लेना भी आवश्यक है।

मानसिक शांति और ताजगी का स्रोत

इस पौधे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशिष्ट और मनमोहक सुगंध है। इसकी महक घर के परिवेश को ऊर्जावान और ताजा बनाए रखती है। अत्यधिक थकान या मानसिक तनाव के दौर में बहुत से लोग इसकी खुशबू से मन को हल्का महसूस करते हैं। इसी खूबी के चलते लोग इसे घरों में सजावटी पौधे के रूप में भी लगाते हैं। इसे गमलों में बहुत आसानी से पाला जा सकता है। पर्याप्त धूप और समय पर पानी मिलने पर यह पौधा काफी तेजी से वृद्धि करता है और लंबे समय तक हरा-भरा बना रहता है।

इस्तेमाल करने के सही और सुरक्षित तरीके

मरुआ की ताजी पत्तियों को उपयोग में लाने से पहले उन्हें स्वच्छ पानी से भली-भांति धो लेना आवश्यक है। सामान्य तौर पर एक बार में दो से चार पत्तियों को चबाने की सलाह दी जाती है। इन्हें पानी में खौलाकर हल्की चाय भी तैयार की जा सकती है। कुछ लोग इसका काढ़ा बनाकर पीना पसंद करते हैं। जो लोग पहली बार इसका सेवन कर रहे हैं, उन्हें बहुत कम मात्रा से इसकी शुरुआत करनी चाहिए। यह सोचना गलत है कि अधिक पत्तियां खाने से ज्यादा लाभ मिलेगा। यदि किसी भी प्रकार की शारीरिक असुविधा महसूस हो, तो इसका सेवन तत्काल रोक देना चाहिए।

किसी भी प्राकृतिक जड़ी-बूटी का असर हर इंसान पर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। गर्भवती महिलाओं को मरुआ का उपयोग करने से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को भी इसे अपनी मर्जी से शुरू नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से दवाएं खाने वाले मरीजों को डॉक्टर की अनुमति के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसकी अत्यधिक मात्रा शरीर में विपरीत प्रभाव डाल सकती है। यदि त्वचा पर खुजली, जलन या किसी प्रकार की एलर्जी के लक्षण दिखें, तो इसका प्रयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए।

घर पर उगाने के सरल उपाय और सावधानियां

मरुआ को किसी भी गमले या घर की क्यारी में बिना किसी विशेष कठिनाई के उगाया जा सकता है। इसकी पत्तियां अपने आसपास भीनी-भीनी खुशबू बिखेरती हैं और पौधा देखने में भी बहुत आकर्षक लगता है। पारंपरिक तौर पर इसके अनेक घरेलू लाभ बताए गए हैं। लेकिन बाजार से या किसी अन्य अज्ञात स्रोत से लाए गए पौधे को केवल उसकी बनावट देखकर मरुआ मान लेना ठीक नहीं है। रोपण या सेवन से पहले उसकी प्रामाणिकता की सही पहचान कर लेना बहुत जरूरी है। किसी चिकित्सीय समस्या के समाधान के लिए इसका उपयोग करने से पहले पेशेवर वैद्य या डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बुद्धिमानी भरा कदम है।

सवाल-जवाब

मरुआ का पौधा दिखने में कैसा होता है?
मरुआ का पौधा काफी हद तक तुलसी के पौधे जैसा दिखाई देता है और इसकी पत्तियों से एक खास खुशबू आती है।
पेट की किन समस्याओं में मरुआ फायदेमंद है?
गैस, अपच और पेट फूलने जैसी सामान्य परेशानियों में इसकी पत्तियां पारंपरिक रूप से राहत देती हैं।
सर्दी-जुकाम में इसका उपयोग कैसे किया जाता है?
इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर चाय या काढ़े के रूप में पिया जाता है जिससे गले को आराम मिलता है।
गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करना चाहिए या नहीं?
गर्भवती महिलाओं को मरुआ का सेवन करने से पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
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