भारत और चीन के आपसी संपर्कों की दिशा को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने देश का रुख पूरी दृढ़ता के साथ सामने रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक वास्तविक नियंत्रण रेखा और सीमा से जुड़े इलाकों में पूरी तरह अमन और स्थिरता कायम नहीं होती, तब तक दोनों मुल्कों के बाकी रिश्ते स्वाभाविक गति से आगे नहीं बढ़ सकते। सीमा पर उत्पन्न होने वाले किसी भी व्यवधान का सीधा और गहरा असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है, और इस हकीकत को नजरअंदाज करके आगे बढ़ना मुमकिन नहीं है। दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से तय सीमा का न होना दशकों पुराना विषय रहा है, फिर भी 2024 के बाद से रिश्तों में धीरे-धीरे सकारात्मक प्रगति देखी गई है।
दशकों पुरानी अनसुलझी सीमा और 45 वर्षों की शांति
विदेश मंत्री ने दोनों देशों के जटिल सीमा इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत और चीन के बीच कोई निर्धारित या सर्वमान्य सीमा रेखा नहीं है। यह मसला हाल-फिलहाल का नहीं बल्कि कई दशकों से निरंतर चला आ रहा है। इसके बावजूद एक लंबा दौर ऐसा रहा जब इस सीमा पर किसी भी तरह का रक्तपात नहीं हुआ। 1975 से लेकर 2020 तक, यानी पूरे 45 वर्षों के लंबे अंतराल में सीमा पर शांति व्यवस्था बनी रही और किसी सैनिक की जान नहीं गई। अंतिम बार घातक घटनाएं 1975 में दर्ज की गई थीं। उस चार दशक से अधिक के शांतिपूर्ण दौर में दोनों देशों ने अपने व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को काफी मजबूत किया था।
2020 की सैन्य झड़प और बदला हुआ परिदृश्य
लंबे समय से चले आ रहे इस शांतिपूर्ण ढांचे में बड़ा झटका वर्ष 2020 में लगा। विदेश मंत्री ने याद दिलाया कि जब देश और दुनिया कोविड लॉकडाउन के बेहद नाजुक और चुनौतीपूर्ण दौर से जूझ रहे थे, उस वक्त सीमा पर कई गंभीर मुद्दे एक साथ उठ खड़े हुए। तनाव गहराते-गहराते दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प में तब्दील हो गया, जिसमें दोनों ओर के कई सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस दर्दनाक घटना ने 1975 से स्थापित यथास्थिति और आपसी विश्वास को अचानक हिलाकर रख दिया था।
शांति भंग होने का द्विपक्षीय रिश्तों पर दीर्घकालिक असर
वर्ष 2020 की घटना ने यह साबित कर दिया कि सीमा पर पैदा होने वाली अशांति पूरे रिश्ते को किस हद तक पटरी से उतार सकती है। जयशंकर के अनुसार, 1975 के बाद से जिस व्यवस्था के तहत काम चल रहा था, उसमें यह एक बहुत बड़ा और चिंताजनक बदलाव था। इसके परिणाम अगले 5 वर्षों तक दोनों देशों के हर स्तर के संबंधों में पूरी तरह नजर आए। तनाव घटाने, सैन्य टकराव टालने और जमीन पर स्थिरता की वापसी के लिए निरंतर कूटनीतिक और सैन्य वार्ताएं करनी पड़ीं, जिसमें पूरे 4 साल का लंबा समय लग गया।
2024 से शुरू हुआ सुधार का दौर और आगे की राह
चीन के साथ संबंधों को पटरी पर लाने को लेकर भारत का दृष्टिकोण साफ करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि व्यापक द्विपक्षीय बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए सीमाओं पर स्थायी स्थिरता बुनियादी शर्त है। उन्होंने कहा कि अगर चीन सामान्य संबंध बहाल करना चाहता है, तो यह साधारण व्यावहारिक समझ की बात है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण शांति रहनी ही चाहिए। वर्ष 2024 के बाद से जैसे-जैसे सीमा पर हालात काफी हद तक सामान्य हुए हैं, वैसे-वैसे दोनों देशों के बीच संबंधों की गाड़ी भी सामान्य होने की दिशा में आगे खिसक रही है। इससे पूर्व दिए एक वक्तव्य में उन्होंने रेखांकित किया था कि विश्व में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच स्थिरता और साझे हितों के संतुलन से ही नया वैश्विक समीकरण आकार लेगा।
























